फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Iran Presidential Election 2021, Voting percentage may remain low

ईरान : राष्ट्रपति चुनाव में कट्टरपंथी उम्मीदवार आगे, दो बार राष्ट्रपति चुने जा चुके हैं रूहानी

Fri, 18 Jun 2021 02:12 AM IST
Jeet Kumar न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, तेहरान।
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, तेहरान। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 18 Jun 2021 02:12 AM IST
सार

मुख्य मुकाबला कट्टरपंथियों के बीच ही है। इनमें से ईरान के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और कट्टरपंथी नेता इब्राहिम रईसी की जीत पक्की मानी जा रही है। वे 2017 में कट्टरपंथी हसन रूहानी से चुनाव हार चुके हैं।

विज्ञापन
Iran Presidential Election 2021, Voting percentage may remain low
Hasan Ruhani - फोटो : social media

विस्तार

शिया मुस्लिम बहुल देश ईरान में 18 जून को चुनाव होने जा रहे हैं और आगामी अगस्त माह से जीतने वाला प्रत्याशी अगले राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालेगा। मौजूदा राष्ट्रपति हसन रूहानी 2017 में दूसरी बार चुने जा चुके हैं इसलिए तीसरा चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। ऐसे में एटमी संधि को लेकर अमेरिका व यूरोपीय देशों में हुई वार्ता के बाद तेजी से बदले हालात में इस बार के राष्ट्रपति चुनाव अहम होंगे।

विज्ञापन

 
देश में इस बार सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं जिनमें से पांच कट्टरपंथी विचारधारा हैं और दो उदारवादी हैं। मुख्य मुकाबला कट्टरपंथियों के बीच ही है। इनमें से ईरान के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और कट्टरपंथी नेता इब्राहिम रईसी की जीत पक्की मानी जा रही है। वे 2017 में कट्टरपंथी हसन रूहानी से चुनाव हार चुके हैं। लेकिन इस बार मैदान में उतरे पांच कट्टरपंथियों में रईसी सर्वाधिक कट्टरपंथी हैं।
विज्ञापन


देश में सेना (रिवॉल्यूशनरी गार्ड) समर्थित फारस न्यूज एजेंसी का ओपिनियम पोल बताता है कि इस बार 53 फीसदी मतदान होगा और रईसी को 72 फीसदी मत मिलेंगे।

अन्य उम्मीदवारों में कट्टरपंथी नेता और ईरानी सेना के पूर्व कमांडर इन चीफ मोहसिन रेजाई, सुरक्षा परिषद के सदस्य सईद जलीली, ईरानी सैंट्रल बैंक के पूर्व प्रमुख अब्दुलनस्र हिम्मती और संसद में डिप्टी स्पीकर आमिर हुसैन गाजीजादे हाशमी शामिल हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


चुनाव से मतदाताओं का मोहभंग
इस बार ईरान में चुनाव के बहिष्कार की आवाजें भी खूब उठ रही हैं। कमजोर अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और देश पर लगी कई पाबंदियों की वजह से कई मतदाताओं का चुनाव से मोहभंग हुआ है।

ईरान में हर चार साल में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में यदि पहले दौर के मतदान में किसी उम्मीदवार को 50 फीसदी से अधिक वोट नहीं मिले तो दूसरे दौर में सर्वाधिक मत पाने वाले दो प्रत्याशियों को बीच मतदान होता है। देश के इस्लामी गणराज्य का सर्वेसर्वा वहां का धर्मगुरु होता है जिसे रहबर या सर्वोच्च नेता कहा जाता है। 

इसलिए पक्की है रईसी की जीत
ईरान में कट्टरपंथी नेता इब्राहिम रईसी मौलवियों के उस छोटे से समूह का हिस्सा हैं, जिसने 1988 में तत्कालीन सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह रुहोल्लाह खोमैनी के आदेश पर ईरान-इराक युद्ध के बाद बंदी बनाए गए हजारों राजनीतिक कैदियों को मारने के आदेश पर दस्तखत कर दिए थे।

तब वे तेहरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशन कोर्ट में एक प्रॉसिक्यूटर के पद पर थे। इसके बाद अमेरिका ने रईसी पर प्रतिबंध लगा दिए। इसका लाभ देश के कट्टरपंथी मतदाताओं के बीच इस बार उठाने में सबसे आगे हैं।


दुश्मनों का दबाव घटाएगा अधिक मतदान : खामनेई
ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह खामेनेई ने ईरानी लोगों से आग्रह किया कि वे शुक्रवार को राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले मतदान में जरूर हिस्सा लें। उन्होंने कहा, अधिक मतदान व इस्लामी रिपब्लिक पर बाहरी दबाव के बीच सीधा संबंध है। यदि मतदान में लोगों की भागीदारी कम होती है तो दुश्मनों का दबाव बढ़ेगा। विदेशी दबाव और प्रतिबंधों को कम करने के लिए मतदान में लोगों की भागीदारी बढ़ना बेहद जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed