{"_id":"5cf304bebdec2207737674a0","slug":"iran-backed-group-threatens-global-oil-supply-saudi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ईरान समर्थित समूह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए खतरा : सऊदी","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
ईरान समर्थित समूह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए खतरा : सऊदी
Sun, 02 Jun 2019 04:35 AM IST
Avdhesh Kumar
एजेंसी, मक्का
एजेंसी, मक्का
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sun, 02 Jun 2019 04:35 AM IST
विज्ञापन
Iran President
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सऊदी अरब के किंग सलमान ने शनिवार को चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में आतंकवादी हमले से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है। किंग ने पवित्र शहर मक्का में इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की एक बैठक में कहा, हम पुष्टि करते हैं कि आतंकवादी कार्रवाई न केवल किसी देश और खाड़ी क्षेत्र को लक्षित करती है, बल्कि यह वैश्विक तेल आपूर्ति की सुरक्षा को भी निशाना बनाती है।
दो क्षेत्रीय शक्तियों में हालिया तनाव के बीच आईओसी संबोधन के दौरान किंग सलमान ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, ‘इन हमलों से पूरी दुनिया की ऊर्जा पर खतरा है।’ किंग ने यूएई के अपतटीय क्षेत्र में चार तेल टैंकरों में कथित तोड़फोड़ की घटना को समुद्री यातायात सुरक्षा व क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाला बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया को आतंकवाद को पालने वालों और उनकी आर्थिक मदद करने वालों से लड़ना चाहिए। उन्होंने ड्रोन हमलों के लिए भी ईरान समर्थित आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया।
सऊदी विदेश मंत्री इब्राहिम अल-असफ ने भी जेद्दा में इस्लामी देशों से ईरानी दखल को खारिज करने का आव्हान किया। हालांकि, तेहरान ने इस तरह के किसी भी हमले में शामिल होने की बात का दृढ़ता से इनकार किया है। ईरान ने निराशा जताई कि ‘57-सदस्यीय ओआईसी के शिखर सम्मेलन में रियाद आधारहीन आरोप लगाने की योजना बना रहा है।’
विज्ञापन
विज्ञापन
दो क्षेत्रीय शक्तियों में हालिया तनाव के बीच आईओसी संबोधन के दौरान किंग सलमान ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, ‘इन हमलों से पूरी दुनिया की ऊर्जा पर खतरा है।’ किंग ने यूएई के अपतटीय क्षेत्र में चार तेल टैंकरों में कथित तोड़फोड़ की घटना को समुद्री यातायात सुरक्षा व क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाला बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया को आतंकवाद को पालने वालों और उनकी आर्थिक मदद करने वालों से लड़ना चाहिए। उन्होंने ड्रोन हमलों के लिए भी ईरान समर्थित आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया।
विज्ञापन
सऊदी विदेश मंत्री इब्राहिम अल-असफ ने भी जेद्दा में इस्लामी देशों से ईरानी दखल को खारिज करने का आव्हान किया। हालांकि, तेहरान ने इस तरह के किसी भी हमले में शामिल होने की बात का दृढ़ता से इनकार किया है। ईरान ने निराशा जताई कि ‘57-सदस्यीय ओआईसी के शिखर सम्मेलन में रियाद आधारहीन आरोप लगाने की योजना बना रहा है।’
विज्ञापन
ईरान के खिलाफ युद्ध से पूरा क्षेत्र चपेट में आएगा : हिज्बुल्ला
इस बीच लेबनान के शिया संगठन हिज्बुल्ला ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के खिलाफ किसी प्रकार का युद्ध छिड़ता है तो पूरा पश्चिम एशिया इसकी चपेट में आ जाएगा। ईरान समर्थित इस संगठन के प्रमुख हसन नसरुल्ला ने टीवी संबोधन में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, उनका प्रशासन और उनका खुफिया तंत्र इस बात को अच्छी तरह जानता है।
उन्होंने चेताया कि युद्ध छिड़ने की स्थिति में किसी भी अमेरिकी बल तथा अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाएगा। बता दें कि अमेरिका ने हिजबुल्ला को आतंकवादी संगठन की सूची में डाल रखा है।
उन्होंने चेताया कि युद्ध छिड़ने की स्थिति में किसी भी अमेरिकी बल तथा अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाएगा। बता दें कि अमेरिका ने हिजबुल्ला को आतंकवादी संगठन की सूची में डाल रखा है।
अमेरिकी दूतावास का येरुशलम ले जाना निंदनीय : आईओसी
इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) ने अमेरिका द्वारा अपना दूतावास येरुशलम ले जाने और विवादित शहर को इस्राइल की राजधानी के बतौर मान्यता देने के फैसले की शनिवार को आलोचना की। सत्तावन देशों के संगठन ने एक बयान में कहा कि संगठन अमेरिका और ग्वाटेमाला के दूतावासों को येरुशलम स्थानांतरित करने की निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि आईओसी सभी सदस्यों से उन देशों का बहिष्कार करने का अनुरोध करता है जिन्होंने येरूशलम में अपने राजनयिक मिशन खोले हैं। बता दें कि ट्रंप ने इस योजना को ‘सदी का समझौता’ बताया है, लेकिन फलस्तीनियों ने इसे खारिज कर दिया है।
बयान में कहा गया कि आईओसी सभी सदस्यों से उन देशों का बहिष्कार करने का अनुरोध करता है जिन्होंने येरूशलम में अपने राजनयिक मिशन खोले हैं। बता दें कि ट्रंप ने इस योजना को ‘सदी का समझौता’ बताया है, लेकिन फलस्तीनियों ने इसे खारिज कर दिया है।