दुष्कर्म का दोषी साबित होने पर भारतीय से छीनी ब्रिटिश नागरिकता, वापस भारत भेजने की तैयारी
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अपने ही परिवार के एक बच्चे के साथ 23 बार दुष्कर्म करने के आरोपी भारतीय व्यक्ति का दोष साबित होने पर उसकी ब्रिटिश नागरिकता छीन ली गई है। अब उसे भारत वापस भेजने की तैयारी की जा रही है। कानूनी कारणों से आरएसडी के काल्पनिक नाम से पहचाना जा रहा यह व्यक्ति 1997 में भारत से ब्रिटेन आया था और उसे 2004 में ब्रिटिश नागरिकता मिल गई थी। उसे 2011 में एक 7 साल के लड़के के साथ 2003 से 2010 के बीच दर्जनों बार यौन उत्पीड़न व दुष्कर्म करने का दोषी पाया गया था।
संडे टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश अदालत ने उसे 14 साल कैद की सजा के साथ ही जिंदगी भर के लिए यौन अपराधियों के रजिस्टर में नाम दर्ज किए जाने की सजा सुनाई थी। अपनी तरह के इस पहले मामले में ब्रिटेन के गृह सचिव साजिद जाविद ने उसकी ब्रिटिश नागरिकता वापस लिए जाने के आदेश जारी कर दिए थे। गृह सचिव ने उसे ब्रिटिश नागरिकता के आवेदन में बच्चे से यौन उत्पीड़न वाले कॉलम में झूठी जानकारी देने का दोषी मानते हुए यह कार्रवाई की थी।
पहली बार हुआ ऐसे मामले में निर्वासन
दुष्कर्म के मामले में निर्वासन का यह पहला मामला माना जा रहा है। आमतौर पर निर्वासन की कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने या युद्ध अपराध जैसे दोष, गंभीर किस्म के संगठित अपराध, उग्रवाद या आतंकी कार्रवाई की प्रशंसा करने जैसे मामलों में ही करने की परंपरा रही है।
निचली अदालत ने दे दी थी छूट
आरएसडी ने गृह सचिव के आदेश के खिलाफ निचली अदालत में अपील की थी, जिसमें नागरिकता खत्म करने के लिए गृह विभाग की तरफ से दिए गए तर्क को पर्याप्त नहीं माना गया था। लेकिन आव्रजन व शरण चैंबर के अपर ट्रिब्यूनल ने गृह सचिव के आदेश को सही मानते हुए आरएसडी को तथ्यों के गलत प्रस्तुतिकरण का दोषी माना था। इसके चलते अब आरएसडी का भारत निर्वासित होना तय माना जा रहा है।