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टिप्पणी: शांति का नोबेल पाने वाली पत्रकार बोलीं- 'सच पर हमला कर, लोकतंत्र का दिल निकाल लेते हैं तानाशाह'
Sun, 10 Oct 2021 09:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 10 Oct 2021 09:06 PM IST
सार
इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन (आईएनएमए) ने कुछ दिन पहले ही मारिया रेसा से बातचीत की थी। तब उन्होंने दुनियाभर में पत्रकारिता, सच और लोकतंत्र के हाल पर बात की थी और बताया था कि कैसे इन पर हमला हुआ है।
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Nobel Peace Prize 2021 की विजेता फिलीपींस की खोजपरक पत्रकार मारिया रेसा
- फोटो : Twitter : @NobelPrize
विस्तार
इस साल शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए दो पत्रकारों के नाम चुने गए हैं। फिलीपींस की पत्रकार मारिया रेसा और रूस के पत्रकार दिमित्री मुरातोव को अपने देश में अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा करने के लिए यह सम्मान दिया जाना है। जहां रेसा ने फिलीपींस में राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतर्ते की सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ अपने मीडिया ग्रुप 'रैप्लर' (Rappler) के जरिए पत्रकारिता को धार दी, तो वहीं रूस में पुतिन सरकार के खिलाफ मुरातोव ने भी कुछ ऐसा ही किया।
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इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन (आईएनएमए) ने कुछ दिन पहले ही मारिया रेसा से बातचीत की थी। तब उन्होंने दुनियाभर में पत्रकारिता, सच और लोकतंत्र के हाल पर बात की थी और बताया था कि कैसे इन पर हमला हुआ है। उन्होंने गलत जानकारी और पत्रकारों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की आलोचना की थी।
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क्या बोली थीं मारिया रेसा?
तब मारिया ने सरकारों के रवैये पर चेतावनी देते हुए कहा था, "अगर आप लोगों को झूठ भी तथ्य की तरह मनवा सकते हैं, तो आप उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं।" रेसा ने कहा था कि रैप्लर आज इसीलिए चल रहा है, क्योंकि मैं जेल में नहीं हूं और क्योंकि हम सच की रोशनी फैलाते हैं।
अपने इंटरव्यू में रेसा ने मीडिया कंपनियों से अपील की थी कि वे सच पर केंद्रित रहें। उन्होंने कहा था- "जो ताकत हमारे पास पहले थीं, वे अब नहीं हैं। और जो कुछ बची हुई ताकत है, उससे सच बताने वालों को साथ लाइए। एक नई शब्दावली बनाइए और तथ्यों की रक्षा कीजिए।" तब रेसा ने कहा था कि तकनीक हमारे लिए श्राप भी है और आशीर्वाद भी।
पत्रकारों को पहचानने के लिए नोबेल कमेटी का शुक्रिया
अपने नोबेल शांति पुरस्कार पर रेसा ने बयान जारी कर कहा, "यह इससे बेहतर समय पर नहीं आ सकता था। ऐसा समय जब पत्रकारों और सच पर हमला किया जा रहा है। हम नोबेल कमेटी का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने फिलीपींस के साथ पूरी दुनिया में ऐसे पत्रकारों को पहचाना, जो कि मुश्किल दिनों और कठिन समय में भी रोशनी की तरह जगमगाते रहते हैं।"