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ब्रह्मांड का रहस्य: पुराने दावे खारिज, शुक्र पर पानी था न जीवन, ऐसा कभी संभव भी नहीं होगा

Mon, 18 Oct 2021 08:50 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Mon, 18 Oct 2021 08:50 AM IST
सार

नए अध्ययन में सामने आया है कि शुक्र का तापमान कभी इतना कम हुआ ही नहीं कि वहां पर जलवाष्प संघनित हो सके और बारिश की बूंदों का निर्माण हो सके। 

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New Study says venus never had oceasn could not supprot life 
शुक्र ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

विस्तार

पृथ्वी के अलावा क्या किसी और ग्रह पर जीवन है? यह सवाल उतना ही पुराना है जितना कि यह पृथ्वी। ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बाद जैसे-जैसे इंसानी समझ बढ़ती गई, इस गुत्थी को सुलझाने के लिए तमाम खोजें भी होती रहीं, लेकिन अभी तक ब्रह्मांड का यह गूढ़ रहस्य उलझा का उलझा ही है। हालांकि, कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों से यह जरूर पता चला था कि पृथ्वी जैसा एक और ग्रह है शुक्र...जहां पर जीवन संभव हो सकता है। वैज्ञानिकों का दावा था कि आज से करोड़ों साल पहले इस ग्रह पर महासागर रहे होंगे और जीवन के अनुकूल परिस्थितियां भी होंगी। 

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नए अध्ययन ने खारिज किए पुराने दावे
वैज्ञानिक खोज आगे बढ़ ही रही थी कि अब एक नए अध्ययन ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। यूनीवर्सिटी ऑफ जेनेवा और स्विट्जरलैंड की नेशनल सेंटर ऑफ कॉम्पीटेंस इन रिसर्च के खगोलशास्त्रियों की टीम ने दावा किया है कि शुक्र ग्रह पर न कभी पानी था और न ही वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां थीं। और तो और ऐसा कभी संभव भी नहीं हो सकेगा।  
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शुक्र का तापमान कभी नहीं हुआ कम 
टीम ने अध्ययन किया कि एक ही समय में दो ग्रहों के वायुमंडल कैसे विकसित हो सकते हैं और क्या इस प्रक्रिया में महासागरों का निर्माण हो सकता है। खगोलविद मार्टिन टर्बेट बताते हैं कि अध्ययन में सामने आया है कि शुक्र ग्रह की वातावरणीय परिस्थितियों ने कभी जलवाष्प को संघनित ही नहीं होने दिया। इसका सीधा आशय यह है कि शुक्र का तापमान कभी इतना कम हुआ ही नहीं कि यहां की परिस्थतियों में बारिश की बूंदों का निर्माण हो सके। उन्होंने बताया कि यहां पर पानी हमेशा एक गैस के रूप में बना रहा और महासागर कभी बन ही नहीं पाए। 
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तो पृथ्वी पर भी होती शुक्र जैसी स्थिति
खगोलविदों की टीम का कहना है कि अगर पृथ्वी भी शुक्र की तरह सूरज के समीप होती ओर सूरज उतना ही चमकीला होता, जितना कि आज है तो यहां की परिस्थितियां काफी अलग होतीं और पृथ्वी भी शुक्र के समान ही दिखाई देती। उन्होंने कहा कि सूर्य शुरुआती समय में इतना तेज नहीं था, जितना कि आज है। इसी कारण सूर्य ने पृथ्वी को ठंडा होने दिया और यहां महासागरों का निर्माण हो पाया।

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