फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Nepal President Bhandari refuses to sign Citizenship Amendment Bill; experts say "unconstitutional move"

Nepal: नागरिकता अधिनियम में संशोधन बिल को राष्ट्रपति ने नहीं दी मंजूरी, विशेषज्ञों ने बताया संवैधानिक झटका

Wed, 21 Sep 2022 04:05 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Amit Mandal Updated Wed, 21 Sep 2022 04:05 PM IST
सार

विधेयक वैवाहिक आधार पर नागरिकता के अधिकार को परिभाषित करता है और गैर-सार्क देशों में रहने वाले अनिवासी नेपालियों को गैर-मतदान नागरिकता सुनिश्चित करता है।

विज्ञापन
Nepal President Bhandari refuses to sign Citizenship Amendment Bill; experts say "unconstitutional move"
President Bidya Devi Bhandari - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने निर्धारित समय सीमा के भीतर नेपाल नागरिकता अधिनियम में संशोधन के लिए एक महत्वपूर्ण विधेयक पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है, जिसे संसद के दोनों सदनों द्वारा दो बार समर्थन दिया गया था। संवैधानिक विशेषज्ञों ने संविधान के लिए एक गंभीर झटका बताया है। राष्ट्रपति कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी भेश राज अधिकारी ने कहा कि विधेयक पर मंगलवार आधी रात तक हस्ताक्षर नहीं किए। राष्ट्रपति ने इसे पहले भी यह कहते हुए वापस भेजा था कि संसद को संविधान के अनुसार विधेयक पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

विज्ञापन


15 दिनों की समयसीमा के भीतर विधेयक को मंजूरी नहीं दी
अध्यक्ष अग्नि प्रसाद सपकोटा जिन्होंने 5 सितंबर को संशोधन विधेयक को फिर से प्रमाणित किया था, उन्होंने इसे प्रमाणीकरण के लिए भंडारी भेजा था। हालांकि राष्ट्रपति ने प्रमाणन के लिए संविधान द्वारा दी गई 15 दिनों की समयसीमा के भीतर विधेयक को मंजूरी नहीं दी। नागरिकता अधिनियम में दूसरा संशोधन मधेश-केंद्रित दलों और अनिवासी नेपाली संघ की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से किया गया था। विधेयक की अस्वीकृति ने कम से कम 50 लाख गैर-निवासी लोगों को प्रभावित किया है जो अपने राष्ट्रीय पहचान पत्र प्राप्त करने के लिए इसके पारित होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
विज्ञापन


संविधान विशेषज्ञ त्रिपाठी ने कहा, संविधान का हुआ अपहरण
विधेयक वैवाहिक आधार पर नागरिकता के अधिकार को परिभाषित करता है और गैर-सार्क देशों में रहने वाले अनिवासी नेपालियों को गैर-मतदान नागरिकता सुनिश्चित करता है। समाज के कुछ लोगों ने इसकी  यह कहते हुए आलोचना की कि यह नागरिकता के लिए विदेशी महिलाओं को नेपाली पुरुषों से शादी करने से नहीं रोकता है। संविधान विशेषज्ञ और अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि यह संविधान के लिए एक गंभीर झटका है। त्रिपाठी ने कहा कि संविधान का अपहरण कर लिया गया है, राष्ट्रपति ने संविधान से हटकतर काम किया है। त्रिपाठी ने कहाकि अब हम एक गहरे संवैधानिक संकट का सामना कर रहे हैं। राष्ट्रपति संसद के खिलाफ नहीं जा सकते। संसद द्वारा पारित विधेयक को प्रमाणित करना राष्ट्रपति का कर्तव्य है। पूरी संवैधानिक प्रक्रिया अब पटरी से उतर गई है। केवल सर्वोच्च न्यायालय के पास संविधान की व्याख्या करने की शक्ति है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 113 (4) में एक प्रावधान कहता है कि अगर बिल को प्रमाणीकरण के लिए फिर से भेजा गया हो तो राष्ट्रपति को बिल को प्रमाणित करना होगा। 1 अगस्त को पहली बार प्रमाणीकरण के लिए भेजा गया बिल, पहले पुनर्विचार के लिए संसद में लौटा दिया गया था। हालांकि, संसद के दोनों सदनों ने बिना कोई बदलाव किए विधेयक का फिर से समर्थन किया और इसे फिर से राष्ट्रपति के पास भेज दिया। राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, भंडारी का यह कदम संविधान के अनुरूप है। राष्ट्रपति के राजनीतिक मामलों के सलाहकार लालबाबू यादव ने कहा कि राष्ट्रपति संविधान के अनुरूप काम कर रही हैं। इस बिल ने विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है और इसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी राष्ट्रपति की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed