फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Nepal upper house endorses proposal to consider amendment to update new political map

नेपाल : उच्च सदन ने नए नक्शे को संविधान में शामिल करने के लिए रखा बिल में संशोधन का प्रस्ताव

Sun, 14 Jun 2020 07:52 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 14 Jun 2020 07:52 PM IST
सार

नेपाल के नए मानचित्र में भारत के उत्तराखंड राज्य के तीन इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को शामिल किया गया है। शनिवार को नेपाली कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता पार्टी-नेपाल और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने नए विवादित नक्शे को शामिल करते हुए राष्ट्रीय प्रतीक को अद्यतन करने के लिए संविधान की तीसरी अनुसूची को संशोधित करने संबंधी सरकारी विधेयक के पक्ष में मतदान किया था।

विज्ञापन
Nepal upper house endorses proposal to consider amendment to update new political map
नेपाल के उच्च सदन में बिल में संशोधन के लिए रखा गया प्रस्ताव - फोटो : एएनआई

विस्तार

नेपाल की संसद के उच्च सदन ने रविवार को देश के नए राजनीतिक नक्शे को संविधान में शामिल करने के लिए विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इन नए नक्शे में नेपाल ने भारत के तीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताया गया है। बता दें कि नेपाल की संसद के निचले सदन ने एक दिन पहले यानी शनिवार को नक्शे में संशोधन के इस बिल को अनुमति दे दी थी।

विज्ञापन


अब इस विधेयक को नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहां उसे एक बार फिर इसी प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पास नेशनल असेंबली में दो तिहाई बहुमत है। नेशनल असेंबली से विधेयक के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल किया जाएगा। सरकार ने बुधवार को विशेषज्ञों की एक नौ सदस्यीय समिति बनाई थी जो इलाके से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य और साक्ष्यों को जुटाएगी।
विज्ञापन


काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय असेंबली सचिवालय के सचिव राजेंद्र फुयाल ने रविवार को उच्च सदन की पहली बैठक में इस बिल को सामने रखा। वहीं, रविवार को ही हुई उच्च सदन की दूसरी बैठक में कानून मंत्री शिव माया तुंबाहांगफे ने चर्चा के लिए विधेयक पर विचार करने का प्रस्ताव रखा। चर्चा के बाद बिल पर विचार को सर्वसम्मति से समर्थन मिला। 
विज्ञापन
विज्ञापन


बिल के प्रावधानों के खिलाफ अगर कोई संशोधन होगा तो उसे स्थानांतरित करने के लिए राष्ट्रीय असेंबली ने विधायकों को 72 घंटे का समय देगी। फुयाल ने कहा, 'हम अगले चार दिनों के भीतर विधेयक का समर्थन करने के लिए आवश्यक तैयारी कर रहे हैं।' असेंबली से अनुमति मिलने के बाद इस बिल को प्रमाणीकरण के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल कर लिया जाएगा। इसके बाद  सभी आधिकारिक दस्तावेजों में नए नक्शे का इस्तेमाल होने लगेगा।

भारत नहीं है सहमत

वहीं, भारत नेपाल के इस फैसले से कतई सहमत नहीं है। नेपाल के इस कदम पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा था कि हम इस मामले में अपना पक्ष साफ कर चुके हैं। इस तरह का कृत्रिम विस्तार ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह कदम सीमा मुद्दे पर आपसी बातचीत और समझ के खिलाफ भी है।

क्या है मामला

भारत और नेपाल के रिश्ते सीमा विवाद के कारण तनावपूर्ण चल रहे हैं। भारत इस नक्शे पर लगातार आपत्ति जता रहा है। नेपाल ने यह विवाद तब शुरू किया, जब भारत ने कैलाश-मानसरोवर जाने वाले बीहड़ मार्ग पर सड़क बनाते हुए चीन सीमा तक गाड़ी से पहुंचने की उपलब्धि का उद्घाटन किया था। नेपाल का आरोप है कि भारत ने यह सड़क उसकी संप्रभुता वाले क्षेत्र में बनाई है। हालांकि भारत ने उसके दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया।



नेपाल ने लिपुलेख को अपना हिस्सा बताते हुए विरोध किया और 18 मई को नया नक्शा जारी किया। इसमें भारत के तीन इलाके लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना हिस्सा बताया। नेपाल के इस कदम पर भारत ने साफ कर दिया है कि नेपाल का दावा ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित नहीं है। भारत के लगातार कड़े विरोध के बावजूद नेपाल अब इस नक्शे पर अड़ गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed