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पाकिस्तान: सेना और सरकार के खिलाफ बोलने वालों पर आईएसआई की नजर, सोशल मीडिया से हटे पांच हजार पोस्ट

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sun, 12 May 2019 01:36 PM IST
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : File Photo
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पाकिस्तान में सरकार और सेना के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करने वाले लोगों को इस वक्त डर के साए में जीना पड़ रहा है। यहां सरकार के खिलाफ कुछ भी बोलने पर उन्हें जेल में डाल दिया जाता है। यहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई इसके लिए सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रख रही है। आईएसआई के कहने पर ही फेसबुक-ट्विटर से बीते छह महीने में ही पांच हजार से अधिक पोस्ट हटा दी गई हैं। ये जानकारी एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आई है।
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रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में सेना और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्ष के समर्थकों पर सख्ती बरती जा रही है। हाल ही में पुलिस ने एक मशहूर ब्लॉगर गुल बुखारी को गिरफ्तार किया है।


गुल का कहना है कि आईएसआई लोगों की आवाज दबाकर जीत की साजिश रच रही है। वहीं सरकार का अपमान करने के आरोप में पत्रकार रिजवान उर रहमान को भी गिरफ्तार किया गया है। उन्हें गिरफ्तारी के बाद इतना अधिक प्रताड़ित किया गया कि रिहाई के बाद से उन्होंने ट्वीट करना ही बंद कर दिया है। 

सोशल मीडिया यूजर्स को चेतावनी

सोशल मीडिया को लेकर सेना के प्रवक्ता जनरल आसिफ गफूर पहले ही लोगों को चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जो भी आपत्तिजनक पोस्ट करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

क्या किया पाकिस्तानी सरकार ने?

पाकिस्तान की सरकार ने फरवरी में सोशल मीडिया पर नजर रखने के उद्देश्य से एक नई यूनिट बनाई है। यहां सरकार का कहना है कि जो भी देश में नफरस को बढ़ावा देगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। हैरानी की बात तो ये है कि पाकिस्तानी सरकार विदेश में रहने वाले अपने नागरिकों के पोस्ट पर भी नजर रख रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ ये कार्रवाई छह महीने में तेज हुई है। सरकार और सेना ने इस दौरान फेसबुक से 2200 पोस्ट हटवाई हैं। जिनमें से 87 के बारे में पाकिस्तान की टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी ने शिकायत की थी। वहीं ट्विटर से तीन हजार कंटेंट हटाए गए हैं। ये संख्या साल 2017 में महज 674 थी।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की राबिया महमूद ने पाकिस्तान सरकार के इस कदम को सेंसरशिप करार दिया है। उनका कहना है कि इशारा बिल्कुल साफ है, पाकिस्तानी सेना के खिलाफ कोई भी बात सहन नहीं की जाएगी।  



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