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सऊदी अरब पर राजनीतिक बंदियों की रिहाई का दबाव!
बीबीसी हिंदी
Updated Thu, 04 Jan 2018 12:48 PM IST
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने सऊदी अरब से दर्जनों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई की अपील की है। इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को सऊदी अरब ने सितंबर से ही कैद कर रखा है। यूएनएचआरसी के पांच स्वतंत्र विशेषज्ञों ने एक संयुक्त बयान में कहा, 60 से ज्यादा मौलवियों, शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं को जेल में रखा गया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बयान में धार्मिक उपदेशक सलमान अल-औदा, लेखक अब्दुल्लाह अल-मलकी और सऊदी सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य इस्सा अल-हामिद की गिरफ्तारी पर भी रोशनी डाली गई है।
सऊदी अरब की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बयान पर कोई फौरी प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि वो हमेशा से राजनीतिक बंदियों के वजूद को नकारता रहा है।
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दूसरी तरफ़ सऊदी सरकार के आला अधिकारियों का कहना है कि सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के लिए निगरानी ज़रूरी है। जानकार कहते हैं कि इन लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपने नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के इस्तेमाल की वजह से हिरासत में लिया गया था।
मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी इनकी हिरासत का विरोध किया था। लेकिन ऐसा बहुत कम देखा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने सऊदी अरब की आलोचना की हो।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने कहा, "सऊदी सल्तनत के नए क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सत्ता में आने के बाद एकतरफा और सुनियोजित तरीके से गिरफ्तारियों का सिलसिला चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।" हालांकि इस बयान में उन दो सौ सऊदी शहज़ादों, कारोबारियों और मंत्रियों का जिक्र नहीं किया गया है, जिन्हें नवंबर में गिरफ्तार किया गया था।
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बयान में धार्मिक उपदेशक सलमान अल-औदा, लेखक अब्दुल्लाह अल-मलकी और सऊदी सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य इस्सा अल-हामिद की गिरफ्तारी पर भी रोशनी डाली गई है।
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सऊदी अरब की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बयान पर कोई फौरी प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि वो हमेशा से राजनीतिक बंदियों के वजूद को नकारता रहा है।
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दूसरी तरफ़ सऊदी सरकार के आला अधिकारियों का कहना है कि सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के लिए निगरानी ज़रूरी है। जानकार कहते हैं कि इन लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपने नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के इस्तेमाल की वजह से हिरासत में लिया गया था।
मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी इनकी हिरासत का विरोध किया था। लेकिन ऐसा बहुत कम देखा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने सऊदी अरब की आलोचना की हो।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने कहा, "सऊदी सल्तनत के नए क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सत्ता में आने के बाद एकतरफा और सुनियोजित तरीके से गिरफ्तारियों का सिलसिला चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।" हालांकि इस बयान में उन दो सौ सऊदी शहज़ादों, कारोबारियों और मंत्रियों का जिक्र नहीं किया गया है, जिन्हें नवंबर में गिरफ्तार किया गया था।