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म्यांमार में भूकंप से तबाही!: कितना जोखिम भरा है भारत के पड़ोस का क्षेत्र, झटकों का असर बैंकॉक तक क्यों? जानें

Fri, 28 Mar 2025 11:04 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 28 Mar 2025 11:04 PM IST
सार

म्यांमार में आखिर इतने तेज भूकंप आने की वजह क्या है? म्यांमार में इससे पहले घातक भूकंपों का क्या इतिहास रहा है? इसके अलावा इस बार म्यांमार की भूकंप से निपटने की तैयारी कैसी थी? आइये जानते हैं...

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Myanmar Earthquake Thailand Bangkok Hit Sagaing Fault Lines Tectonic Plate India Plate Eurasian Plate Fault li
म्यांमार में भूकंप के झटकों के बाद तबाही - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

म्यांमार के सगैंग क्षेत्र के मैंडले शहर के करीब आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भीषण तबाही मचाई है। सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें कई इमारतों को ध्वस्त होते देखा जा सकता है। इसके अलावा अब तक करीब 150 लोगों के मारे जाने की भी खबरें हैं। 
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इस बीच यह जानना अहम है कि म्यांमार में आखिर इतने तेज भूकंप आने की वजह क्या है? म्यांमार में इससे पहले घातक भूकंपों का क्या इतिहास रहा है? इसके अलावा इस बार म्यांमार की भूकंप से निपटने की तैयारी कैसी थी? आइये जानते हैं...
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1. म्यांमार में भूकंपों का खतरा कितना?
म्यांमार दो टेक्टॉनिक प्लेट्स के बीच में आता है। इसके चलते म्यांमार भूकंप के झटकों का सामना करने वाले सबसे सक्रिय क्षेत्रों में से है। हालांकि, सगैंग क्षेत्र में बड़े और घातक भूकंप बाकी इलाकों के मुकाबले कम आते हैं। 
  • यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन की प्रोफेसर और भूकंप विशेषज्ञ जोआना फौरे वॉकर के मुताबिक, इंडिया प्लेट और यूरेशियाई प्लेट की सीमा उत्तर से दक्षिण तक है और यह म्यांमार को बीच से काटती हुई गुजरती हैं। 
  • गौरतलब है कि इंडिया प्लेट धीरे-धीरे अपने ऊपर स्थित यूरेशियाई प्लेट के टक्कर मारते हुए पूर्वोत्तर की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रही है, जबकि यूरेशियाई प्लेट के आगे बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी है। 

  • विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों प्लेटें क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) दिशाओं में अलग-अलग गति से एक-दूसरे से रगड़ खा रही हैं। इसके चलते कुछ झटके पैदा होते हैं, जो कि आमतौर पर सुमात्रा जैसे क्षेत्र के भूकंप से कम ताकतवर होते हैं। 
  • लेकिन चूंकि यांगोन शहर, राजधानी न्यापिडाओ और मैंडले सैगिंग फॉल्ट लाइन पर या इनके करीब से निकलती हैं। इसलिए अगर इंडिया प्लेट और यूरेशियाई प्लेट में कोई भी गतिविधि होती है, तो इसका असर न्यापिडाओ पर भी पड़ता है। 
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म्यांमार में भूकंप के बाद तबाही का मंजर - फोटो : पीटीआई
2. म्यांमार में इस बार आए भूकंप ने इतनी तबाही क्यों मचाई?
सगैंग में बीते कुछ समय में भीषण भूकंप के झटके आए हैं। 2012 के आखिर में आए 6.8 तीव्रता के एक भूकंप ने जबरदस्त तबाही मचाई थी और इससे 26 लोगों की जान चली गई थी। हालांकि, शुक्रवार का भूकंप पिछले करीब 75 साल में म्यांमार के मुख्य क्षेत्र पर आने वाला सबसे बड़ा भूकंप हो सकता है। 

ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के ऑनररी रिसर्च फेलो रॉजर मुसोन के मुताबिक, कई बार भूकंप का असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसका केंद्र जमीन के कितना नीचे था। यह जमीन के जितना नीचे होता है, उतना ही भूमि के अंदर मौजूद पदार्थ शॉकवेव यानी झटकों के असर को सोख लेते हैं और प्रभाव कम कर देते हैं। 

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हालांकि, म्यांमार में भूकंप का केंद्र जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे था, जो कि गहराई के लिहाज से काफी कम है। इसलिए सगैंग में भूकंप काफी तेज महसूस हुआ और इसका असर पड़ोसी देश थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक तक में देखा गया, जहां इमारतें झटकों से पूरी तरह कांप गईं। मुसोन ने बताया कि भूकंप के झटके और इसकी लहरें हमेशा भूकंप के केंद्र पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि क्षेत्र किस प्लेट पर स्थित है इसका भी असर होता है। 

म्यांमार इस भूकंप के लिए कितना तैयार था?
यूएसजीएस के भूकंप जोखिम कार्यक्रम ने शुक्रवार को कहा कि म्यांमार में मौतों का आंकड़ा 10 हजार से 1 लाख तक हो सकता है। म्यांमार को आर्थिक तौर पर भी बड़ा नुकसान हो सकता है और उसकी 70 फीसदी जीडीपी प्रभावित हो सकती है। 

मुसोन ने कहा कि म्यांमार के सगैंग क्षेत्र में इस स्तर के तेज भूकंप की संभावना कम ही देखी गई है। इसलिए यहां तैयारियां कम ही रही होंगी। हालांकि, भूकंप का केंद्र इस क्षेत्र के मंडलै शहर से 17.2 किमी दूर ही रहा। यहां की आबादी करीब 15 लाख है।  जिसका मतलब है कि आसपास काफी इन्फ्रास्ट्रक्चर बना है। लेकिन आशंका है कि यहां ढांचों को भूकंप की संभावना को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया होगा। यानी नुकसान काफी ज्यादा हो सकता है। 
 

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म्यांमार में भूकंप के बाद तबाही का मंजर - फोटो : पीटीआई
उन्होंने कहा कि म्यांमार के पश्चिमी क्षेत्रों ने ज्यादा भूकंप देखे हैं, जबकि केंद्र में स्थित सगैंग में इस तरह का आखिरी भूकंप 1956 में आया था और अब उम्मीद कम ही है कि म्यांमार में इस तरह के झटकों को झेलने लायक इमारतें बनी होंगी। 

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