ईरानी नेता खामनेई ने कहा- अमेरिका की दबाव की नीति के आगे नहीं झुकेंगे, नाटो ने जताई चिंता
- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने अमेरिका के साथ वार्ता की संभावना को नकारा
- नाटो ने तेल संयंत्रों पर हमले के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई
- नाटो ने ईरान पर पूरे क्षेत्र को अस्थिर करने का आरोप लगाया
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सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ के दो प्लांटों पर हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने अमेरिका के साथ वार्ता की हर संभावना को नकार दिया। खामनेई ने कहा कि ईरान अमेरिका की दबाव की नीति के आगे घुटने नहीं टेकेगा। जबकि नाटो ने तेल संयंत्रों पर हमले के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है।
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है। उन्होंने कहा, हम सभी पक्षों से कह रहे हैं कि इस तरह के हमलों को दोबारा न होने दें। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति से ट्रंप की मुलाकात और ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के संकेत की धमकी के बीच सर्वोच्च ईरानी नेता खामनेई ने कहा, ‘हम अमेरिका के साथ वार्ता नहीं करेंगे, इस तरह तेहरान पर अधिकतम दबाव की वाशिंगटन की नीति विफल हो जाएगी।’
उन्होंने कहा, यदि अमेरिका एटमी डील पर पीछे हटने की गलती को स्वीकारता है और संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओ) से साथ लौटता है तो ईरान, वाशिंगटन और दूसरे साझेदारों के साथ बातचीत को तैयार हो सकता है। बिना व्यापक कार्ययोजना के इस्लामिक गणराज्य और अमेरिका के बीच कोई बातचीत संभव नहीं है।
रूहानी भी कर चुके हैं बातचीत से इनकार
ईरान के राष्ट्रपति रूहानी पहले ही अमेरिका के साथ बातचीत की संभावनाओं को नकार चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जब तक ईरान के ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया नहीं जाता है तब तक वह अमेरिका से बातचीत को तैयार नहीं होंगे। पिछले साल अमेरिका 2015 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अलग हो गया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच काफी तनाव है और यह तनाव शनिवार को सऊदी के दो तेल प्लांटों पर हुए हमले के बाद काफी बढ़ गया है।