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Lancet Report: गर्मी से जुड़ी मौतों में 68 फीसदी बढ़ोतरी, कहीं बाढ़ तो कहीं जंगल की आग से तबाही

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला , लंदन Published by: Amit Mandal Updated Wed, 26 Oct 2022 06:52 PM IST
सार

ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, मलेशिया, पाकिस्तान और अन्य देशों में बाढ़ से हजारों लोगों की मौत हुई है, सैकड़ों हजारों लोग विस्थापित हुए हैं और अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है।

गर्मी से संबंधित मौतों में 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी
गर्मी से संबंधित मौतों में 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, 2000-2004 और 2017-2021 के बीच गर्मी से संबंधित मौतों में 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कमजोर आबादी-बुजुर्ग और एक वर्ष से कम उम्र के बच्चे 1986-2005 में सालाना की तुलना में 2021 में 3.7 बिलियन अधिक गर्मी के दिनों का सामना किया था। लैंसेट काउंटडाउन की रिपोर्ट कोविड-19 महामारी के स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं, वैश्विक ऊर्जा और रूस-यूक्रेन संघर्ष से पैदा हुए संकट के बीच जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य प्रभावों और जीवाश्म ईंधन पर लगातार निर्भरता पर केंद्रित है। 



कहीं बाढ़ तो कहीं जंगल की आग से तबाही 
ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, मलेशिया, पाकिस्तान और अन्य देशों में बाढ़ से हजारों लोगों की मौत हुई है, सैकड़ों हजारों लोग विस्थापित हुए हैं और अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। जंगल की आग ने ग्रीस, अल्जीरिया, इटली, स्पेन जैसे देशों में तबाही मचाई है। रिपोर्ट के अनुसार कई देशों में रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चरम मौसम की घटनाओं ने 2021 में 253 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है विशेष रूप से निम्न मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) देशों में लोगों पर भारी बोझ आया है जिनमें से किसी का भी बीमा नहीं था। 


जलवायु परिवर्तन से खाद्य सुरक्षा प्रभावित हुई क्योंकि उच्च तापमान ने फसल की पैदावार के लिए सीधे तौर पर खतरा पैदा कर दिया, क्योंकि वैश्विक स्तर पर   1981-2010 की तुलना में 2020 में मक्का उत्पादन में औसतन नौ दिन कम और सर्दियों के गेहूं और वसंत के गेहूं के तैयार होने में छह दिन की कमी आई है। स्वास्थ्य प्रणालियां ऐसे वातावरण में रक्षा की पहली पंक्ति हैं जहां जलवायु परिवर्तन के कारण स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।  हालांकि, जैसे-जैसे स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता बढ़ रही है, महामारी और जीवन-यापन के संकटों के प्रभाव से स्वास्थ्य प्रणालियां कमजोर होती जा रही हैं।

जलवायु संकट रोकने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली के लचीलेपन को मजबूत करना होगा
इसलिए, तेजी से बढ़ते नुकसान को रोकने और जलवायु संकट को रोकने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली के लचीलेपन को मजबूत करने के लिए तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है। 2022 में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) पर हस्ताक्षर करने की 30वीं वर्षगांठ को चिह्नित करते हुए देश खतरनाक मानवजनित जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य और कल्याण पर इसके हानिकारक प्रभावों को रोकने के लिए सहमत हुए। हालांकि, लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार इसका पालन बहुत कम सार्थक कार्रवाई के साथ किया गया है।

जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता न केवल जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य को कमजोर करती है, बल्कि अस्थिर और अप्रत्याशित जीवाश्म ईंधन बाजारों, कमजोर आपूर्ति श्रृंखलाओं और भू-राजनीतिक संघर्षों के माध्यम से मानव स्वास्थ्य और भलाई को सीधे प्रभावित करती है। कम एचडीआई देशों में, जहां बिजली का केवल 1.4 प्रतिशत आधुनिक नवीकरणीय ऊर्जा से आता है, यानी पवन और सौर ऊर्जा से बिजली मिलती है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अनुमानित 59 प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्रों में अभी भी विश्वसनीय बिजली आपूर्ति नहीं है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी ओर तेल और गैस कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज कर रही हैं, भले ही उनकी उत्पादन रणनीतियां लोगों के जीवन और भलाई को कमजोर कर रही हों। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीजों को और भी बदतर बनाते हुए सरकारें जीवाश्म ईंधन उत्पादन और खपत को प्रोत्साहित करना जारी रखे हुए हैं।

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