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उस दिन भी एक अप्रैल था! पढ़िए अमेरिका और चीन के बीच का ये किस्सा

Sun, 01 Apr 2018 10:08 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 01 Apr 2018 10:08 AM IST
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यूं तो पहली अप्रैल दुनिया भर में हल्के-फुल्के तरीके से लिया जाता है, लेकिन 2001 में इसी दिन एक ऐसी घटना घटी, जो संयुक्त राज्य अमरीका और चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय विवाद का सबब बन गई। विवाद बाद में दोनों देशों के बीच तनाव में तब्दील हो गया और यह तनाव दिनों-दिन बढ़ता ही चला जा रहा है। उस दिन हुआ सिर्फ इतना था कि अमेरिकी नौसेना का एक टोही विमान और चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी का इंटरसेप्टर फाइटर जेट हवा में ही आपस में टकरा गए, जिसमें चीनी पायलट की मौके पर ही मौत हो गई। 

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अमेरिकी टोही विमान ईपी-3 चीन के द्वीपीय प्रांत हैनान से तकरीबन 110 किमी और पारासेल द्वीप स्थित चीनी सैन्य प्रतिस्थापन से 160 किमी पर उड़ान भर रहा था। तब उसे दो जे-8 लड़ाकू विमानों ने रोकने की कोशिश की। रोकने की इस प्रक्रिया को खुफियागिरी की भाषा में अंतरोधन या इंटरसेप्शन कहते हैं। ईपी-3 और एक जे-8 विमान में टक्कर हो जाने से एक चीनी विमान चालक मौके पर ही मारा गया और टोही विमान को हैनान में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। चीनी अधिकारियों ने विमान के 24 कर्मचारियों को बंदी बनाकर, उनसे तब तक पूछताछ की, जब तक अमेरिकी सरकार की तरफ से घटना के बारे में बयान नहीं आ गया। 
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इस दस्तावेज का वाक्य विन्यास इरादतन अस्पष्ट था और दोनों देशों को मुंह छिपाने और एक-दूसरे के प्रति युद्ध जैसी स्थिति से बचने का अवसर देने की दृष्टि से किया गया था। इस समुद्री इलाके में दक्षिण चीन के समुद्री द्वीप (साउथ चाइना सी आइलैंड) शामिल हैं, जिन पर चीन और अन्य कई देशों का दावा है। रणनीतिक दृष्टि से यह इलाका दुनिया के अत्यधिक संवेदनशील इलाकों में से एक है। दक्षिण चीनी समुद्र के इस हिस्से में पारासेल द्वीप पर चीन के दावे के साथ ही समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि पर आधारित चीन का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र आता है। 

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हैनान में चीन की पूरी फौज

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चीन इस संधि की व्याख्या इस तरह करता है कि इसमें इस इलाके में दूसरे देशों के सैन्य अभियान प्रतिबंधित किए गए हैं। लेकिन अमेरिका पारासेल द्वीप पर चीन के दावे को मान्यता नहीं देता और इस बात पर कायम रहता है कि संधि किसी देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के भीतर सैन्य विमानों और जहाजों सहित सभी देशों के विमानों और जहाजों को फ्री नेविगेशन की अनुमति देती है। 

हैनान में चीन की सुखोई विमानों की पूरी फौज तैनात है। इस द्वीप में सिग्नल इंटेलिजेंस एकत्रीकरण का एक भारी अड्डा भी मौजूद है, जो इलाके में अमेरिकी गतिविधियों और व्यावसायिक दूरसंचारी उपग्रहों यानी कमर्शियल कम्युनिकेशंस सेटेलाइट्स पर नजर रखता है। हवाई निगरानी डिवीजन को समर्पित अमेरिकी विमान ईपी-3 ओकिनावा जापान स्थित कएना एयरबेस से बहैसियत मिशन पी.आर.32 सुबह सवा नौ बजे उड़ा। उसके छह घंटे के निगरानी मिशन के अंतिम दौर में हैनान द्वीप पर लिंगशुई एयरफील्ड के दो चीनी जे-8 विमान उसे रोकने के लिए रवाना हुए। लेफ्टिनेंट कमांडर वांग वी द्वारा उड़ाए जा रहे एक विमान ने 22,000 फीट की ऊंचाई पर ईपी-3 के पास दो चक्कर लगाए, तीसरे चक्कर में वह बड़े विमान से टकरा गया। 

उसके दो टुकड़े हो गए। ईपी-3 का रेडोम टूटकर अलग हो गया और बाहर की तरफ का बायां प्रोपेलर क्षतिग्रस्त हो गया। विमान का दबाव खत्म हो गया और एंटीना पिछले हिस्से से लिपट गया। इस टक्कर से ईपी-3 ने 130 अंशों का गोता खाया और तकरीबन उलट गया। आधे मिनट में वह 8000 फीट नीचे आ गया और इसके पहले कि उसका पायलट लेफ्टिनेंट शेन ऑस्बोर्न उसको फिर से नियंत्रित कर सीधा कर पाता, वह 6000 फीट और नीचे आ गया। किसी तरह से उसने इमरजेंसी पॉवर का इस्तेमाल कर विमान के नीचे जाने की गति को नियंत्रित किया और उसकी इमरजेंसी लैंडिंग करवाई। 

24 घंटे जारी रही थी पूछताछ

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अगले 26 मिनट तक ईपी-3 के कर्मचारी आपातकालीन योजना के तहत काम करते रहे, जिसमें विमान में मौजूद संवेदनशील डाटा, दस्तावेज और उपकरणों का नष्टीकरण शामिल था। खुफिया जानकारी जुटाने के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जुटाई हुई जानकारी को रफा-दफा करना जरूरी था। इन कर्मचारियों को संवेदनशील उपकरणों और दस्तावेजों को नष्ट करने के काम का कोई औपचारिक प्रशिक्षण तो मिला नहीं था, फिर भी कुछ तो करना ही था। 

ईपी-3 ने 15 विपत्ति संकेतों का कोई जवाब न मिलने के बाद लिंग्शुई एयरफील्ड में अनधिकृत रूप से विमान को उतारा। दूसरा चीनी जे-8 वहां दस मिनट पहले ही उतर चुका था। टक्कर में ध्वस्त हुए दूसरे जे-8 के पायलट वांग वी का शव आखिर तक बरामद नहीं हो सका। जमीन पर उतरने के 15 मिनट बाद तक ईपी-3 के कर्मचारियों ने संवेदनशील डाटा और उपकरणों को नष्ट करना जारी रखा। चीनी सिपाहियों ने खिड़कियों से बंदूकें तानी और उन्हें नीचे उतरवाया। चीनियों ने उन्हें पानी और सिगरेट ऑफर की। 

कड़े पहरे के बीच उन्हें लिग्शुई की बैरकों में ले जाया गया, जहां दो रातों तक उनसे पूछताछ की गई, फिर उन्हें द्वीप की प्रांतीय राजधानी और सबसे बड़े शहर हाईको के विश्राम स्थलों में रखा गया। उनके साथ बर्ताव तो ठीक किया गया, लेकिन चौबीसों घंटे पूछताछ जारी रही। लिहाजा वे सो नहीं सके। केवल खाना खाते समय ही सारे कर्मचारी साथ-साथ होते थे। तीन राजनयिक उनसे मिलने, उनकी हालत का अंदाजा लगाने और उनकी रिहाई की बातचीत करने  भेजे गए। हादसे के तीन दिन बाद ही उन्हें मिलने दिया गया। 

अमेरिका ने जारी की थी माफियों की चिट्ठी

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21 पुरुषों और तीन महिलाओं सहित 24 कर्मचारियों को 11 अप्रैल तक हिरासत में रखा गया। फिर अमेरिका ने चीनियों को ‘दो माफियों की चिट्ठी’ जारी की। चीनी सेना ईपी-3 में घुसी और उसने विमान के उपकरणों की खासी तलाशी ली। कर्मचारी क्लासिफाइड जानकारी को आंशिक तौर पर ही नष्ट कर पाए थे। कुछ मसाला नष्ट होने से रह गया था जिनमें क्रिप्टोग्राफिक कुंजियां, सिग्नल इंटेलिजेंस के मैन्युअल और एन.एस.ए के कर्मचारियों की सूची शामिल थी। कर्मचारियों को राजनयिक मध्यस्थताओं के चलते कालान्तर में छोड़ दिया गया, लेकिन एक खासे अरसे तक उक्त विमान को चीनियों ने वहां से हिलने नहीं दिया। बाद में, चीन ने इस विमान को वापस करने तक पूरी तरह से खंगाल डाला और उसे इस दौरान खासी उपयोगी जानकारियां हासिल हुईं। 

अमेरिका के जाने-माने पत्रकार सैमोर हर्श ने द न्यू यॉर्कर में लिखा है। उन्हीं की जबानी सुनिए, “पेंटागॉन ने प्रेस को बताया कि कर्मचारियों ने अपने प्रोटोकॉल का पालन किया, जिसके तहत विमान के उपकरण और सॉफ्टवेयर को बेकार करने के लिए कुल्हाड़ी और गर्म कॉफी का इस्तेमाल किया जाता है। इस सॉफ्टवेयर में एन.एस.ए द्वारा निर्मित एवं नियंत्रित ऑपरेटिंग सिस्टम और चीनी राडार, ध्वनि और इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशंस पर नजर रखने के लिए जरूरी ड्राइवर्स शामिल हैं। सितम्बर 2003 में अमेरिकी नौसेना की एक रिपोर्ट में कहां गया कि नष्ट न की जा सकी क्लासिफाइड जानकारी का चीन के हाथ लग जाना पूरी तरह से मुमकिन है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता।”

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