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जर्मनी: महंगाई से लगातार गिर रहा जीवन स्तर, बड़ी मुसीबत में फंसा मध्यम वर्ग

Sun, 16 Oct 2022 03:14 PM IST
कुमार सम्भव जैन डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बर्लिन
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बर्लिन Published by: कुमार सम्भव जैन Updated Sun, 16 Oct 2022 03:14 PM IST
सार

डीडब्लू की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मन सरकार के टैक्स राजस्व में सबसे बड़ा योगदान मध्य वर्ग के लोगों का ही रहा है। इसके अलावा इस वर्ग के लोग पढ़े-लिखे होते हैं और लोकतंत्र में यकीन करते हैं।

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Living standard fall due to inflation middle class stuck in big trouble in Germany
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जर्मनी का मध्यम वर्ग इस वक्त जिस तरह की मुश्किलों से गुजर रहा है, वैसे हालात दूसरे विश्व युद्ध के बाद कभी देखने को नहीं मिले। जर्मनी में मध्यम वर्ग गुजरे दशकों में आराम की जिंदगी बिता रहा था। साथ ही, उसे जर्मन समाज का प्रमुख स्तंभ बताया जाता था। उसकी उपभोग की क्षमता जर्मन अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार थी। हालांकि, कोरोना महामारी और यूक्रेन युद्ध के कारण बने हालात में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है, जो मध्यम वर्ग से फिसलकर नीचे जा रहे हैं। इससे इस सामाजिक समूह में भय का माहौल है। 

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गरीबी पर अनुसंधान करने वाले रिसर्चर क्रिस्टोफ बटरवेगे के मुताबिक जर्मनी में गरीबी सिर्फ कुछ वंचित तबकों की समस्या थी। अब इसका भय मध्यमवर्गीय लोगों को भी डरा रहा है। थिंक टैंक सोसायटी फॉर कंज्यूमर रिसर्च की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जर्मन में आम मध्यमवर्गीय लोगों को भविष्य में अपनी आमदनी घट जाने की चिंता सता रही है।
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जर्मनी के सरकारी मीडिया संस्थान डीडब्लू की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट जर्मन मध्यम वर्ग के आकार की जानकारी दी गई है। थिंक टैंक इंस्टीट्यूट ऑफ द जर्मन इकॉनमी के आंकड़ों के आधार पर बताया गया है कि जर्मनी में प्रति व्यक्ति 1,700 से 3,100 यूरो प्रति महीने आय वर्ग में आने वाले व्यक्ति मध्यमवर्गीय माने जाते हैँ। पति-पत्नी और दो संतानों वाले परिवार के लिए यह आय सीमा 3,540 से 6,640 यूरो तक है।
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डीडब्लू की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मन सरकार के टैक्स राजस्व में सबसे बड़ा योगदान मध्य वर्ग के लोगों का ही रहा है। इसके अलावा इस वर्ग के लोग पढ़े-लिखे होते हैं और लोकतंत्र में यकीन करते हैं। ऐसे में उन्हें सामाजिक स्थिरता का स्रोत समझा जाता है। डीडब्लू ने कहा है कि धनी देशों के संगठन आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के सदस्य देशों के बीच जर्मनी का मध्यम वर्ग सबसे बड़ा है।
 
अब इस वर्ग के लोग ऊर्जा की बढ़ती लागत और आम तौर पर बढ़ रही महंगाई का सामना करने में खुद को अक्षम पाने लगे हैं। डीडब्लू से बातचीत में नगरपालिका के एक अधिकारी ने कहा कि यूटीलिटी कंपनियों के हमारे सहकर्मी हमें फोन कर आग्रह करने लगे हैं कि उन्हें सामाजिक संकट का सामना करने की ट्रेनिंग दी जाए। कर्मचारियों को ऐसे लोगों के साथ संवाद करना पड़ रहा है, जो निराश हैं और डरे हुए हैं। 


समाजशास्त्रियों की राय है कि मध्यम वर्ग के संकट की शुरुआत काफी पहले हो गई थी। 1995 से 2018 के बीच जर्मनी की आबादी में मध्यम वर्ग का हिस्सा गिरकर 74 से 67 प्रतिशत पर आ गया। इनमें से ज्यादातर गिरावट 2005 के पहले आई थी। उसके बाद मोटे तौर पर स्थिरता का दौर रहा, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिमेन में सोशल रिसर्च सेंटर से जुड़े शोधकर्ता पैट्रिस सेशवेह ने डीडब्लू से कहा, ‘मध्य  वर्ग की हमेशा ही ऐसी स्थिति रही है, जिसमें वे लोग शामिल होने का सपना देखते हैं, जो अभी इसका हिस्सा नहीं हैं। अब ऐसा लगता है कि इस वर्ग का अच्छा दौर गुजर चुका है।’ 

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