कच्चे तेल को लेकर सऊदी अरब और ईरान में छिड़ी 'जंग'
सऊदी अरब ने ईरान के कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाए जाने को लेकर ओपेक (ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) देशों की बैठक में यह मुद्दा उठाया। साथ ही कच्चे तेल के लिए बनी प्रोडक्शन पॉलिसी को लेकर भी दोनों देशों में ठनती जा रही है।
ओपेक देशों की बैठकों में भी पहले भी ईरान और सऊदी अरब के बीच इन मुद्दों पर आपसी सहमति नहीं बन पाई है। पिछले साल दिसंबर, 2015 में कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर जब यह समूह अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया था तब भी दोनों देशों के बीच तनाव सामने आया था।
ओेपेक सूत्रों के मुताबिक सऊदी अरब और कुछ खाड़ी देश ने यह प्रस्ताव देंगे कि कच्चे तेल की कीमतों को सामान्य स्तर लाने के लिए निवेश को कम किया जाए।
सऊदी अरब का यह प्रस्ताव फेल हो जाएगा यह जानकार उसने अपने विरोधियों से बदला लेने के पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर तेल का उत्पादन किया जिससे मार्केट की अन्य हिस्सेदारी पर कब्जा किया जा सके।
कौन सा देश ज्यादा तेल का उत्पादन कर रहा
सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद अल-फतह ने कहा कि तेल उत्पादन को लेकर हम सही तरीका अपना रहे हैं और हम बाजार को कोई शॉक नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि हम ईरान को बातचीत के लिए राजी कर और उसे वार्ता की टेबल पर लाने की कोशिश करेंगे, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
अगर रियाद और तेहरान के बीच कोई समझौता होता है बाजार के लिए यह एक आश्चर्यजनक बात होगी। आपको बताते चले कि पिछले दो सालों से यमन और सीरिया के बीच छ्दम युद्ध के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
सऊदी अरब ने अप्रैल में अपने तेल उत्पादन को कम किया जिससे तेल बाजार में संतुलन बनाया जा सके। सऊदी अरब ने यहां तक कह दिया है कि वो इस डील का भाग बन सकता है। अगर इस डील में ईरान भी शामिल हो जाए।
ओपेक देशों में ईरान ही एक ऐसा देश है कि जिसने ओपेक सदस्यों की परवाह किए बगैर ही अपने तेल उत्पादन को जारी रखा जबकि अन्य सदस्य देशों ने कच्चे तेल का उत्पादन बंद कर दिया था।
ईरान ने इसके लिए तर्क दिया था कि हमारे ऊपर से अभी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध हटे हैं। इसलिए हम तेल का उत्पादन जारी रखने की अनुमति देनी चाहिए। ईरान के तेल मंत्री बिजान जांगनेश ने कहा कि वो किसी नई तेल उत्पादन पॉलिसी पर बहस नहीं करना चाहते हैं। बल्कि बहस इस बात पर करना चाहते हैं कि कौन सा देश ज्यादा तेल का उत्पादन कर रहा है।