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ईरान का सबसे खतरनाक हथियार जिससे दहशत में है अमेरिका 

Rama Solankiरमा सोलंकी Updated Tue, 14 Jan 2020 08:27 PM IST
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साइबर अटैक
साइबर अटैक - फोटो : Amar Ujala
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सार

  • किससे डरता है अमेरिका
  • भविष्य में साइबर हमले ही निर्णायक होंगे
  • वो साइबर हमला जब कम्प्यूटर बंद हुआ और काम ठप हुआ
  • जानिए साइबर अटैक के बारे में सबकुछ
  • खतरनाक वायरस से बचने के लिए कुछ टिप्स
  • भारत के पास 120 से अधिक डाटा सेंटर और क्लाउड्स हैं

विस्तार

बीते साल 20 जून को ईरान ने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान को इसके नतीजे भुगतने की चेतावनी भी दी थी। माना जा रहा है कि इसके बाद अमेरिकी साइबर हैकर्स की टीम ने ईरान की मिसाइल प्रक्षेपण में इस्तेमाल होने वाले कम्प्यूटर्स पर हमला कर दिया था।
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धीरे-धीरे यह खबर मीडिया के जरिये बाहर आने लग गई थी। अब एक सवाल यह है कि क्या अमेरिका भी ईरान के साइबर हमले से डरता है? हालांकि इस विषय पर अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने किसी भी समाचार पत्र की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है।

अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक खबर के मुताबिक, 'ईरान के हमले से ऐसे कंप्यूटरों को नुकसान पहुंचा है जिन्हें रॉकेट और मिसाइल प्रक्षेपण में इस्तेमाल किया जाता है। खबर में ये भी लिखा है कि अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने समाचार पत्र की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी मीडिया ने खबरों के माध्यम से इस बात का दावा भी किया कि, अमेरिका ने ईरान में अपने निगरानी ड्रोन मार गिराये जाने के बाद ईरान की मिसाइल नियंत्रण प्रणाली और उनके एक जासूसी नेटवर्क पर साइबर हमले किये थे।

बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या ये कदम अमेरिका ने ईरान के डर से उठाया या फिर उसकी कोई सोची-समझी रणनीति है। इस खबर पर बीबीसी ने भी ट्वीट किया और लिखा "ईरान की मिसाइल नियंत्रण प्रणाली पर अमेरिका का साइबर अटैक" रॉकेट और मिसाइल लांचर चलाने वाले कम्प्यूटरों को निशाना बनाया गया।
'हमारे दैनिक जीवन में सूचना तंत्र और साइबरस्पेस के महत्व को देखते हुए, यह भी विचारणीय है कि अमेरिका - ईरान विवाद न सिर्फ भौतिक दुनिया की चीज रहेगी बल्कि यह साइबर हमलों का रूप भी ले सकती है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, खासकर जब ईरान ने पिछले दशक में, 2010 में, अपने यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं पर अमेरिका द्वारा स्टक्सनेट वाइरस द्वारा  किए गए आक्रमण के बाद अपनी साइबर क्षमताओं कि वृद्धि का प्रदर्शन किया था।' - हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट 
याहू ने दो पूर्व खुफिया अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर नजर रखने वाले एक जासूसी जहाज को निशाना बनाया। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इसी जगह हाल में ही में दो बार उसके तेल टैंकरों पर हमले किये थे। ईरान के परमाणु सौदे से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के बीच बढ़ा हुआ है।

ईरान का दावा है कि ड्रोन ने उसके हवाई क्षेत्र का जबर्दस्त उल्लंघन किया था। ड्रोन हमले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमला करने के बात कही थी। बाद में बात पलट गई और उन्होंने हमले की सोच त्यागकर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अगले सप्ताह ईरान पर बड़े प्रतिबंध जरूर लगाएगा।
'अक्तूबर 2019 में अमेरिकी अधिकारी ने रायटर्स को कहा कि अमेरिका ने ईरान के इस प्रोपेगैंडा के खिलाफ कि ईरानी ड्रोन एवं मिसाइल ने अरेबियन तेल सुविधाओं पर हमला किया है, अमेरिका ने इसके खिलाफ एक गुप्त साइबर अभियान शुरू किया है। दूसरी तरफ, 2013 में यह पता लगा कि ईरानी हैकर्स, जो कथित रूप से ईरान सरकार के लिए काम करते थे, ने  न्यूयॉर्क शहर के उत्तर के एक छोटे डैम के कम्प्युटर के नियंत्रण का भेदन कर दिया है। इन्हीं हैकर्स ने जेपी मॉर्गन चेज़, बैंक ऑफ अमेरिका, और जैसी दर्जनों वित्तीय संस्थाओं पर साइबर हमलों कि शुरुआत की और बड़ी मात्रा में इनकी सेवाओं को नकारते हुए ग्राहकों को उनकी ऑनलाइन अकाउंट तक पहुंच को बाधित कर दिया।'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट 
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"होर्मुज जलडमरूमध्य" मात्र नाम नहीं एक चेतावनी है 

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