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सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला कार्यकर्ता का सिर कलम करने की तैयारी, पहली बार होगा ऐसा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 23 Aug 2018 06:18 AM IST
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दिसंबर 2015 को सऊदी अरब के पूर्वी कातिफ प्रांत में सरकार विरोधी भूमिका निभाने वाली एक्टिविस्ट इसरा अल-गोमघम (29) की गिरफ्तारी के बाद अब उसे मृत्युदंड देने की तैयारी की जा रही है।
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सऊदी अरब में किसी महिला को पहली बार मृत्युदंड के बतौर सिर कलम करने की सजा भी दी जा सकती है। मानवाधिकार कार्यकर्ता इसरा को जीवनदान के लिए अभियान चला रहे हैं।
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इसरा को उसके पति मूसा अल-हाशिम के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसी माह रियाद की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इसरा और पांच अन्य अभियुक्तों को देश के आतंक विरोधी कानून के तहत सिर कलम करने की मांग रखी थी।
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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है जिस पर अक्तूबर में फैसला लिया जाएगा। यदि इसके बावजूद मौत की सजा रोकी नहीं गई तो इसे किंग सलमान के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जो आमतौर पर मृत्युदंड को रोकते नहीं हैं।
महिला कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर कनाडा के साथ पहले ही सऊदी अरब के रिश्तों में तनाव आ चुका है। जर्मनी स्थित यूरोपीय सऊदी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स के निदेशक अली अदुबिसी ने कहा कि महिला एक्टिविस्ट गोमघम को न सिर्फ पिछले तीन साल से कैद रखा गया है बल्कि उन्हें अपने बचाव में वकील तक करने का अधिकार नहीं मिला है जो गलत नजीर है।
शिया विरोधी सरकार का भेदभाव खत्म करने का बीड़ा उठाया
इसरा अल-गोमघम एक जानी मानी एक्टिविस्ट हैं। उन्हें राजनीतिक कैदियों की रिहाई और शिया विरोधी सरकार के भेदभाव को खत्म करने की मांग के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया था।
शियाओं के साथ सऊदी अरब में किस तरह से बुरा बर्ताव किया जा रहा है और न्याय तक नहीं मिल पाता है, इस बात को गोमघम ने शिद्दत से उठाया था। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने उन्हें दी जाने वाली सजा पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं दी है।
संयुक्त राष्ट्र भी कर चुका है आलोचना
गोमघम के मामले में पिछले कुछेक सप्ताह के दौरान चर्चा तब तेज हुई जब अरबी मीडिया और सोशल मीडिया नेटवर्कों पर उनकी मौत की सजा की खबरें शेयर हुईं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में सऊदी अरब में इसी साल मई से महिला कार्यकर्ताओं पर हो रही कार्रवाई की आलोचना की गई थी, जिसके तहत दर्जन भर लोगों को बिना किसी आरोप हिरासत में ले लिया गया।
शियाओं के साथ सऊदी अरब में किस तरह से बुरा बर्ताव किया जा रहा है और न्याय तक नहीं मिल पाता है, इस बात को गोमघम ने शिद्दत से उठाया था। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने उन्हें दी जाने वाली सजा पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं दी है।
संयुक्त राष्ट्र भी कर चुका है आलोचना
गोमघम के मामले में पिछले कुछेक सप्ताह के दौरान चर्चा तब तेज हुई जब अरबी मीडिया और सोशल मीडिया नेटवर्कों पर उनकी मौत की सजा की खबरें शेयर हुईं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में सऊदी अरब में इसी साल मई से महिला कार्यकर्ताओं पर हो रही कार्रवाई की आलोचना की गई थी, जिसके तहत दर्जन भर लोगों को बिना किसी आरोप हिरासत में ले लिया गया।