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अमेरिका और पश्चिमी ताकतों को झटका, इराक चुनाव में शिया नेता अल-सद्र जीते
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, बगदाद
Updated Sun, 20 May 2018 12:14 AM IST
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इराक के कद्दावर नेता और शिया मौलवी मुक्तदा अल-सद्र के नेतृत्व वाले गठबंधन ने चुनाव जीत लिया है। यद्यपि उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, लेकिन इस जीत को अमेरिका और पश्चिमी ताकतों के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इन देशों ने इन चुनावों में शुरू से हैदर अल-अबादी को समर्थन दिया है। दूसरी तरफ अल-सद्र अपने देश में शिया बहुल ईरान के दखल के खिलाफ भी रहे हैं। हालांकि सद्र खुद देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं क्योंकि वह प्रत्याशी के बतौर चुनाव में खड़े नहीं हुए हैं।
मौलवी मुक्तदा को नहीं मिला पूर्ण बहुमत, मौजूदा पीएम को मिला तीसरा स्थान
शनिवार को इराक के राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के सभी घोषित परिणामों के मुताबिक शिया नेता के राजनीतिक गठबंधन ने सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं। चुनाव आयोग द्वारा घोषित अंतिम नतीजों के मुताबिक मुक्तदा अल-सद्र के गठबंधन को 54 सीटें मिली हैं और मौजूदा प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी 42 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे हैं। 47 सीटों के सात दूसरा स्थान ईरान समर्थित गठबंधन फतेह को मिला। अमेरिका विरोधी सद्र की भूमिका नई इराक सरकार में होना तय है लेकिन वह पीएम नहीं बन सकेंगे क्योंकि उन्होंने प्रत्याशी के रूप में चुनाव नहीं लड़ा है।
90 दिनों में नई सरकार नहीं बनीं तो निराश प्रदर्शन के बावजूद अबादी बने रहेंगे पीएम
सद्र के गठबंधन को बहुमत हासिल नहीं होने के चलते फिलहाल सत्ता की दौड़ में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। किसी भी गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के चलते देश में गठबंधन सरकार की संभावनाएं ही बनती दिख रही हैं। शिया नेता और मौलवी मुक्तदा अल-सद्र ने खुद को इस चुनाव में पीएम की दौड़ से बाहर रखा है इसलिए किंगमेकर में उनकी भूमिका सबसे अहम होगी। लेकिन यदि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया 90 दिन में पूरी नहीं हुई तो निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद हैदर अल-अबादी पीएम बन सकते हैं।
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आतंकियों से रिश्तों के चलते अमेरिका विरोधी रहे हैं अल-सद्र
इराक में शिया धर्मगुरु और नेता बनकर उभरने वाले मुक्तदा अल-सद्र के रिश्ते शुरुआत में यहां के आतंकी संगठनों से रह चुके हैं। अमेरिकी हमले के बाद से ही मुक्तदा अल-सद्र के संगठन ने अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया है। इराक में 2003 में अमेरिका के आक्रमण और तत्कालीन तानाशाह सद्दाम हुसैन के अपदस्थ होने और मारे जाने के बाद से ही सद्र के उग्रवादी संगठन ने इराक में पैर जमाने शुरू कर दिए। लेकिन बाद में उन्होंने गरीबों के मसीहा और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में खुद की पहचान बनाई जिसका असर चुनाव परिणामों में दिखाई दे रहा है।
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मौलवी मुक्तदा को नहीं मिला पूर्ण बहुमत, मौजूदा पीएम को मिला तीसरा स्थान
शनिवार को इराक के राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के सभी घोषित परिणामों के मुताबिक शिया नेता के राजनीतिक गठबंधन ने सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं। चुनाव आयोग द्वारा घोषित अंतिम नतीजों के मुताबिक मुक्तदा अल-सद्र के गठबंधन को 54 सीटें मिली हैं और मौजूदा प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी 42 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे हैं। 47 सीटों के सात दूसरा स्थान ईरान समर्थित गठबंधन फतेह को मिला। अमेरिका विरोधी सद्र की भूमिका नई इराक सरकार में होना तय है लेकिन वह पीएम नहीं बन सकेंगे क्योंकि उन्होंने प्रत्याशी के रूप में चुनाव नहीं लड़ा है।
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90 दिनों में नई सरकार नहीं बनीं तो निराश प्रदर्शन के बावजूद अबादी बने रहेंगे पीएम
सद्र के गठबंधन को बहुमत हासिल नहीं होने के चलते फिलहाल सत्ता की दौड़ में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। किसी भी गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के चलते देश में गठबंधन सरकार की संभावनाएं ही बनती दिख रही हैं। शिया नेता और मौलवी मुक्तदा अल-सद्र ने खुद को इस चुनाव में पीएम की दौड़ से बाहर रखा है इसलिए किंगमेकर में उनकी भूमिका सबसे अहम होगी। लेकिन यदि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया 90 दिन में पूरी नहीं हुई तो निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद हैदर अल-अबादी पीएम बन सकते हैं।
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आतंकियों से रिश्तों के चलते अमेरिका विरोधी रहे हैं अल-सद्र
इराक में शिया धर्मगुरु और नेता बनकर उभरने वाले मुक्तदा अल-सद्र के रिश्ते शुरुआत में यहां के आतंकी संगठनों से रह चुके हैं। अमेरिकी हमले के बाद से ही मुक्तदा अल-सद्र के संगठन ने अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया है। इराक में 2003 में अमेरिका के आक्रमण और तत्कालीन तानाशाह सद्दाम हुसैन के अपदस्थ होने और मारे जाने के बाद से ही सद्र के उग्रवादी संगठन ने इराक में पैर जमाने शुरू कर दिए। लेकिन बाद में उन्होंने गरीबों के मसीहा और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में खुद की पहचान बनाई जिसका असर चुनाव परिणामों में दिखाई दे रहा है।