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पाकिस्तान: मंदिर विध्वंस मामले में 30 गिरफ्तार, सरकार ने दिया दोबारा निर्माण का आदेश

Thu, 31 Dec 2020 09:04 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 31 Dec 2020 09:04 PM IST
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Hindu Temple destroyed in Khyber Pakhtunkhwa Pakistan news in Hindi
मंदिर में तोड़-फोड़ करती भीड़ - फोटो : एएनआई

पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बुधवार को सौ लोगों से अधिक की भीड़ ने एक हिंदू मंदिर में तोड़-फोड़ कर दी और आग लगा दी। घटना करक जिले के टेरी गांव की है जहां स्थानीय मौलवियों की अगुवाई में भीड़ ने मंदिर को नष्ट कर दिया। अब इस मामले में कट्टरपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी के नेता रहमत सलाम खट्टक समेत 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

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जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी (फजल उर रहमान समूह) के समर्थकों के नेतृत्व वाली  भीड़ ने मंदिर के विस्तार कार्य का विरोध किया और मंदिर के पुराने ढांचे के साथ साथ नए निर्माण को भी ध्वस्त कर दिया। इस घटना की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है। इस वीडियो क्लिप में हिंसक भीड़ को मंदिर की दीवारें और छत को नष्ट करते देखा जा सकता है। पाकिस्तान और दुनिया के बाकी हिस्सों में रहने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ इस कदम की निंदा की है। 
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स्थानीय पुलिस के अनुसार इस घटना के सिलसिले में कट्टरपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी के नेता रहमत सलाम खट्टक समेत 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रांतीय पुलिस प्रमुख केपीके सनाउल्लाह अब्बासी ने कहा कि प्राथमिकी में 350 से अधिक लोगों का नामजद किया गया है। अब्बासी ने कहा कि आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी में आतंकवाद से संबंधित कानून की सभी धाराओं को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रांत में अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
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उच्चतम न्यायालय ने अधिकारियों को बुलाया
इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को हमले का संज्ञान लिया और स्थानीय अधिकारियों को पांच जनवरी को पेश होने का आदेश दिया। हिंदू सांसद और पाकिस्तान हिंदू परिषद के प्रमुख रमेश कुमार वांकवानी ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए कराची में प्रधान न्यायाधीश गुलजार अहमद से मुलाकात की। बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश ने दुखद घटना पर गंभीर चिंता जताई और संसद सदस्य को सूचित किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले ही संज्ञान लिया है और पांच जनवरी के लिए मामले को सूचीबद्ध किया है।

घटना पर कुछ इस तरह दी लोगों ने प्रतिक्रिया

कराची के एक पत्रकार मुबाशिर जैदी ने ट्वीट किया, 'स्थानीय मौलवियों की अगुवाई में भीड़ ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में एक हिंदू मंदिर को नष्ट कर दिया। हिंदुओं ने मंदिर को बढ़ाने के लिए प्रशासन से अनुमति ली थी लेकिन मौलवियों ने भीड़ जमाकर मंदिर को नष्ट कर दिया। पुलिस-प्रशासन मूक दर्शक बने रहे।'
 



लंदन की मानवाधिकार कार्यकर्ता शमा जुनेजो ने ट्वीट किया, 'यह नया पाकिस्तान है! पीटीआई सरकार के शासन में खैबर पख्तूनख्वा के शहर करक में हिंदू मंदिर को नष्ट कर दिया गया। पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश नहीं की क्योंकि वह 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगा रहे थे। एक शर्मनाक दिन, जो निंदा से भी परे है।
 


डेली टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की एक सुन्नी देवबंदी राजनीतिक दल जमीयत उलेमा-ए इस्लाम-फज्ल ने मंदिर के पास एक रैली का आयोजन किया था। जहां आक्रामक भाषण दिए गए और जिसके बाद आक्रोशित भीड़ मंदिर की ओर बढ़ चली जहां, मंदिर में जमकर तोड़-फोड़ की गई और आग लगा दी गई। 

'पाक सरकार को बदनाम करने की साजिश...'

पाकिस्तान के मानवाधिकारों के लिए संघीय संसदीय सचिव लालचंद मल्ही ने इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए ऐसी असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कुछ समूह सक्रिय हैं, जिन्हें सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है। खान ने पूजा स्थलों की इस प्रकार की घटनाओं से रक्षा किए जाने का संकल्प लिया।

हिंदू समुदाय पेशावर के नेता हारून सरब दियाल ने कहा कि इमरान खान धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करते हैं लेकिन पाकिस्तान में ही अल्पसंख्यकों के पूजा स्थल महफूज नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'इस्लामी विचारधारा परिषद को इस घटना का संज्ञान लेना चाहिए।' एक आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 75 लाख हिंदू रहते हैं। हालांकि समुदाय के मुताबिक, देश में हिंदुओं की आबादी 90 लाख से ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि हिंदू समुदाय पाकिस्तान का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक तबका है।

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