केवल जमाल खशोगी ही नहीं सऊदी शाह ने अपने तीन राजकुमारों को भी कराया था लापता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेरिका के अखबार वाशिंगटन पोस्ट के लिए पत्रकार जमाल खशोगी लेख लिखा करते थे। उनकी पिछले दिनों तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब दूतावास में हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने सऊदी की सत्ता पर काबिज राजघराने के एक काले पक्ष को दुनिया के सामने ला दिया है। खशोगी की हत्या इसलिए भी चर्चा का विषय बनी है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर और प्रिंस के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। यह ममाला अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए एक बड़ा आघात है।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद से सऊदी अरब अमेरिका का घनिष्ठ साझेदार रहा है। वहीं प्रिंस मोहम्मद को एक बडडे समाज सुधारक के तौर पर महिमामंडित किया जाता है। लेकिन जैसा कि शखोगी कहते थे वह अपने आलोचकों को निपटाने में जुटे हुए हैं। तुर्की चाहता तो सऊदी अधिकारियों को अपने देश से निकलने की इजाजत नहीं देता। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया जिससे लगता है कि दोनों के बीच कोई खिचड़ी पक रही है।
पिछले साल मोहम्मद बिन सलमान बने थे क्राउन प्रिंस
सऊदी अरब के किंग सलमान ने जून 2017 में अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बनाया था। 33 साल के सलमान खशोगी हत्या के कारण सवालों के घेरे में हैं। किंग सलमान की उम्र 82 साल है और वह 2015 में अपने भाई अब्दुल्लाह बिन अजीज के निधन के बाद राजा बने थे। अबतक तीन राजकुमारों को किया जा चुका है लापता।
1. प्रिंस सुल्तान बिन तुर्की- 2003 में अपने चाचा शाह सलमान बिन अब्दुल्लाअजीज अल सऊद से बगावत करके प्रिंस सुल्तान बिन तुर्की पहले स्विट्जरलैंड और फिर पेरिस में रहने लगे थे। वह काफी लंबे समय तक सऊदी के हुक्मरानों की जद से बाहर थे। उनके दोस्तों ने आखिरी बार उन्हें 2016 में देखा था। फरवरी में वह अपने बीमार पिता से मिलने के लिए पेरिस से काहिरा के लिए रवाना हुए थे। हालांकि उनका विमान मिस्र की राजधानी की बजाए रियाद में उतरा। उन्हें घसीटते हुए प्लेन से बाहर निकाला गया। इसके बाद किसी ने उन्हें नहीं देखा। पहले भी उनके अपहरण की कोशिश हुई थी जो नाकाम रही थी।
2. प्रिंस तुर्की बिन बंदार- 2015 में सऊदी अरब के राजघराने से प्रिंस तुर्की बिन बंदार लापता हो गए थे। वह सऊदी पुलिस के प्रमुख थे। शाही परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। संपत्ति और अधिकारों को लेकर उनके सत्तापक्ष से रिश्ते बिगड़ गए थे। वह कुछ वक्त तक कैद में रहे। 2012 में कैद से आजादी मिलने पर वह पेरिस में शरण लेकर रहने लगे। यहां से उन्होंने वीडियो पोस्ट करके सऊदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्हें समझौते के बहाने कई बार देश वापस बुलाया गया लेकिन वह नहीं गए। उन्हें फ्रांस से मोरक्को जाते समय गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उनकी कोई जानकारी नहीं है।
3. प्रिंस सऊद बिन सैफ अल नस्र- रुतबे के लिहाज से वह सऊदी राजघराने में निचले पायदान पर आते थे। 2014 में उन्होंने ट्विटर के जरिए सऊदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। इटली के मिलान शहर में उनका ठिकाना था। कसिनो और लग्जरी होटलों के शौकीन नस्र के समर्थकों ने सत्ता पर काबिज शाह को उखाड़ने के लिए बड़े विरोध प्रदर्शन की अपील की थी। उन्हें एक रूसी कंपनी ने बिजनेस डील का प्रस्ताव दिया। रोम में होने वाली इस डील के लिए कंपनी ने उनके लिए एक विमान भेजा। विमान मिलान से रवाना तो हुआ लेकिन रोम नहीं बल्कि रियाद में उतरा। इसके बाद नस्र कहां गए यह आज तक एक रहस्य बना हुआ है।
4. खालेद बिन फरहान अल सऊद- खालेद साल 2004 में सऊदी अरब से भागकर जर्मनी चले गए थे। आज भी सऊदी सरकार उन्हें देश वापस लाने की कोशिश कर रही है। उनके लिए कई बार जाल बिछाया गया लेकिन खुशकिस्मती से वह उसमें नहीं फंसे इसलिए अबतक बचे हुए हैं। खालेद के अनुसार सऊदी एजेंटों ने उनके रिश्तेदारों के जरिए एक बहुत बड़ी रकम का प्रस्ताव दिया था और काहिरा स्थित सऊदी दूतावास बुलाया था। लेकिन वह पैसे लेने के लिए नहीं गए। खालेद के मुताबिक सऊदी सरकार अपने खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी शख्स को नहीं छोड़ती है।