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वर्ष 2018 में ही अमेरिकी राजनयिकों ने किया था आगाह, वुहान के लैब से फैल सकती है महामारी
Sun, 19 Jul 2020 06:45 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 19 Jul 2020 06:45 AM IST
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- फोटो : pixabay
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अमेरिका ने 2018 में लिखी गई एक आंतरिक पत्र जारी करते हुए कहा है कि हमारे राजनयिकों ने दो साल पूर्व ही आगाह कर दिया था कि चीन के वुहान लैब में गलत तरीके से प्रयोग चल रहे हैं, जिससे सार्स जैसी खतरनाक महामारी फैल सकती है।
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इस पत्र में राजनयिकों ने वुहान के लैब में सुरक्षा मानक को लेकर कई आपत्तियां दर्ज करवाई थीं। पत्र में लिखा गया था कि लैब में चमगादड़ों के साथ प्रयोग चल रहे थे और अगर सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए तो लैब से सार्स जैसी महामारी उत्पन्न हो जाएगी।
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर कहा कि मैं शुरुआत से ही कह रहा हूं कि यह चीन का किया धरा है और अब इस पत्र से यह साबित हो गया है कि इसमें सौ फीसदी चीन का ही हाथ है। इसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि मैं सबूत के साथ कह सकता हूं कि यह महामारी चीन के लैब से ही फैली है।
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वहीं मई में अमेरिकी खुफिया समुदाय ने कहा था कि हम अभी भी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यह महामारी जानवरों के संपर्क के माध्यम से फैली है या वुहान लैब में दुर्घटना का परिणाम था।
हालांकि कोलंबिया विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी के निदेशक इयान लिपकिन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि इस पत्र से यह साबित नहीं होता है कि चीन ने यह जानबूझ के किया या अनजाने में। इसके लिए आपको सबूत देने होंगे।
बता दें कि अमेरिका में बीते 24 घंटे में कोरोना के 78 हजार नए मामले सामने आए वहीं 843 लोगों की मौत भी हो गई। जबकि देश में मृतकों की कुल संख्या 1,42,877 हो गई है। टेक्सास, फ्लोरिडा, एरिज़ोना और अन्य दक्षिण अमेरिकी राज्यों में इस दूसरे चरण में स्थिति और खतरनाक हो गई है।