Nepal-US Partnership: प्रधानमंत्री देउबा के लिए एक झटका है एसपीपी में शामिल न होने का फैसला
अमेरिका का कहना है कि उसने 2019 में नेपाल को एसपीपी में शामिल कर लिया था। यह कदम नेपाली सेना की तरफ से 2015 और 2017 में इसके लिए भेजी गई अर्जी के आधार पर उठाया गया। हालांकि 2015 में केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री थे...
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अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी) में शामिल ना होने के नेपाल सरकार के फैसले को प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के लिए एक झटका समझा जा रहा है। नेपाल सरकार ने हफ्ते भर से इस मुद्दे पर देश में जारी गहरे विवाद के बाद सोमवार को यह फैसला लिया। उसे यह फैसला उस समय लेना पड़ा है, जब प्रधानमंत्री देउबा के अमेरिका जाने के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। देउबा के जुलाई के मध्य में अमेरिका की सरकारी यात्रा पर जाने की संभावना है।
सोमवार शाम कैबिनेट की बैठक में हुआ फैसला
एसपीपी का मामला पिछले हफ्ते मीडिया में आई इन रिपोर्टों के बाद गरमाया था कि अमेरिका एसपीपी में शामिल होने के लिए नेपाल सरकार पर दबाव डाल रहा है। समझा जाता है कि हाल में देउबा सरकार की नीति अमेरिका की तरफ ज्यादा झुक गई है। इसलिए मीडिया में आई खबर ने हंगामा खड़ा हो गया। नेपाली संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति ने विदेश मंत्री नारायण खड़का और सेनाध्यक्ष प्रभुराम शर्मा को बुला कर उनसे सवाल-जवाब किए। इसके बाद समिति ने प्रधानमंत्री देउबा को तलब किया, लेकिन वे रविवार को पेश नहीं हुए। तब समिति ने देउबा को इसी हफ्ते फिर से पूछताछ के लिए बुलाने का फैसला किया था।
इसी बीच सोमवार शाम कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि नेपाल एसपीपी में शामिल नहीं होगा। बैठक के बाद संघीय मामलों के मंत्री राजेंद्र श्रेष्ठ ने मीडियाकर्मियों से कहा- ‘बैठक में तीन फैसले किए गए, जिसमें नेपाल एसपीपी में शामिल होने की दिशा में अब आगे नहीं बढ़ेगा, इस बारे में अमेरिका को सूचना दे दी जाएगी, और अब ऐसे सभी पत्राचार सिर्फ विदेश मंत्रालय के जरिए ही होंगे। सेना के सीधे पत्राचार करने से देश का भला नहीं हुआ है। तमाम पत्राचार विदेश मंत्रालय के जरिए ही होने चाहिए थे।’
अमेरिका बोला- 2019 में एसपीपी में शामिल हो गया था नेपाल
अमेरिका का कहना है कि उसने 2019 में नेपाल को एसपीपी में शामिल कर लिया था। यह कदम नेपाली सेना की तरफ से 2015 और 2017 में इसके लिए भेजी गई अर्जी के आधार पर उठाया गया। हालांकि 2015 में केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री थे, लेकिन पिछले हफ्ते इस बारे में खबर लीक होने के बाद उनकी पार्टी इस मुद्दे पर आक्रामक हो गई। इस बीच नेपाली कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी अमेरिका के सैनिक गठबंधन में नेपाल के शामिल होने को लेकर आपत्ति जताई। समझा जाता है कि विपक्ष और कुछ अपने सहयोगियों के दबाव के कारण प्रधानमंत्री देउबा एसपीपी से नेपाल को अलग करने के प्रस्ताव पर सहमत हो गए।
देउबा को आम तौर पर अमेरिका की तरफ झुकाव रखने वाला नेता समझा जाता है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ताजा फैसले से अमेरिका असहज होगा। इसका असर देउबा की अगली अमेरिका यात्रा पर पड़ सकता है। पर्यवेक्षकों की राय है कि इस विवाद के कारण नेपाल के तमाम दलों और बड़े नेताओं के साथ-साथ नेपाली सेना की छवि भी खराब हुई है। नेपाली सेना ने पहले एसपीपी में शामिल होने जैसी किसी बात का खंडन किया था। लेकिन बाद में उसने स्वीकार किया कि उसने इसके लिए पहल की थी।