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म्यांमार चुनाव: आंग सान सू की हैं एनएलडी की बड़ी जीत के पीछे या कुछ और?

Wed, 11 Nov 2020 10:07 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, रंगून
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, रंगून Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 11 Nov 2020 10:07 PM IST
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Myanmar Election: opposition raised questions on fairness of election
आंग सान सू की - फोटो : फाइल

म्यांमार में रविवार को हुए मतदान के सभी नतीजे आने में अभी कई दिन और लगेंगे, लेकिन अब उनका रुझान बहुत साफ हो गया है। यह साफ है कि आंग सान सू की की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) एक बड़ी जीत दर्ज करने जा रही है। पार्टी का लक्ष्य संसद में 322 सीटें जीतने का था, जिससे वह संविधान संशोधन करने में कामयाब हो सके। रुझानों के आधार पर उसका दावा है कि वह उससे अधिक सीटें जीतने जा रही है। लेकिन इतनी बड़ी जीत की बनी संभावना ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर संदेह भी पैदा कर दिए हैं। 

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विपक्षी दल यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (यूएसडीपी) को ऐसे कई चुनाव क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा, जिन्हें उसका गढ़ समझा जाता था। उसका प्रदर्शन 2015 के चुनाव की तुलना में काफी कमजोर रहने की संभावना है। मंगलवार को पार्टी के अध्यक्ष यू थान हतेय ने एक वीडियो जारी कर कहा कि चुनाव के नतीजों की वैधता विवादित है। मतदान की प्रक्रिया कई विवादों से घिरी हुई है और ऐसे विवाद लगातार उठ रहे हैं। उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से संदिग्ध नतीजों वाले चुनाव क्षेत्रों में गड़बड़ियों के सबूत जुटाने की अपील की है।
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यूएसडीपी ने पहले भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे और इस मामले में देश के निर्वाचन आयोग की भूमिका की आलोचना की थी। यूएसडीपी ने कोरोना महामारी के कारण चुनाव टालने का आग्रह भी किया था, जिसे निर्वाचन आयोग ने ठुकरा दिया था। अब यू थान हतेय का कहना है कि निर्वाचन आयोग ने उसकी बातों पर ध्यान न देकर विवादास्पद ढंग से चुनाव कराया, जिसके नतीजे संदिग्ध हैं।
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विपक्षी पार्टियों के गठबंधन नेशनल डेमोक्रेटिक फोर्स (एनडीएफ) ने भी कहा है कि वह इन नतीजों को स्वीकार नहीं करता। उसने कहा है कि उसके प्रचार अभियान में बाधा डाली गई और चुनाव में धोखाधड़ी हुई। एनडीएफ को मंगलवार रात तक घोषित नतीजों में एक भी सीट नहीं मिली थी। यूएसडीपी को 20 से कम सीटें मिली थीं। म्यांमार की संसद के निचले सदन में कुल 642 सीटें हैं। लेकिन इनमें एक चौथाई सेना के प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित हैं।

लेकिन यूएसडीपी और एनडीएफ के दावों के उलट म्यांमार के चुनाव पर नजर रखने वाले सबसे बड़े पर्यवेक्षक दल पीएसीए ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में कहा है कि उसे मतदान और मतगणना के दौरान किसी बड़ी गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली है। पीएसीए ने मतदान के दौरान सारे देश में अपने पर्यवेक्षक तैनात किए थे। पर्यवेक्षक दल ने कहा है कि उसने पारदर्शिता, समावेश और उत्तरदायित्व की कसौटियों पर चुनाव प्रक्रिया का परीक्षण किया। 

बहरहाल, इस सवाल पर कि क्या चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष रहे, पीएसीए के निदेशक सई ये क्याव स्वर मियेंत ने कहा कि यह राजनीतिक बहस का विषय है। यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने भी रविवार को हुए चुनावों की तारीफ की है। यूरोपीय संघ ने सभी पक्षों से अपील की है कि सुशसान और लोकतांत्रिक सुधारों के लिए वे आपस में रचनात्मक सहयोग करें।


बहरहाल, अब ये साफ है कि म्यांमार में राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी। म्यांमार के चुनाव पर पड़ोसी देशों की भी नजर थी। आंग सान सू की की पार्टी गुजरे वर्षों में चीन के ज्यादा करीब हो गई है। म्यांमार चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा है। चीन ने वहां बड़ा निवेश किया है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अब म्यांमार में चीन के प्रभाव में बढ़ोतरी जारी रहेगी।  

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