इंसानों के पहुंचने से पहले ही मंगल ग्रह पर पैदा हुआ 'जल संकट', भाप बनकर उड़ रहा पानी
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दुनियाभर के वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाएं तलाशने में जुटे हुए हैं। इसके पीछे का प्रमुख कारण लाल ग्रह पर मौजूद पानी बताया जा रहा है। नासा ने इसके लिए जुलाई में खास रोवर भेजने की भी तैयारी कर ली है।
मगर इस बीच एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि धरती की तरह मंगल ग्रह पर पानी अनुमान से ज्यादा तेजी से घट रहा है। अध्ययन में दावा किया गया है कि मंगल पर मौजूद समुद्र, नदियां और झीलें तमाम पिछले अनुमानों से ज्यादा तेजी से सिकुड़ने लगी हैं।
फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (सीएनआरएस) के शोधकर्ताओं के मुताबिक लाल ग्रह के ऊपरी वातावरण से पानी धीरे-धीरे लुप्त हो रहा है। इस ग्रह पर पानी पूर्व के सभी अनुमानों के मुकाबले बहुत तेजी से घट रहा है। 'एग्जोमार्स मिशन' के डाटा का इस्तेमाल यह शोध किया गया है।
माना जा रहा है कि मंगल ग्रह पर मौजूद अधिकतर पानी जमी हुई झीलों में मौजूद है। शोध के मुताबिक सूरज की रोशनी पानी के अणुओं को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग-अलग तोड़ रही है, जिससे पानी भाप बनकर उड़ रहा है। शोध में सामने आया है कि मंगल ग्रह के वातावरण से करीब 80 किलोमीटर की ऊंचाई पर जलवाष्प बड़ी मात्रा में और अप्रत्याशित अनुपात में जमा हो रहा है। यह अध्ययन ‘साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
दो साल पहले मिली बर्फीली झील
साल 2018 में नासा के क्यूरोसिटी रोवर ने दक्षिणी ध्रुवीय बर्फीले इलाके में 20 किलोमीटर में फैली एक झील की तलाश की थी। यह झील बर्फीली सतह से एक किलोमीटर नीचे थी।
इस वजह से जिंदगी की उम्मीद जगी
मंगल का वायुमंडल काफी कमजोर है, लेकिन फिर भी कई मिशनों से वैज्ञानिकों को इस ग्रह पर जिंदगी की उम्मीद जगी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती के कुछ ऐसे बैक्टीरिया यहां जिंदा रह सकते हैं। ऐसे कुछ बैक्टीरिया की लिस्ट बनाने की कोशिश हो रही है, जो मंगल के बेहद ठंडे माहौल और जानलेवा विकिरण में भी बच जाएं।
मार्स 2020 रोवर मिशन जुलाई में
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा जुलाई 2020 में मार्स रोवर मिशन को मंगल पर भेजने की तैयारी में है। इसके मुताबिक एक टन वजनी यह रोवर लाल ग्रह पर एक छोटी प्रयोगशाला के रूप में काम करेगा। यह वहां की मिट्टी और चट्टानों के नमूनों से जीवन से जुड़ी जानकारी हासिल करने का काम करेगा। इस रोवर को भेजने का मुख्य मकसद मंगल पर जीवन के साक्ष्यों का पता लगाना है।