कच्चे तेल के संकट से निपटने के लिए सऊदी अरब उठाएगा कड़े कदम, पढ़ें पूरी खबर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सऊदी अरब ने सस्ते तेल के संकट से निपटने के लिए कठोर नियम लागू करने का एलान किया है, जिसमें टैक्स बढ़ाने के साथ साथ कई खर्चों में कटौती शामिल है। सरकारी मीडिया का कहना है कि इस फैसले से सरकारी तिजोरी में 100 बिलियन रियाल यानि कि करीब 27 बिलियन डॉलर का बचत होगी।
संकट को दूर करने के लिए सऊदी अरब ने कई कड़े नियम लागू करने की बात कही है। हालांकि इन नियमों से वहां की जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ जाए लेकिन सरकार की बचत हो जाएगी। सऊदी अरब की सरकार की ओर से उठाए गए कड़े नियमों क्या क्या शामिल है आइए आपको बताते हैं...
- जून से आम जनता के जीवन भत्ते की लागत को रद्द करने का फैसला, इस भत्ते की राशि 100 रियाल होगी
- जुलाई से वैल्यू एडेड टैक्स को पांच फीसद से बढ़ाकर 15 फीसद करने का फैसला
- कुछ सरकारी एजेंसियों के लिए व्ययों को रद्द करना, बढ़ाना और विलंब कर देने का फैसला
- क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के 'विजन 2030' के तहत कुछ प्रोजेक्ट्स के व्ययों में कटौती
सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में अकेले कच्चा तेल ही 70 फीसद का योगदान करता है लेकिन कोरोना महामारी की वजह से तेल की मांग में काफी कमी आ गई जिससे तेल के दाम भी गिर गए। इस समय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के दाम 30 डॉलर प्रति बैरल है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक सऊदी अरब को कच्चा तेल 76 डॉलर प्रति बैरल की दर से बेचने की जरूरत है। सऊदी अरब का ऑयल रेवेन्यू साल के शुरू के तीन महीने में 24 फीसद तक गिर चुका है। आईएमएफ ने इस साल सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था का 2.3 फीसद तक रहना का अनुमान लगाया है।
यही नहीं सऊदी का वित्तीय घाटा भी साल की शुरुआती तीन महीनों में बढ़कर 9 डॉलर बिलियन हो गया है। मार्च में सऊदी के केंद्रीय बैंक की कुल विदेशी संपत्ति की वैल्यू 27 बिलियन डॉलर गिर गई है जो कि पिछले 20 सालों में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है।
हालांकि ये कटौतियां 500 बिलियन डॉलर की मेगा सिटी नीओम को संदेह के घेरे में रखते हैं। नीओम अत्याधुनिक शहर बनने जा रहा है जो 10,000 स्कैवर मील में बनेगा, जो आधुनिक तकनीकी, मनोरंजन, सिलिकॉन वैली और हॉलीवुड का हब होगी।