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यूएनजीए में संबोधन से पहले दिखी इमरान खान की निराशा, कहा- कोई फायदा नहीं होगा
Fri, 27 Sep 2019 11:39 AM IST
Sneha Baluni
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 27 Sep 2019 11:39 AM IST
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इमरान खान (फाइल खान)
- फोटो : Facebook
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संयुक्त राष्ट्र आमसभा (यूएनजीए) में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री इमरान खान का संबोधन होना है। मोदी जहां चौथे नंबर पर बोलेंगे वहीं खान सातवें नंबर पर अपनी बात रखेंगे। इससे पहले खान ने न्यूयॉर्क टाइम्स के संपादक से बातचीत की है। जिसमें उन्होंने कश्मीर राग अलापते हुए कहा है कि वह यहां कश्मीर मसला उठाने के लिए ही आए हैं।
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हालांकि ऐसा लगता है कि उन्होंने संबोधन से पहले ही अपने हथियार डाल दिए हैं। पाक प्रधानमंत्री का कहना है कि वह जानते हैं इसका कोई फायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा, 'लेकिन कम से कम दुनिया जागरुक हो जाएगी क्योंकि मुझे नरसंहार का डर है।'
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खान ने इस बात पर निराशा जताई कि वह संयुक्त राष्ट्र से भारत के कश्मीर को लेकर उठाए गए कदम पर कोई कार्रवाई नहीं करवा पाए। बता दें कि लगभह पूरे अतंरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है।
रिपोर्ट के अनुसार इमरान खान का कहना है कि वह इस बात को लेकर आशान्वित नहीं हैं कि उनके भाषण से कोई फर्क पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'मैं खासतौर से कश्मीर मुद्दे के लिए न्यूयॉर्क आया हूं। उसके अलावा सबकुछ कम महत्व वाला है। दुनिया को इस बात का अहसास नहीं है कि हम एक बड़ी आपदा की ओर बढ़ रहे हैं।'
इससे पहले यूएनजीए के एक सत्र में हिस्सा लेने के बाद इमरान खान ने पत्रकारों से कहा था कि वह सभी अतंरराष्ट्रीय समुदाय से मिल रही निरुत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया से काफी उदासीन हैं। उन्होंने कहा, 'मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निराश हूं। यदि 80 लाख यूरोपियन या क्रिश्चियन या ज्यूज या अमेरिकियों पर पाबंदी लगा दी जाए या आठ अमेरिकियों पर पाबंदी लगा दी जाए तो आप प्रतिक्रिया को देखेंगे।'
उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी पर प्रतिबंध हटाने को लेकर कोई दबाव नहीं है।' खान का कहना है कि नब यूएन से कश्मीर मसले पर हस्तक्षेप करनी की अपील जारी रखेंगे। पाकिस्तान कई मौकों पर कई देशों और यूएन से हस्तक्षेप की गुहार लगा चुका है लेकिन किसी ने भी उसका साथ नहीं दिया।
भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को निष्प्रभावी करना उसका आंतरिक मसला है। खान का कहना है कि दो परमाणु हथियारों वाले देशों के बीच तनाव कम करना यूएन का काम है। उन्होंने कहा, 'यह यूएन की जिम्मेदारी है। उसे वहां परेयवेक्षक भेजने चाहिए।'