एक्सक्लूसिव: इस तरह करें अमेरिका-ईरान के संघर्ष से जुड़ी झूठी तस्वीरों की पहचान
- कही आप भी तो नहीं देख रहें, यूएस-ईरान संघर्ष से जुड़ी झूठी तस्वीरें
- ऐसे जाने कौन सी तस्वीर है असली,कैसे प्रयोग करें रिवर्स इमेज सर्च
- अपने फोन से करें फैक्ट चेक
- तस्वीर का सत्यापन कैसे करें
- वीडियो का सत्यापन कैसे करें
- तस्वीर और वीडियो ही खोलते है अपने राज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए तनाव के बाद पूरी दुनिया में इससे जुड़ी फर्जी तस्वीरें और पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे थे। सभी का एक ही दावा था कि इससे हमलावर अमेरिका है और शिकार ईरान। जब भी इस तरह की घटनाएं होती है तो फर्जी खबरों की भी बाढ़ आ जाती है। ऐसी खबरों, तस्वीरों और वीडियो की वजह से लोग प्रभावित भी हो जाते हैं। इसकी पहचान करने का एक आसान तरीका हम आपको बता रहे हैं।
फोन पर रिवर्स इमेज सर्च का उपयोग
खबरों, तस्वीरों और वीडियो की पुष्टि के लिए आप जिन तरीकों का उपयोग करते हैं, उसमें कुछ सवाल पूछने से लेकर फोन पर ही रिवर्स इमेज सर्च का उपयोग भी शामिल है।
- सुलेमानी पर जानलेवा हमले के बाद सोशल मीडिया पर 'एक मिनट पैंतालीस सेकंड' का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें यह दावा किया गया कि यह वीडियो जनरल सुलेमानी पर ड्रोन हमले का है। इसके साथ ही इस तरह की बहुत सारी पोस्ट जमकर वायरल हो रही हैं।
- एयर स्ट्राइक के नाम पर देश का एक बड़ा प्रतिष्ठित चैनल वीडियो गेम की तस्वीरें दिखा देता है।
- अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर पुराने बैनर और कोट्स वायरल हो रहे हैं।
- ट्विटर पर कुछ पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि यह ईरानी मिसाइल आक्रमण के हैं।
खुद से करें सवाल
- जब भी कोई तस्वीर वायरल होकर सामने आती है तो सबसे पहले कुछ साधारण से सवाल खुद से कीजिए।
- सोशल मीडिया पर ये तस्वीर और वीडियो कब वायरल हुआ?
- किसके द्वारा भेजा गया?
- यह तस्वीर कब की है, और कहा पर ली गई है?
- तस्वीर किसके द्वारा ली गई है?
- तस्वीर को करीब से देखने पर क्या खास बातें दिखाई देती है?
तस्वीर का सत्यापन कैसे करें?
- गूगल रिवर्स इमेज रिसर्च टूल का प्रयोग करें।
- जिस तस्वीर की सत्यता को जानना है उसका प्रयोग करके सर्च करें।
- इस सर्च को दो तरह से किया जा सकता है।
- पहला, सर्च करने के लिए इमेज फाइलों का उपयोग करें और लिंक्स को ध्यान से पढ़ें।
- दूसरा, सर्च करने के लिए ऑनलाइन से इमेज यूआरएल का उपयोग करें, या फिर सीधे ही तस्वीर को क्रॉप करके उस तस्वीर को अपलोड करें।
- तस्वीर को सर्च करने पर बहुत सारे लिंक्स खुल जाएंगे, उनको एक-एक करके देखें।
- प्रामाणिक वेबसाइट्स को ही आधार बनाएं।
इन बातों को देखें:
- कब प्रकाशित हुआ।
- किस साइट पर प्रकाशित हुआ।
- किसके द्वारा लिखा गया, उसका लेखक कौन हैं?
- न्यूज टोन क्या है, क्या अत्यधिक सकारात्मक है या फिर नकारात्मक।
- तुलनात्मक अध्ययन जरूर करें ( क्या किसी अन्य साइट पर भी उपलब्ध है और उसमे किस तरह की सूचना का प्रयोग किया गया है )।
जब भी कोई वायरल पोस्ट देखें तो सबसे पहले आप प्रतिक्रियाएं देखें। अगर वो नाटकीय या विवादित लगती हैं, तो उन्हें जांचने की जरूरत है। ऐसे में सबसे पहले उस बात या विषय को खोजने की जरूरत है, चाहें उसके लिए आप सर्च इंजन(गूगल) का सहारा लें या फिर सोशल मीडिया का। इसके साथ ही किसी शख्स की रिपोर्टिंग का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं अगर आपके सूत्र ऐसे हैं, जिनके बारे में अधिक नहीं जानते हैं तो भी आपको सावधान रहने की जरूरत है। वहीं बात अगर भारत के संदर्भ में करें तो, कई ऐसे फैक्ट चेक ग्रुप हैं, जो काफी तेजी के साथ ही साथ सही काम भी करते हैं। आप उनको बुकमार्क या फॉलो कर सकते हैं। वहीं आपको उन सोर्स से भी सावधान रहने की जरूरत है, जो किसी खास एजेंडा के लिए काम करते हैं। अच्छे फैक्ट चेकर्स की खासियत होती है कि उनकी पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होती है और सबूत के साथ होती है। -इवान स्वीनी ,इंटरनेशनल फैक्ट चेकर और फेसबुक ट्रेनर
वीडियो की सत्यापन कैसे करें
- सबसे पहले इनविड टूल डाउनलोड करें।
- फिर वीडियो से एक तस्वीर लें उसको रिवर्स इमेज सर्च करें।
फर्जी खबरों का सबसे विचलित करने वाला हिस्सा यह है कि यह लोकतंत्र और इसके संसाधनों पर अविश्वास करती है और हिंसा, घृणा फैलाने का काम करती है। भारत में, सोशल मीडिया द्वारा प्रसारित फेक न्यूज नफरत फैलाने वाले भाषणों और गलत सूचनाओं का एक प्रमुख चैनल बन गया है। यह अभूतपूर्व समस्या और चुनौती पैदा कर रहा है। -सय्यद नजाकत, फाउंडर एंड एडिटर- इन- चीफ, डाटालीडस्
ऑनलाइन फैक्ट चेकिंग सीखना आज के दौर में बहुत जरूरी है और सभी पत्रकारों और न्यूज रूम के लिए एक नितांत आवश्यक कदम है। यह किसी भी कहानी के संपादन के लिए आधारभूत आवश्यकता है, किसी भी स्टोरी में "फाइव डब्लू और वन एच जानने के लिए बुनियादी जरूरत और आवश्यकता है।
सुरभि मलिक, डायरेक्टर, गूगल न्यूज इनिशिएटिव, इंटरन्यूज
वीडियो वेरिफिकेशन करने का अच्छा तरीका
- रिवर्स इमेज सर्च टूल का इस्तेमाल।
- स्मार्ट की-वर्ड का चयन।
- मजबूत अवलोकन क्षमता के द्वारा।
- सबसे महत्वपूर्ण पुराने समय का पत्रकारिता कौशल (ओल्ड स्कूल जर्नलिज्म )
इनफार्मेशन बहुत प्रकार की होती हैं, और इसमें से सही खबर को पहचनना बहुत जरूरी हैं| जब कोई ऐसी खबर आती है जो घृणा पैदा करती है उसको शेयर या फॉरवर्ड करते समय थोड़ा रुकना चाहिए, सोचना चाहिए और जानना चाहिए इसका मकसद क्या हैं ? और इसका असर क्या हो सकता है | थोड़ा वक्त निकालकर उसको अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी देखिये गूगल पर भी समझिए। - प्रतीक सिन्हा, ऑल्ट न्यूज फाउंडर
यूट्यूब डेटा व्यूअर: केवल यूट्यूब पर डाले गए वीडियो पर ही काम करता है
यूट्यूब डेटा व्यूअर
- यूट्यूब पर जो भी वीडियो डाले गए होते है उन वीडियो से डेटा निकालता है।
- यह इमेज थंबनेल निकालता है जिससे रिवर्स इमेज सर्च के माध्यम से वीडियो के विभिन्न संस्करणों को खोजने में सहायता मिलती है।
- वीडियो अपलोड का समय बताता है।
- मगर यह तब उपयोगी होता है जब यूट्यूब पर एक ही वीडियो की बहुत सारी कॉपियां उपलब्ध होती हैं।
- यूट्यूब डेटा व्यूअर का नुकसान: यह केवल यूट्यूब पर डाले गए वीडियो पर ही काम करता है।
वाच फ्रेम बाय फ्रेम टूल
- इस टूल में आप एक एक फ्रेम करके तथ्य को तलाश सकते है।
- और उसमें जम्प, जर्क और कट्स को पहचान सकते हैं।
सबसे बड़ी चुनौती पत्रकारों के आगे हैं, और इस बात को गंभीरता से समझना होगा, उनकी जानकारी का प्राइमरी सोर्स सोशल मीडिया बनता जा रहा हैं, जिसकी वजह से फेक न्यूज खबरों में शामिल होने लगी है, दूसरी बड़ी समस्या डिजिटल लिटरसी की है जिसकी वजह से न्यूज़ के आगे चुनौती फेक न्यूज़ और प्रामाणिक खबरें है। अमेरिका और इराक को लेकर देश के एक बड़े चैनल ने वीडियो गेम की फुटेज को दिखा दिया, ये बहुत बड़ी बात है। -अखिल रंजन, फैक्ट चेकर, एएएफपी एजेंसी,फ्रांस
आपके मोबाइल फोन से टिनआई (TinEye) की मदद से कर सकते है जांच-पड़ताल
- तस्वीर को सुरक्षित करें या फिर डाउनलोड करें।
- इसके अलावा तस्वीर का वेब एड्रेस कॉपी कर सकते है।
- नेविगेट का सकते है images.google.com
- उसके बाद ब्राउजर मेनू में जाकर स्क्रॉल डाउन करके गूगल क्रोम में सेलेक्ट करे "रिक्वेस्ट डेस्कटॉप साइट"
- मेनू स्क्रीन के शीर्ष दाईं ओर तीन बिंदुओं पर दबाकर पाया जाता है। IOSSafari में, यह स्क्रीन के निचले भाग में केंद्र में मौजूद होती है।
- सर्च बार में कैमरा आइकन दबाएं।
- अब आपके पास दो विकल्प हैं: उस फ़ोटो का यूआरएल पेस्ट करें जिसे आप सर्च बार में चेक करना चाहते हैं। वैकल्पिक रूप से, उस छवि को अपलोड करने के लिए "एक छवि अपलोड करें" टैब चुनें जहां से आपने इसे अपने फोन पर सहेजा है।
- छवि का उपयोग कब और कहां किया गया, इसके परिणामों की जांच करें।
- यह मूल रूप से कहां इस्तेमाल किया गया था और संभवतः चित्र के कॉपीराइट किसका हैं।
क्या हैं टिनआई टूल?
- टिनआई (TinEye) एक बेहतरीन फ्री टूल है और गूगल रिवर्स सर्च इमेज की तरह ही काम करता है।
- यह आपको "सबसे पुराना" परिणामों को फिलटर करने और उस छवि के पिछले संस्करणों को देखने की अनुमति देता है जिसे आप खोज रहे हैं।
- यह फीचर तब मददगार हो सकता है जब आप यह साबित करना चाहते हैं कि फोटो आज की नहीं है।
- तस्वीर को सुरक्षित करें या फिर डाउनलोड करें
- इसके अलावा तस्वीर का वेब एड्रेस कॉपी कर सकते हैं
- अपने मोबाइल फोन पर नेविगेट का सकते है www.tineye.com
- "तस्वीर अपलोड करें" उसको चुनें और अपने फोन के दस्तावेजों या चित्र गैलरी में तस्वीर को खोजें।
- या तस्वीर के यूआरएल को टिनआई (TinEye) सर्च बार में पेस्ट करें।
- लौटाई गई छवियों में से एक का चयन करें और फिर 'आपकी तस्वीर' और 'तस्वीर मिलान' के बीच स्विच या टॉगल करें। फिर आप परिणाम देखेंगे।
- 'सबसे पुराना' फिलटर करना न भूलें।
कानून की नजर में हर शख्स निर्दोष है, जब तक की उसका गुनाह साबित नहीं हो जाता है। लेकिन जानकारी के मामले में जानकारी के हर शब्द पर संदेह बना रहता है। ऐसे में कानून का सिद्धांत और फेक न्यूज एक दूसरे के विपरीत हैं। - प्रोफेसर उमेश आर्या, डायरेक्टर, फैकल्टी ऑफ मीडिया स्टडीज, गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी
इनविड टूल की उपयोगी विशेषताएं
- यह टूल तस्वीरों और वीडियो दोनों के लिए सत्यापन करने के लिए कारगर है।
- उच्च श्रेणी के वीडियो के सत्यापन टूल्स की तरह काम करता है।
- यह एक वेब-आधारित एप्लीकेशन है।
- इनविड टूल कीफ्रेम निकालता है जिसके माध्यम से इसको रिवर्स इमेज सर्च किया जा सकता है।
- इनविड के मैग्निफाइंग टूल का उपयोग करके जूम किया जा सकता है, और गहराई से चीजों की जांच पड़ताल की जा सकती है।
- यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर वीडियो का सत्यापन किया जा सकता है।
- इससे प्रासंगिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
- जैसे कि वीडियो का स्थान
- कमेंट्स की जानकारी
- लाइसेंस अधिकार के विषय में
- की-फ्रेम और यूट्यूब के थंबनेल का पता लगाता है।
- वीडियो से स्टिल फ्रेम्स (तस्वीरें) भी निकालता है।
- अंग्रेजी भाषा के अलावा अन्य भाषा के सर्च इंजन जैसे कि यांडेक्स और बायडू का उपयोग करके रिवर्स इमेज सर्च भी करता है।
- इसका मैग्निफायर, ट्विटर एडवांस्ड सर्च इमेज सत्यापन में बहुत सहायक होता है।
तस्वीर या वीडियो में यह संकेत बताते है सच
इमारत: टोपोग्राफी (भौगोलिक स्थिति): सैटेलाइट मैप्स या गूगल अर्थ का उपयोग किया जा सकता है।
चिह्न: झण्डे, लोगो, बैज आदि के द्वारा किसी भी क्षेत्र की पहचान करने में सहायता करते हैं। इनसे पता चल सकता है कि तस्वीर या वीडियो कहा से संबंधित है।
नंबर प्लेट: वाहन रेजिस्ट्रेशन प्लेटें भौगोलिक स्थान की तुरंत पहचान करने में बहुत मदद कर सकती हैं। नंबर प्लेट के द्वारा उस स्थान का पता लगाया जा सकता है।
मौसम: तस्वीर में दिखाई दे रहे मौसम पर जरूर ध्यान देना चाहिए।
कमेंट्स: इस बात की संभावनाएं बहुत होती हैं कि सोशल मीडिया पर कोई ना कोई ऐसा व्यक्ति जरूर होगा जो आपको असली तस्वीर तक पहुंचा सकता है।
वस्त्रों के माध्यम से: वस्त्रों के माध्यम से संस्कृति और भौगोलिक स्थान की पहचान की जा सकती है।
साइन बोर्ड: साइन पोस्ट, बैनरों और बिलबोर्डों पर लिखा टेक्स्ट भी हमारी मदद कर सकता है। इनसे जगह के बारें में जानकारी मिल सकती है।
फेक न्यूज के रूप में एक ऐसी बुराई पत्रकारिता में आ चुकी है जिसने इस पेशे के साथ साथ समाज को भी खोखला कर दिया है। लोग फेक न्यूज़ के आधार पर गलत धरना बना रहे है और एक दूसरे के प्रति नफरत पाल रहे है बहुत जरूरी है कि हम सब मिलकर इस बुराई को मिटाने की कोशिश करें और पत्रकारिता को मजबूत करें फेक न्यूज पत्रकारिता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। -
अर्चना कुमारी, गूगल फैक्ट चेकर और असिस्टेंट प्रोफेसर, पत्रकारिता विभाग ,सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू
Bibliography and References.
*Fact Check By Google Ceritified Fact Checker ( Rama Solanki )
*Primary Data Base: Expert Reaction and Tictak
*Questionnaire ( With Google Fact- Checkers and Experts)
*GUIDE: How to verify images on your smartphone
https://africacheck.org/factsheets/guide-verify-images-smartphone/
Note: Part of this report was written by Raymond Joseph for Africa Check, a non-partisan fact-checking organization.
References
*Fake news spreads online after Soleimani killing
https://observers.france24.com/en/20200106-fake-news-spreads-online-after-soleimani-killing
*This footage has been taken from a video game
https://factcheck.afp.com/afp-india
*10 tips for verifying viral social media videos
https://www.poynter.org/fact-checking/2018/10-tips-for-verifying-viral-social-media-videos/
*We’re launching a video series to highlight best practices for fact-checkers
https://www.poynter.org/fact-checking/2017/were-launching-a-video-series-to-highlight-best-practices-for-fact-checkers/
*This new guide is like a cookbook for investigating fake news
https://www.poynter.org/fact-checking/2018/this-new-guide-is-like-a-cookbook-for-investigating-fake-news/
*Fact Check: Is this the video of US drone strike that killed Iranian general Soleimani?
https://www.indiatoday.in/fact-check/story/fact-check-is-this-the-video-of-us-drone-strike-that-killed-iranian-general-soleimani-1634526-2020-01-06
*Special Report: How Iran spreads disinformation around the world
https://www.reuters.com/article/us-cyber-iran-specialreport/special-report-how-iran-spreads-disinformation-around-the-world-idUSKCN1NZ1FT