फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Mossad under fire after Hamas attack: why is it called the killing machine of terrorists

Mossad: हमास के हमले के बाद मोसाद चर्चा में क्यों? जानें इसे क्यों कहा जाता है आतंकियों की किलिंग मशीन

Sat, 28 Oct 2023 11:21 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sat, 28 Oct 2023 11:21 PM IST
विज्ञापन
सार
Mossad: मोसाद इस्राइल की खुफिया एजेंसी है। दिसंबर1949 में तत्कालीन इस्राइली प्रधानमंत्री डेविड बेन गूरियन की पहल पर सेना के खुफिया विभाग, आंतरिक सुरक्षा सेवा और विदेश विभाग के साथ तालमेल और आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए मोसाद की स्थापना की गई थी।
loader
Mossad under fire after Hamas attack: why is it called the killing machine of terrorists
मोसाद - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

इस्राइल में हमास के हमले के बाद सबसे अधिक चर्चा इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद की हो रही है। रक्षा विशेषज्ञों ने दावा किया है कि मोसाद इस हमले को भांपने में नाकाम रही। एजेंसी के पूर्व निदेशक एफ्रैंम हेलेवी ने कहा है कि सिस्टम को बहुत बड़ा झटका लगा है। 



मोसाद को इसबार जरूर हमले की भनक तक नहीं लगी, लेकिन यह एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही बड़े-बड़े आतंकी थर्रा जाते हैं। दुनिया के नक्शे पर एक छोटे से देश की खुफिया एजेंसी जिसके नाम से आतंकी संगठन ही नहीं, उनके आका और हुक्मरान भी खौफ खाते हैं। वैसे तो दुनिया में अमेरिका, ब्रिटेन, भारत और रूस से लेकर चीन तक कई देशों में कईं खुफिया एजेंसियां हैं, जो बेहद शक्तिशाली और ताकतवर वाली मानी जाती हैं। 




इनके गुप्तचरों की पहुंच पूरी दुनिया में होती है, लेकिन इनमें मोसाद का नाम बड़ी इज्जत के साथ लिया जाता है, क्योंकि यह एजेंसी अपने मुल्क के दुश्मनों के खिलाफ एक किलिंग मशीन की तरह काम करती है। आइए जानते हैं क्या है मोसाद, किस मुल्क से है नाता, कैसे करती है काम और जानिए इसके बड़े ऑपरेशन के बारे में  ... 

मोसाद
मोसाद - फोटो : SOCIAL MEDIA

इस्राइल की तीन खुफिया एजेंसियों में से एक 
मोसाद इस्राइल की खुफिया एजेंसी है। वैश्विक स्तर पर मोसाद को गुप्त ऑपरेशंस को अंजाम देने में दुनिया की टॉप खुफिया एजेंसी माना जाता है। मोसाद अपने दुश्मनों को उनके ही देश में घुसकर चुन-चुनकर मारने के लिए जानी जाती है। आमतौर पर ऐसे ऑपरेशन को अंजाम देना बेहद ही कठिन होता है, लेकिन मोसाद को ऐसे अभियानों में महारत हासिल है।

मोसाद अपना निशाना कभी नहीं चूकती है। क्योंकि अपना मिशन पूरा करने से पहले मोसाद के एजेंट अपने टारगेट को लेकर पूरी रिसर्च करते हैं। साथ ही मिशन को अंजाम देने के बाद की परिस्थितियों से निपटने का भी पूरा इंतजाम पहले से करके रखते हैं। 

जानकारी के अनुसार, इस्राइल के तीन बड़े खुफिया संगठन अमन, शिन बेट और मोसाद हैं। इनमें से एक मोसाद के भी दो काउंटर टेररिज्म यूनिट हैं। पहली यूनिट है मेटसाडा जो दुश्मन पर हमला करती है। जबकि दूसरी किडोन है। इसका काम गुप्त ही रखा गया है। लेकिन मोटे तौर पर यह आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। मेटसाडा की भी अपनी अलग यूनिट्स हैं। 

मोसाद
मोसाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
1949 में हुई थी मोसाद की स्थापना 
यहूदियों के देश इस्राइल में 13 दिसंबर, 1949 के दौरान वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड बेन गूरियन की पहल पर सेना के खुफिया विभाग, आंतरिक सुरक्षा सेवा और विदेश विभाग के साथ तालमेल और आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए मोसाद की स्थापना की गई थी।
 
इस्राइल सरकार ने मोसाद का गठन आतंकवाद से लड़ने के लिए किया था। बाद में 1951 में मोसाद को इस्राइल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कर दिया गया। इसकी रिपोर्टिंग भी प्रधानमंत्री को ही होती है। रियूवेन शिलोआ को मोसाद का पहला डायरेक्टर बनाया गया था। शिलोआ 1952 में रिटायर हुए थे। इसके बाद इसकी कमान इससर हरल के पास आ गई थी। हरल ने अपने 11 साल की कार्यावधि में इसे खूंखार और आतंकियों की किलिंग मशीन के रूप में तब्दील कर दिया। 

आज के दौर में मोसाद के पास टॉप क्लास सीक्रेट एजेंट, हाईटेक इंटेलीजेंस टीम, शार्प शूटर और कातिल हसीनाओं समेत कई तरह के जासूस और गुप्त योद्धाओं की फौज है। मोसाद के एजेंट्स इतनी सफाई से काम को अंजाम देते हैं कि कोई सबूत भी नहीं बचता। 

मोसाद (सांकेतिक तस्वीर)
मोसाद (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : istock
मोसाद के प्रमुख कार्य  
  • अपनी स्थापना के बाद से, मोसाद सरकार की जरूरतों के आधार पर खुफिया जानकारी जुटाने में शामिल रही है। 
  • यह काम विभिन्न माध्यमों से किया जाता है, जैसे ह्यूमन इंटेलीजेंस और सिग्नल इंटेलीजेंस आदि तरीकों से, जिसे दूसरा कोई समझ न सके।  
  • आज भी मोसाद ऐसे ही काम करती है। मोसाद ने अन्य देशों की खुफिया सेवाओं के साथ खुफिया संबंध भी विकसित और बनाए रखा है।
  • मोसाद उन देशों के साथ गुप्त संबंध स्थापित करने में भी शामिल है जो खुले तौर पर साथ इस्राइल का साथ देने से बचते हैं। 
  • शुरुआती दौर में मोसाद ने यहूदियों को अशांत देशों से छुड़ाने और उन्हें इस्राइल लाने का काम किया। 
  • जैसे इथियोपिया के यहूदियों को इस्राइल लाने के लिए मिवत्जा मोशे यानी ऑपरेशन मूसा था।
  • सामान्य तौर पर मोसाद विदेशों में यहूदी और इस्राइली लोगों पर लक्षित आतंकी घटनाओं के खिलाफ युद्ध में महारत हासिल है।
  • वर्षों से, मोसाद ने उन देशों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो गैर-पारंपरिक हथियार प्राप्त कर इस्राइल के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। 

मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट
मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट - फोटो : SOCIAL MEDIA
मोसाद के बड़े ऑपरेशन 
2020 ईरानी परमाणु वैज्ञानिक का खात्मा! :
नवंबर 2020 में ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम शीर्ष वैज्ञानिक ब्रिगेडियर जनरल मोहसिन फखरीजादेह की हत्या कर दी गई है। हालांकि, मोसाद ने तब इसकी जिम्मेदारी खुले तौर पर नहीं ली, लेकिन जून 2021 में मोसाद के मुखिया ने इसे लेकर अहम खुलासे किए थे। 

1976 का ऑपरेशन थंडरबोल्ट : अरब के आतंकियों द्वारा हाइजैक फ्रांसीसी विमान को मोसाद अपने 94 नागरिकों के साथ युगांडा से मुक्त कराकर लाई थी। यह ऑपरेशन काफी चर्चित रहा था।  

1972 रैथ ऑफ गॉड (Wrath of God) : 1972 में म्यूनिख ओलिंपिक के लिए एकत्र इस्राइली ओलिंपिक टीम के 11 खिलाड़ियों की बंधक बनाकर हत्या का बदला फलस्तीनी आतंकियों से लिया। यह ऑपरेशन करीब 20 सालों तक चला और मोसाद ने सभी आतंकियों से चुन-चुनकर बदला लिया।

1964 में रूसी मिग-29 को इस्राइल लाना : उस दौर में सोवियत संघ रूस का मिग-29 सबसे उन्नत लड़ाकू विमान माना जाता था। इसे पाने में जब अमेरिका की सीआईए भी विफल रही तो फिर मोसाद की महिला एजेंट ने 1964 में इसे कर दिखाया। हालांकि, 1962 में इसी मिशन पर एक मोसाद एजेंट पकड़ा गया था, जिसे फांसी दे दी गई थी। 

1960 अर्जेंटीना में सीक्रेट मिशन : मोसाद ने अर्जेंटीना में 1960 में एक सीक्रेट मिशन को अंजाम देते हुए नाजी युद्ध के अपराधी एडोल्फ एकमैन को गुपचुप तरीके से अपहरण करके इस्राइल ले आई। बाद में मुकदमा चलाकर उसे सजा दी गई। इस मिशन को पांच एजेंट्स ने पूरा किया था। 
  • मोसाद ने अमेरिका के लिए ईरान में घुस कर अलकायदा के नंबर दो आतंकी अल मसरी को मार गिराया। फिर ईरान में घुस कर आतंकी अबु मोहम्मद का भी खात्मा किया।  
  • फलस्तीनी नेता यासिर अराफात के राइट हैंड खलील अल वजीर उर्फ अबू जिहाद को ट्यूनिशिया में टूरिस्ट बनकर गए मोसाद के एजेंट ने परिवार के सामने ही 70 गोलियां मारी थीं। 
  • अपने ही देश के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी लीक करने वाले बागी वैज्ञानिक वनुनु को पकड़ने के लिए मोसाद ने अपनी कातिल जांबाज हसीनाओं का इस्तेमाल किया और उसे प्रेम जाल में फंसाकर वापस इस्राइल ले आई। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed