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Donald Trump: 'ट्रंप को मारना चाहता था ईरान, मानता है दुश्मन नंबर वन', इस्राइली पीएम का चौंकाने वाला दावा
Mon, 16 Jun 2025 09:24 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 16 Jun 2025 09:24 AM IST
सार
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करने के लिए जो भी होगा करने के लिए उनका देश तैयार है। उन्होंने कहा कि हम न सिर्फ अपनी बल्कि पूरी दुनिया की रक्षा कर रहे हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
- फोटो : ANI
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विस्तार
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान की सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मारना चाहती थी। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की सरकार डोनाल्ड ट्रंप को अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए खतरा मानती है और सक्रिय रूप से ट्रंप को खत्म करना चाहती थी।
नेतन्याहू ने बताया ट्रंप को दुश्मन क्यों मानता है ईरान
एक अमेरिकी न्यूज चैनल के साथ बातचीत में नेतन्याहू ने कहा कि वे (ईरान सरकार) उन्हें (ट्रंप) मारना चाहते हैं। वे उनके नंबर वन दुश्मन हैं। ट्रंप एक निर्णायक नेता हैं, जिन्होंने दूसरों की तरह ईरान के साथ मोलभाव का रास्ता नहीं चुना। यह असल में कमजोरी की बात है, जिसने ईरान को यूरेनियम संवर्धन के रास्ते पर डाला। इसका मतलब है कि यह परमाणु बम बनाने और ईरान को अरबों डॉलर देने का रास्ता है।'
नेतन्याहू ने कहा कि 'ट्रंप ने ईरान के साथ फर्जी समझौते को खत्म कर दिया। उन्होंने कासिम सुलेमानी को मारा। ट्रंप इस बात को लेकर साफ हैं कि आप (ईरान) परमाणु हथियार नहीं रख सकते और यूरेनियम संवर्धन नहीं कर सकते। यही वजह है कि ईरान, ट्रंप को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है।'
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ये भी पढ़ें- Iran Crisis: 'तीन रातों से सो नहीं पाए', ईरान में बढ़ते हमलों के बीच भारतीय छात्रों ने घर वापसी की लगाई गुहार
'हमारे अस्तित्व पर खतरा, हमारे पास कोई और रास्ता नहीं था'
ईरान पर हमले की वजह बताते हुए इस्राइली पीएम ने कहा कि हमारा देश परमाणु तबाही के खतरे का सामना कर रहा है और हमारे पास हमला करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था। नेतन्याहू ने कहा कि 'हमारे अस्तित्व पर खतरा है। ईरान यूरेनियम संवर्धन कर तेजी से परमाणु बम बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा था और उसकी मंशा हमारी तबाही है। दूसरा ईरान तेजी से बैलिस्टिक मिसाइल के जखीरे में बढ़ोतरी कर रहा है और अगले एक साल में 3600 और अगले तीन साल में 10 हजार बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की तरफ बढ़ रहा है। हर मिसाइल का वजन करीब एक टन है। इतना ही नहीं अगले 26 साल में ईरान 20 हजार मिसाइल बनाना चाहता है। कोई भी देश इतनी बड़ी संख्या में मिसाइल हमलों को नहीं झेल सकता और खासकर इस्राइल जैसा छोटा देश तो बिल्कुल भी नहीं। इसलिए हमें कार्रवाई करनी ही थी।'
ये भी पढ़ें- Iran vs Israel: इस्राइली हमलों से ईरान में 224 की मौत, विदेश मंत्रालय समेत कई सरकारी इमारतों को बनाया निशाना
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नेतन्याहू ने बताया ट्रंप को दुश्मन क्यों मानता है ईरान
एक अमेरिकी न्यूज चैनल के साथ बातचीत में नेतन्याहू ने कहा कि वे (ईरान सरकार) उन्हें (ट्रंप) मारना चाहते हैं। वे उनके नंबर वन दुश्मन हैं। ट्रंप एक निर्णायक नेता हैं, जिन्होंने दूसरों की तरह ईरान के साथ मोलभाव का रास्ता नहीं चुना। यह असल में कमजोरी की बात है, जिसने ईरान को यूरेनियम संवर्धन के रास्ते पर डाला। इसका मतलब है कि यह परमाणु बम बनाने और ईरान को अरबों डॉलर देने का रास्ता है।'
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नेतन्याहू ने कहा कि 'ट्रंप ने ईरान के साथ फर्जी समझौते को खत्म कर दिया। उन्होंने कासिम सुलेमानी को मारा। ट्रंप इस बात को लेकर साफ हैं कि आप (ईरान) परमाणु हथियार नहीं रख सकते और यूरेनियम संवर्धन नहीं कर सकते। यही वजह है कि ईरान, ट्रंप को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है।'
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'हमारे अस्तित्व पर खतरा, हमारे पास कोई और रास्ता नहीं था'
ईरान पर हमले की वजह बताते हुए इस्राइली पीएम ने कहा कि हमारा देश परमाणु तबाही के खतरे का सामना कर रहा है और हमारे पास हमला करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था। नेतन्याहू ने कहा कि 'हमारे अस्तित्व पर खतरा है। ईरान यूरेनियम संवर्धन कर तेजी से परमाणु बम बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा था और उसकी मंशा हमारी तबाही है। दूसरा ईरान तेजी से बैलिस्टिक मिसाइल के जखीरे में बढ़ोतरी कर रहा है और अगले एक साल में 3600 और अगले तीन साल में 10 हजार बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की तरफ बढ़ रहा है। हर मिसाइल का वजन करीब एक टन है। इतना ही नहीं अगले 26 साल में ईरान 20 हजार मिसाइल बनाना चाहता है। कोई भी देश इतनी बड़ी संख्या में मिसाइल हमलों को नहीं झेल सकता और खासकर इस्राइल जैसा छोटा देश तो बिल्कुल भी नहीं। इसलिए हमें कार्रवाई करनी ही थी।'
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