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सीएए पर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का अजीबोगरीब बयान, कहा- नागरिकता जाने के खतरे पर रोक जरूरी

Wed, 19 Feb 2020 04:46 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद Published by: अनवर अंसारी Updated Wed, 19 Feb 2020 04:46 PM IST
सार

भारत के संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर चिंताओं के बीच संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटारेस ने कहा कि जब किसी नागरिकता कानून में बदलाव होता है तो किसी की नागरिकता न जाए, इसके लिए सबकुछ करना जरूरी है।

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Necessary to prevent statelessness when nationality laws are changed UN chief Antonio Guterres
Antonio Guterres

विस्तार

पाकिस्तान की तीन दिन की यात्रा पर आये गुटारेस से जब एक साक्षात्कार में पूछा गया कि क्या वह भारत में नए कानूनों को लेकर चिंतित हैं तो उन्होंने कहा कि जाहिर तौर पर हूं। क्योंकि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें संयुक्त राष्ट्र की संबंधित इकाई अधिक सक्रिय है। 

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने डॉन न्यूज टीवी से कहा कि शरणार्थियों के लिए वर्तमान उच्चायुक्त इस स्थिति को लेकर काफी सक्रिय हैं। क्योंकि इस तरह के कानूनों से नागरिकता जाने का खतरा पैदा होता है।  उन्होंने कहा कि जब किसी नागरिकता कानून में बदलाव किया जाता है तो यह ख्याल रखना निहायत जरूरी है कि किसी की नागरिकता नहीं जाए। 
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भारत सरकार का कहना है कि सीएए उसका आंतरिक मामला है और इसका उद्देश्य पड़ोसी देशों में उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों को संरक्षण प्रदान करना है।

कश्मीर पर भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की

गुटारेस ने कश्मीर के संदर्भ में कहा कि कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त की दो रिपोर्टों ने वहां के घटनाक्रम के बारे में स्पष्ट रूप से बयां करने में अहम भूमिका निभाई है और जरूरी है कि इन रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाए।

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गुटारेस ने रविवार को इस्लामाबाद में कहा वह कश्मीर के हालात को लेकर चिंतित हैं और वह लंबे समय से अटके मुद्दे के समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार हैं।

भारत ने कहा- पाक द्वारा कब्जाए गए क्षेत्र को खाली कराएं संयुक्त राष्ट्र

भारत ने उनकी पेशकश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस वास्तविक मुद्दे पर ध्यान देना है, वह है कि पाकिस्तान द्वारा अवैध तरीके से और जबरन कब्जाए गए क्षेत्रों को खाली कराया जाए। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में कहा कि भारत के रुख में बदलाव नहीं हुआ है। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा।  उसने कहा कि अगर अन्य मुद्दे हैं तो उन पर द्विपक्षीय तरीके से बातचीत होगी। तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है।



जब पूछा गया कि संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर जाकर कथित मानवाधिकार उल्लंघन की जांच के लिए उच्चाधिकार प्राप्त जांच आयोग क्यों नहीं बनाया तो महासचिव ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की संचालन इकाइयां या सुरक्षा परिषद ही अपना फैसला ले सकते हैं, लेकिन ये रिपोर्ट प्रामाणिक, संगत और बहुत महत्वपूर्ण हैं।

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