Bahrain: जयशंकर बोले- ईरान और इस्राइल के बीच संबंध न होना चिंता का विषय, कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है भारत
Bahrain: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हाल ही में इस्राइल और ईरान के संबंध न होना सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस पर भारत की कुछ कूटनीतिक कोशिशें केंद्रित हैं। उन्होंने संघर्ष को फैलने से रोकना, महत्वपूर्ण संपर्क परियोजनाओं की अहमियत और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में सुधार जैसे मुद्दों पर भी बात की।
विस्तार
बीते कुछ महीनों से जारी पश्चिम एशियाई देशों के टकराव और तनावपूर्ण हालात में द्विपक्षीय दौरा करने पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को अपने बहरीनी समकक्ष अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल ज़ायनी से मुलाकात भी की। उन्होंने बैठक को लेकर प्रसन्नता जाहिर की और कह कि उन्हें भारत-बहरीन उच्च संयुक्त आयोग की बैठक का बेसब्री से इंतजार है।
भारत-बहरीन की दीर्घकालिक मित्रता का सच्चा प्रतीक
एक मंदिर में दर्शन करने के बाद जयशंकर ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, 'भारत-बहरीन की दीर्घकालिक मित्रता का सच्चा प्रतीक।' इसके बाद डॉ जयशंकर ने 20वें आईआईएसएस मनामा संवाद को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत खाड़ी और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों को अहमियत देता है। उन्होंने आर्थिक, राजनीतिक, संपर्क और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता पर भी बात की।
Started the day by visiting the 200 year-old Shreenathji Temple in Manama.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) December 8, 2024
A true symbol of the longstanding India - Bahrain friendship.
🇮🇳 🇧🇭 pic.twitter.com/N2M6Z44CcA
भारत की रुचि सुरक्षा स्थिति को शांत करने में
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि इस्राइल और ईरान के बीच संबंध न होने से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है और भारत की कुछ कूटनीतिक कोशिशें इसी मुद्दे पर केंद्रित हैं। जयशंकर दो दिवसीय बहरीन दौरे पर हैं, जहां 'मनामा संवाद' कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बयान दिया। उन्होंने हूती विद्रोहियों की ओर से लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का जिक्र किए बगैर कहा कि भारत की रुचि सुरक्षा स्थिति को शांत करने में है।
इस्राइल और ईरान के संबंध न होना सभी के लिए चिंता का विषय
जयशंकर ने कहा, हाल ही में इस्राइल और ईरान के संबंध न होना सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस पर भारत की कुछ कूटनीतिक कोशिशें केंद्रित हैं। उन्होंने संघर्ष को फैलने से रोकना, महत्वपूर्ण संपर्क परियोजनाओं की अहमियत और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में सुधार जैसे मुद्दों पर भी बात की।
भारत आज करीब चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था
विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पश्चिम एशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण है और भारत की निरंतर आर्थिक वृद्धि इसके विकास को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा, भारत आज करीब चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस दशक के अंत तक यह दोगुना होगी। उन्होंने यह भी कहा, पश्चिम एशिया हमारे लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, क्योंकि यह हमारी सीमाओं से सटा हुआ है और इसको पार करने से हमारे लिए दुनिया का रास्ता खुलता है।
At the 20th IISS Manama Dialogue panel on ‘Whither Regional Strategic Cooperation’ alongside FM Dr Abdullatif bin Rashid Al Zayani of 🇧🇭 and NSA Tomáš Pojar of 🇨🇿.@IISS_org #IISSMD24
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) December 8, 2024
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जयशंकर ने लाल सागर में सुरक्षा स्थिति पर भी बात की और कहा कि इस क्षेत्र में व्यापार पर गहरा नकारात्मक पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने इस क्षेत्र में अपनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ाई है और कई जहाजों को सुरक्षा प्रदान की है।
जयशंकर ने कहा, हमने इस क्षेत्र में अपनी की मौजूदगी बनाई है, खासकर अदन की खाड़ी, सोमालिया और उत्तरी अरब सागर में। पिछले साल हमने 24 घटनाओं का जवाब दिया, 250 जहाजों को सुरक्षित किया और 120 चालकों को बचाया। उन्होंने आगे कहा कि भारत इस क्षेत्र में अपने साझेदारों के साथ द्विपक्षीय अभ्यासों को बढ़ाना चाहता है, खासकर खाड़ी क्षेत्र और भूमध्य सागर में। उन्होंने कहा, खाड़ी क्षेत्र में खाड़ी देशों के साथ हमारे संबंध पहले से अधिक मजबूत हुए हैं और भूमध्य सागर में इस्राइल, ग्रीस और मिस्र के साथ भी इस वर्ष महत्वपूर्ण अभ्यास हुए हैं।
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