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श्रीलंका के 'चीन हितैषी' प्रधानमंत्री के साथ भारत करना चाहता है तुरंत बातचीत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 30 Oct 2018 09:10 AM IST
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महिंदा राजपक्षे
- फोटो : Facebook
श्रीलंका में इस समय राजनीतिक उथल-पुथल चल रही है। वहां के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने अचानक से प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त करके उनकी जगह महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिला दी। भारत अपने पड़ोसी देश की बदलती सियासत पर करीबी से नजर रखे हुए है। अब राजपक्षे के साथ भारत तत्काल राजनयिक और राजनीतिक संपर्क करना चाहता है।
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सोमवार को अधिकारियों ने कहा कि भारत श्रीलंका से तुरंत बातचीत करना चाहता है। महिंदा राजपक्षे को चीनी हितैषी माना जाता है। अपने राष्ट्रपति के पिछले कार्यकाल के दौरान उन्होंने चीन के साथ अपनी दोस्ती को बखूबी निभाया था। जिसके कारण भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। चीन ने एशिया की अपनी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत श्रीलंका में कई बंदरगाह, पावर स्टेशन और हाईवे बनाए हैं।
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राजपक्षे ने राष्ट्रपति रहते हुए श्रीलंका के मुख्य बंदरगाह को चीनी नेवल सबमरीन्स के लिए खोल दिया था। जिसकी वजह से भारत नाराज हो गया था। उनके सत्ता में दोबारा वापस आने से चीन इस द्वीप पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश में है। वहीं भारत चीनी रिश्तों के विशेषज्ञ जवाहर लाल विश्वविद्यालय के श्रीकांत कोंडापल्ली ने कहा, 'यह चीन के लिए लाभ का समय है।'
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कोंडापल्ली ने बताया कि चीन ने राजपक्षे और उनके निर्वाचन क्षेत्र हंबनटोटा में काफी निवेश किया है। दक्षिण श्रीलंका में ड्रैगन ने 1.5 बिलियन डॉलर का डीप वाटर बंदरगाह, हवाई अड्डे का निर्माण किया है। वह यहां एक औद्योगिक क्षेत्र बनाने की योजना बना रहा है। श्रीलंका में स्थित चीन के राजदूत चेंग जुयान पहले राजनयिक थे जिन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद राजपक्षे से मुलाकात की। उन्होंने चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग की तरफ से उन्हें धन्यवाद संदेश भी दिया।
बता दें कि श्रीलंका में बीते शुक्रवार को राजनीतिक उठापटक का दौर शुरू हुआ था। रानिल विक्रमसिंघे को भारत हितैषी माना जाता है। उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा खुद को बर्खास्त करने को असंवैधानिक बताया था और खुद को श्रीलंका का प्रधानमंत्री करार दिया था। संसद ने भी राजपक्षे की बजाए उन्हें पीएम के तौर पर मान्यता दी है।