फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   India and Japan finalise pact for cooperation in 5G tech, AI and critical information infrastructure

5जी, एआई पर साथ काम करेंगे भारत-जापान, आपूर्ति श्रृंखला में तलाशेंगे चीन का विकल्प

Wed, 07 Oct 2020 06:06 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 07 Oct 2020 06:06 PM IST
विज्ञापन
India and Japan finalise pact for cooperation in 5G tech, AI and critical information infrastructure
विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके जापानी समकक्ष तोशीमित्सू मोतेगी - फोटो : पीटीआई

भारत और चीन 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आईटी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। साथ ही सप्लाई चेन में चीन के वर्चस्व का विकल्प तलाशा जाएगा। तोक्यो में क्वाडिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉक (क्वाड) के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक में हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र को दुनिया के सभी देशों के लिए एक समान अवसर वाले क्षेत्र के तौर पर आगे बढ़ाने की रणनीति बनी। साथ ही चारो देशों की अगुवाई में एक नई वैश्विक आपूर्ति शृंखला स्थापित करने पर जोर दिया गया ताकि चीन का वर्चस्व कम कर नया विकल्प तलाशा जा सके। 

विज्ञापन


विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि जापान हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआई) के संपर्क स्तंभ का मुख्य भागीदार बनने पर सहमत हुआ है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी के बीच भारत की इस पहल में सहयोग बढ़ाने का करार हुआ। आईपीओआई भारत समर्थित तंत्र है जिसका उद्देश्य हिंद प्रशांत क्षेत्र में ऐसा सुरक्षित समुद्री क्षेत्र बनाने का प्रयास करना है जिस पर चीन लगातार अपना वर्चस्व कायम करना चाहता है।
विज्ञापन


विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि भारत और जापान तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। दोनों देश तकनीक के महत्व को समझते हुए डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं और इसके लिए पुख्ता इंतजाम करने की दिशा में साथ काम करेंगे। इस क्रम में एक सार्थक साइबर सुरक्षा करार को लिखित रूप दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह संवेदनशील सूचनाओं का बुनियादी ढांचा, 5जी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगा। इसके अलावा दोनों देश समुद्री सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, विनिर्माण, संपर्क और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में साथ काम करेंगे।

हुआवे के वैश्विक विरोध से भारत को तरजीह 
चीनी दिग्गज कंपनी हुआवे के वैश्विक विरोध की पृष्ठभूमि में 5जी को लेकर भारत और जापान के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। अमेरिका समेत कई दिग्गज देशों ने चीनी कंपनी को अपने यहां बंद कर दिया है। जिसके बाद तकनीकी के क्षेत्र में चीनी वर्चस्व डगमगाया है। इस बीच तकनीक की इस महाक्रांति में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका में आगे आया है।

पोम्पियो ने चीन को बताया दुनिया के लिए खतरा

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन को दुनिया की अखंडता के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा, चीन अपनी विस्तारवादी दृष्टिकोण के चलते पड़ोसी मुल्कों की संप्रभुता के लिए खतरा बन गया है। पोम्पियो ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन की करतूत का जिक्र करते हुए कहा, चीन और भारत के बीच हिमालय में जो संघर्ष हुआ वह अलिखित नियमों के मुताबिक किया गया।

ऐसी चीजों पर नियंत्रण होना जरूरी है। चीन की आक्रामकता का जवाब देना होगा। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी की धमकियाें का हममें से उन सभी ने विरोध किया जो मानते हैं कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है। पोम्पियो ने कहा, अब वक्त है कि हम अपने लोगों और भागीदारों को सीसीपी (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना) के शोषण, भ्रष्टाचार और जबरदस्ती से बचाने के लिए सहयोग करें ताकि क्षेत्रीय अखंडता न प्रभावित हो। 

क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी
‘क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान बेहद जरूरी है। हम नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय आदेश को बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कानून, पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय समुद्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए सम्मान और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। - एस जयशंकर, विदेश मंत्री

वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ाएगा ऑस्ट्रेलिया

एस जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि क्वाड सम्मेलन से इतर ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मारिसे पेने से मुलाकात हुई। हमारे बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। ऑस्ट्रेलिया ने तमाम वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही है।

इसके अलावा कोरोना से जंग में भी दोनों देश आपसी सहयोग को बढ़ाएंगे। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बीते कुछ वर्षों में रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में भागीदारी मजबूत हुई है। दोनों देश हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी सैन्य सहयोग बढ़ा रहे हैं।

आगे भी इस दिशा में भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी है। इस वर्ष 4 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मौरिसन के बीच सामरिक साझेदारी बढ़ाने पर हुए करार हुआ था। दोनों देशा उन सहमतियों को लागू करने की दिशा में काम करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed