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ड्रैगन की चाल: चीन ने बनावटी ढंग से रोक रखी है महंगाई, अंतरराष्ट्रीय बाजार का आकलन

Tue, 10 Aug 2021 06:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 10 Aug 2021 06:06 PM IST
सार

कंसल्टेंसी फर्म एनर्जी एस्पेक्ट्स के मुताबिक चीन के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में 22 करोड़ बैरल कच्चा तेल है। इससे चीन में कच्चे तेल की 15 दिन की मांग पूरी हो सकती है। इसके अलावा कारोबारी घरानों के पास मौजूद भंडार समेत कुल तेल का जितना भंडार चीन में है, उससे उसकी 60 दिन की मांग पूरी हो सकती है...

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no information about the extent to which China has stored commodities like crude oil, coal, metals etc in its reserves
चीन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन ने कच्चे तेल, कोयला, धातु आदि जैसी वस्तुओं को अपने भंडार में किस हद तक जमा कर रखा है, इस बारे में वह साफ जानकारी नहीं देता। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इन दिनों अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन वस्तुओं (जिन्हें कॉमोडिटी कहा जाता है) की कीमत बढ़ रही है। इन कीमतों के बढ़ने के कारण इनसे जुड़ी वस्तुओं के उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। उससे कारखाना गतिविधियों में गिरावट आती है। दुनिया में अभी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। कई प्रमुख देशों में इस समय बढ़ रही महंगाई का कारण कमोडिटी की कीमत में हो रही बढ़ोतरी ही है।

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक खुद चीन भी महंगाई की चुनौती झेल रहा है है। इसे काबू में रखने के लिए चीन अपने भंडार से इन वस्तुओं को बाजार में ला रहा है। उसने इसकी कई खेप जारी की हैं। ये ट्रेंड बीते अप्रैल से चल रहा है। इससे चीन एक हद तक कीमतों को नियंत्रित रखने में सफल रहा है। लेकिन बाकी दुनिया में महंगाई एक आम समस्या बन गई है। इसलिए कई विश्लेषकों ने आरोप लगाया है कि चीन की अस्पष्टता भी दूसरे देशों में कच्चे तेल, कोयला, तांबा, जस्ता और कोबाल्ट जैसी वस्तुओं की महंगाई की एक वजह है।
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कंसल्टेंसी फर्म एनर्जी एस्पेक्ट्स के मुताबिक चीन के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व) में 22 करोड़ बैरल कच्चा तेल है। इससे चीन में कच्चे तेल की 15 दिन की मांग पूरी हो सकती है। इसके अलावा कारोबारी घरानों के पास मौजूद भंडार समेत कुल तेल का जितना भंडार चीन में है, उससे उसकी 60 दिन की मांग पूरी हो सकती है। ये भंडार उससे कम है, जितना रखने की सलाह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) देती है। आईईए की सभी देशों को सलाह है कि वे अपने पास 90 दिन की मांग पूरी करने लायक भंडार रखें।

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इसी एजेंसी के मुताबिक चीन के पास 15 से 20 लाख टन तांबा, आठ से नौ लाख टन एलुमिनियम, और ढाई से चार लाख टन जस्ता का भंडार है। इसके अलावा उसके पास सात हजार टन कोबाल्ट का भंडार है। कोबाल्ट बैटरी बनाने के लिहाज महत्वपूर्ण धातु है। लेकिन जानकारों का कहना है कि एनर्जी एस्पेक्ट्स जैसी एजेंसियों ने जो बताया है, वह सिर्फ अनुमान है। चीन ने इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार की ज्यादा दिलचस्पी इसमें नहीं है कि चीन के पास कितना भंडार है। बल्कि उसकी दिलचस्पी यह जानने में है कि जिस समय दुनियाभर में महंगाई बढ़ रही है, चीन अपने यहां कीमतों को काबू में रखने में कैसे कामयाब हो रहा है।

वैसे विश्लेषकों की राय है कि अगर कमोडिटी भंडार से वस्तुओं को जारी कर चीन महंगाई रोक रहा है, तो ऐसे उपाय कुछ समय तक ही कामयाब होंगे। एचएसबीसी बैंक के एशियन इकॉनिमिक्स शाखा के सह-प्रमुख फ्रेडरिक नॉर्मन ने एक समाचार एजेंसी से कहा- ‘चीनी अधिकारी अपने हालिया कदमों के जरिए कमोडिटी मूल्यों में वृद्धि को रोकने में सफल रहे हैं। लेकिन मूल रूप से कच्चे पदार्थों की कीमत अंतरराष्ट्रीय मांग और आपूर्ति की स्थिति से तय होती है। इसे चीनी अधिकारी परोक्ष रूप से प्रभावित नहीं कर सकते।’

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