फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Marginalised communities holding some of highest constitutional offices in India: CJI

UK: 'आज भारत में कुछ सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर हैं वंचित समुदायों के लोग...', CJI गवई ने की संविधान की तारीफ

Fri, 06 Jun 2025 08:23 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 06 Jun 2025 08:23 PM IST
सार

UK: सीजेआई बी.आर. गवई ने कहा कि आज वंचित वर्ग के लोग देश के सर्वोच्च सांविधानिक पदों पर हैं, जो डॉ. आंबेडकर के सपनों की सच्ची तस्वीर है। उन्होंने ग्रेज इन में संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर भाषण देते हुए इसे अपने लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि वह खुद भी उसी समुदाय से आते हैं।

विज्ञापन
Marginalised communities holding some of highest constitutional offices in India: CJI
सीजेआई बी.आर. गवई - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

चीफ जस्टिस (सीजेआई) बी.आर.गवई ने कहा कि आज भारत में वंचित समुदायों के प्रतिनिधि देश के कुछ सर्वोच्च सांविधानिक पदों पर  हैं, जो डॉ. बी. आर. आंबेडकर के समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के सपने की सच्ची तस्वीर है। सीजेआई ने गुरुवार शाम लंदन के ऐतिहासिक 'ग्रेज इन' में भारतीय संविधान के 75 वर्षों के उपलक्ष्य में एक विशेष व्याख्यान दिया। यहीं पर डॉ. आंबेडकर ने करीब 100 साल पहले इंग्लैंड में बैरिस्टर की डिग्री ली थी। इस मौके पर उन्होंने डॉ. आंबेडकर की विरासत को याद किया और कहा कि वह न केवल संविधान के मुख्य शिल्पकार थे, बल्कि सामाजिक न्याय के महान सुधारक भी थे।

विज्ञापन


गवई ने कहा कि यह उनके लिए एक भावुक क्षण है, क्योंकि वह भी उसी दलित समाज से आते हैं, जिससे डॉ. आंबेडकर का ताल्लुक था। उन्होंने कहा कि आज देश में कई महत्वपूर्ण सांविधानिक पदों पर वंचित समुदायों के लोग बैठे हैं, जो बाबा साहब के सपनों को साकार करने की दिशा में बड़ी बात है। उन्होंने कहा, इस ऐतिहासिक संस्था में खड़े होकर मुझे डॉ. आंबेडकर की वह स्थायी विरासत याद आ रही है, जो उन्होंने न सिर्फ कानून के क्षेत्र में, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की नींव में छोड़ी है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: धोखाधड़ी मामले में बिहार के बैंक अधिकारियों के खिलाफ फिर चलेगा मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट का आदेश
विज्ञापन
विज्ञापन


गवई ने कहा, मैं 1960 में पैदा हुआ, जब डॉ. आंबेडकर हमें छोड़ चुके थे। लेकिन मैं भारत का नागरिक बनकर पैदा हुआ, न कि एक अछूत बनकर। बचपन से ही घर में उनके साहस, बुद्धिमत्ता और बराबरी की लड़ाई की कहानियां सुनता आया हूं। ये बातें मेरे विचार और (जीवन के) उद्देश्य का हिस्सा बन गईं। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर का सपना था कि समाज में हर नागरिक को संविधान से पूरी सुरक्षा और अधिकार मिले। यह सपना आज न्यायपालिका, विधायिका और सरकार के कार्यों के जरिए धीरे-धीरे साकार हो रहा है।

उन्होंने कहा, यह गर्व की बात है कि देश ने पिछले 75 वर्षों में दो महिला राष्ट्रपतियों को देखा है और अब हमारे पास एक महिला राष्ट्रपति (द्रौपदी मुर्मू) हैं, जो समाज के सबसे वंचित तबके (जनजातीय समुदाय) का प्रतिनिधित्व करती हैं। और मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (खुद गवई) भी वंचित वर्ग और साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed