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अरब के शाही शासन की पहली स्वीकारोक्ति, हमारे दूतावास में ही मारे गए खशोगी 

Sun, 21 Oct 2018 05:31 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, रियाद
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, रियाद Updated Sun, 21 Oct 2018 05:31 AM IST
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The first admission of imperial rule KHASHOGGI killed in embassy
salman and Khashoggi

सऊदी अरब की सरकार ने शनिवार को पहली बार स्वीकार किया कि इस्तांबुल स्थित उसके दूतावास में एक पूछताछ के दौरान हुई झड़प में पत्रकार जमाल खशोगी की मौत हो गई। इससे पहले सऊदी अरब में पत्रकार की मौत पर बनाए जा रहे दस्तावेजों में इस तरह की बात शामिल करने का कुछ अधिकारी खुलासा भी कर चुके हैं। अब सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट में इसकी पुष्टि कर दी है।

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चौतरफा दबाव और दो सप्ताह तक इनकार के बाद सऊदी अरब ने पहली बार आधिकारिक रूप से सऊदी मूल के लापता अमेरिकी पत्रकार जमाल खशोगी की मौत को स्वीकार किया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, ‘सरकार की शुरुआती जांच के मुताबिक दूतावास में खशोगी से पूछताछ की गई थी। उस दौरान मारपीट में पत्रकार मारा गया।’ हालांकि, अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अभी जांच जारी है और इस मामले में सऊदी अरब के 18 लोगों को हिरासत में लिया गया है। साथ ही खुफिया उप प्रमुख अहमद अल असीरी और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के कानूनी सलाकार अल कथानी को भी बर्खास्त कर दिया गया है।
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इस बीच व्हाइट हाउस ने कहा है कि वह इस पूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय जाचकर्ताओं पर करीबी नजर बनाए हुए है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि जो लोग भी इस हत्या में जिम्मेदार हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। बता दें कि अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट में सऊदी अरब सरकार के खिलाफ लिखने वाले पत्रकार जमाल खशोगी तुर्की में अपनी मंगेतर हेटिस सेंगीज से निकाह करना चाहते थे। इसकी मंजूरी के लिए वे दो अक्तूबर को दस्तावेज लेने इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के दूतावास गए थे जहां से वे वापस नहीं लौटे। 
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लगातार इनकार के बाद इसलिए झुका सऊदी अरब

दो अक्तूबर को तुर्की स्थित सऊदी अरब दूतावास में पत्रकार की एक झड़प में मौत को पहली बार सऊदी अरब सरकार ने स्वीकार किया है जबकि वह पिछले 17 दिन से अपने बयान पर कायम था कि खशोगी दूतावास से वापस चले गए थे। इस मामले में तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोवान का दबाव सबसे अधिक प्रभावी रहा, क्योंकि वे शुरू से अपनी बात पर अड़े रहे कि पत्रकार की हत्या हुई है। इसी कारण फ्रांस समेत कई देशों ने सऊदी अरब में हो रहे निवेश सम्मेलन में जाने से हाथ खींच लिए। अमेरिका को मजबूरी में मित्रता के बावजूद सऊदी अरब पर अपने लापता नागरिक के लिए दबाव बनाना पड़ा।

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