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Nepal: ओली का वादा- नागरिकता विवाद हल करेंगे, पर समाधान क्या है ये नहीं बताया

Fri, 04 Nov 2022 06:07 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 04 Nov 2022 06:07 PM IST
सार

Nepal: नागरिकता मुद्दे के अलावा यूएमएल ने नेपाल की जनता से 20 अन्य प्रमुख वादे किए हैँ। घोषणापत्र जारी करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने कहा कि उनकी सरकार बनी, तो एक महीना के अंदर वंशानुगत आधार पर नागरिकता मिलने से जुड़े विवाद को हल कर देगी...

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Nepal: kp sharma oli promise to resolve the citizenship dispute
Nepal: शेर बहादुर देउबा और केपी शर्मा ओली - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल में प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनाइटेड मार्क्सिस्ट- लेनिनिस्ट) ने अगले आम चुनाव में नागरिकता के सवाल को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है। पार्टी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में कहा है कि सत्ता में आने पर छह महीनों के अंदर वह नागरिकता संबंधी तमाम मसलों को हल कर देगी। नेपाल में नागरिकता का मुद्दा लंबे समय से लटका हुआ है। हाल में शेर बहादुर देउबा सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून पारित किया था, लेकिन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने उस पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया।

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नागरिकता मुद्दे के अलावा यूएमएल ने नेपाल की जनता से 20 अन्य प्रमुख वादे किए हैँ। घोषणापत्र जारी करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने कहा कि उनकी सरकार बनी, तो एक महीना के अंदर वंशानुगत आधार पर नागरिकता मिलने से जुड़े विवाद को हल कर देगी। बाकी सभी मसलों को छह महीनों में हल किया जाएगा। लेकिन यूएमएल ने अपने घोषणापत्र में यह नहीं बताया है कि ये हल क्या होगा।

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देउबा सरकार की तरफ से पारित बिल में नेपाल में जन्म लेने के आधार पर नागरिकता देने की प्रक्रिया तय की गई थी। तब यूएमएल ने इस विधेयक का विरोध किया था। अनुमान है कि मधेस इलाके में इसका खामियाजा यूएमएल को भुगतना पड़ सकता है। इस इलाके में भारतीय मूल के बाशिंदों का बहुमत है। टीकाकारों ने कहा है कि अब अगर पार्टी ने इस सवाल को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है, तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए था कि वह ऐसा क्या समाधान पेश करेगी, जिस पर सभी पक्ष सहमत हों।

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नेपाल में आम चुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा। उस दिन संसद के निचले सदन- प्रतिनिधि सभा के प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। साथ ही सातों प्रांतों की असेंबलियों की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर भी उसी दिन मतदान होगा। ऐसी कुल 330 प्रांतीय सीटें हैं। नेपाल में संसदीय चुनाव प्रत्यक्ष और आनुपातिक निर्वाचन के आधार पर होता है। प्रत्यक्ष निर्वाचन के दौरान मिले वोट प्रतिशत के आधार पर बाकी सीटें पार्टियों को आवंटित की जाती हैं। प्रतिनिधि सभा में ऐसी 110 सीटें हैं।

यूएमल ने कहा है कि जो नीतियां देश की समृद्धि की राह में बाधक बनी हुई हैं, सत्ता में आने पर वह उनमें सुधार करेगी। पार्टी ने कहा है कि अत्यधिक राजनीतिकरण के कारण कई सरकारी संगठन निष्क्रिय हो गए हैं। उनका पेशेवर आधार पर पुनर्गठन किया जाएगा और उन्हें सक्रिय किया जाएगा। यूएमल ने खाद्य सुरक्षा पर खास जोर देने और न्यूनतम तनख्वाह एवं समयबद्ध वेतन-वृद्धि के नियम के आधार पर पांच लाख नौकरियां पैदा करने का वादा भी किया है।

इस बीच नेपाल के निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रचार संबंधी नए नियम जारी किए हैं। इसके तहत जो भी उम्मीदवार जन सभा का आयोजन करना चाहेंगे, उन्हें पहले इसके लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति लेनी होगी। प्रधानमंत्री, संघीय और प्रांतीय मंत्रियों पर भी ये नियम लागू होगा। शामिल मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश कुमार थपलिया ने बुधवार को कहा कि सभी पार्टियों को गुरुवार से दूसरे चरण का चुनाव प्रचार शुरू करने की इजाजत दी गई है।

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