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Pakistan: 1947 में बंटवारा के बाद करतारपुर में मुस्लिम बहन से मिला सिख भाई, एक दूसरे से गले लग खूब रोए
Sat, 10 Sep 2022 05:01 PM IST
संजीव कुमार झा
पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 10 Sep 2022 05:01 PM IST
सार
दोनों बिछड़े भाई-बहन की मुलाकात करतारपुर के गुरुद्वारा दरबार साहिब में हुई। दोनों एक दूसरे को देखते ही फफक पड़े और गले लगकर खूब रोने लगे।
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1947 में परिवार से अलग होने के बाद मुस्लिम बहन से मिला शख्स
- फोटो : Social Media
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विस्तार
पंजाब के जालंधर के रहने वाले अमरजीत सिंह की खुशी का ठिकाना उस समय नहीं रहा जब वह विभाजन के समय अपने परिवार से अलग होने के 75 साल बाद अपनी मुस्लिम बहन से मिले। दोनों की मुलाकात करतारपुर के गुरुद्वारा दरबार साहिब में हुई। दोनों एक दूसरे को देखते ही फफक पड़े और गले लगकर खूब रोने लगे। मुलाकात के समय भाई-बहन के अलावा वहां मौजूद लोगों की आखें भी नम हो गईं।
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बहन से मिलने के लिए बाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की खबर के मुताबिक, सिंह अपनी बहन से मिलने के लिए वीजा लेकर वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे। 65 वर्षीय कुलसुम अपने भाई सिंह को देखकर अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाईं और दोनों एक दूसरे को गले लगाकर रोते रहे। वहीं कुलसुम बेटे शहजाद अहमद और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अपने भाई से मिलने के लिए फैसलाबाद से करतारपुर पहुंची थीं।
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कुलसुम पाकिस्तान में पैदा हुई थीं
अखबार से बात करते हुए कुलसुम ने कहा कि उनके माता-पिता 1947 में जालंधर के एक उपनगर से पाकिस्तान चले आये थे जबकि उनके भाई और एक बहन वहीं छूट गए थे। कुलसुम ने कहा कि वह पाकिस्तान में पैदा हुई थीं और भारत में छूटे अपने भाई और बहन के बारे में अपनी मां से सुनती थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह कभी अपने भाई और बहन से मिल पाएंगी। लेकिन अब मिलकर बहुत खुशी हो रही है।
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जानिए कैसे दोनों भाई-बहन की मुलाकात हुई
उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले उनके पिता के एक दोस्त सरदार दारा सिंह भारत से पाकिस्तान आये और उनसे भी मुलाकात की। उन्होंने बताया कि इस दौरान, उनकी मां ने सरदार दारा सिंह को भारत में छूटे अपने बेटे और बेटी के बारे में बताया। दारा सिंह को उनके गांव का नाम और अन्य जानकारी भी दी।
उन्होंने बताया कि इसके बाद दारा सिंह पडावां गांव स्थित उनके घर गए और उनकी मां को सूचित किया कि उनका बेटा जीवित है लेकिन उनकी बेटी की मौत हो चुकी है। कुलसुम के अनुसार दारा सिंह ने उनकी मां को बताया कि उनके बेटे का नाम अमरजीत सिंह है जिसे 1947 में एक सिख परिवार ने गोद ले लिया था।
उन्होंने बताया कि भाई की जानकारी मिलने के बाद कुलसुम ने सिंह से व्हाट्सऐप पर संपर्क किया और बाद में मिलने का फैसला किया। सिंह ने कहा कि जब उन्हें पहली बार पता चला कि उनके असली माता-पिता पाकिस्तान में हैं और मुसलमान हैं, तो यह उनके लिए एक झटका था। उनके अनुसार हालांकि, उन्होंने खुद को दिलासा दिया कि उनके अपने परिवार के अलावा कई अन्य परिवार भी विभाजन के दौरान एक-दूसरे से अलग हो गए थे।