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कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर में एक अरब से अधिक लोग हो सकते हैं गरीब

Sat, 13 Jun 2020 05:52 AM IST
श्रीधर मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Sat, 13 Jun 2020 05:52 AM IST
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More than one billion people worldwide could be poor due to corona epidemic
फाइल फोटो - फोटो : PTI

कोरोना महामारी के चलते वैश्विक गरीबी के दायरे में एक अरब से अधिक लोग आ सकते हैं। वहीं, 39.5 करोड़ अत्यधिक गरीबों में से आधे दक्षिण एशिया से होंगे। लंदन के किंग्स कॉलेज और ऑस्ट्रेलियाई नेशनल यूनिवर्सिटी की तरफ से किए अध्ययन से पता चला है कि मध्यम आय वाले विकासशील देशों में गरीबी स्तर तेजी से बढ़ा है। इस वजह से वैश्विक गरीबी में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसका बड़ा हिस्सा दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के विकासशील देशों में होगा। इन देशों में गरीबी रेखा से बिल्कुल ऊपर लाखों लोग रहते हैं। बांग्लादेश, भारत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों का इसमें जिक्र किया गया है जहां गरीबी का खतरा अधिक हो सकता है।

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संयुक्त राष्ट्र यूनिवर्सिटी वर्ल्ड इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स रिसर्च (यूएनयू-डब्ल्यूआईडीईआर) की तरफ से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर के गरीबों की प्रतिदिन की आय 50 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इसके मुताबिक, 1.90 डॉलर (144 रुपये) रोज कमाने वाले गरीबों की संख्या एक अरब से अधिक हो सकती है। शोधकर्ताओं ने विश्व बैंक की सभी गरीबी रेखाओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न परिदृश्यों में सबसे गरीब तबके पर कोरोना महामारी के असर का अनुमान लगाया है। इसमें प्रतिदिन 1.90 डॉलर से 5.50 डॉलर कमाने वालों को गरीबी रेखा के नीचे माना गया है। सबसे बुरी स्थिति में प्रति व्यक्ति आय में 20 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है और 1.12 अरब लोग अत्यंत गरीबी की रेखा से नीचे जा सकते हैं। शोधकर्ताओं ने वैश्विक नेताओं से इस बारे में तत्काल कदम उठाने की अपील की है।
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गरीबी रेखा से नीचे जा सकती है दुनिया की आधी आबादी

प्रति व्यक्ति आय में 20 प्रतिशत कमी पर 5.5 डॉलर की गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या 3.7 अरब हो जाएगी जो दुनिया की कुल आबादी के आधे से अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया के लोगों के अत्यंत गरीबी में जाने की सबसे अधिक आशंका है, जिसमें भारत एक बड़ा कारक साबित होगा। इसके बाद सब सहारा अफ्रीका में सबसे अधिक लोगों को अत्यंत गरीबी में जाने की संभावना है।
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सरकारों ने कुछ नहीं किया तो गरीबी खत्म करना कल्पना

रिपोर्ट के लेखकों में शामिल एंडी समनर ने कहा कि यदि सरकारें जल्द ही कुछ और नहीं करतीं और गरीबों की आय में होने वाली कमी की भरपाई के लिए कुछ नहीं करतीं तो दुनिया के सबसे अधिक गरीबों का भविष्य अंधकार में है। उन्होंने आगे कहा कि गरीबी घटाने के लक्ष्य 20-30 साल पीछे चले जाएंगे और गरीबी खत्म करने का संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य कल्पना बनकर रह जाएगा।


इस शोध पर यूएनयू-डब्ल्यूआईडीईआर के निदेशक प्रो. कुणाल सेन ने कहा,  "दुनिया में गरीबी के स्तर और दुनिया के गरीबों के लिए कोरोना-19 की मार के बारे में नए अनुमान बहुत डरावने हैं। हम लोगों की कड़ी मेहनत और कोशिशों को ऐसे बर्बाद होते नहीं देख सकते। हमें पता है कि इस वक्त इसका क्या असर हो रहा है, लेकिन 2030 तक सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जरूरत है।"

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