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दुनियाभर से अरब आए 20 लाख से ज्यादा मुसलमानों ने हज यात्रा शुरू की
एपी, मक्का
Updated Sun, 19 Aug 2018 06:40 PM IST
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भारत समेत दुनिया भर के 20 लाख से ज्यादा मुसलमानों ने सऊदी अरब के मक्का में मुकद्दस काबा के तवाफ के साथ आज सालाना हज यात्रा शुरू की। काबा अल्लाह के घर और वहदत (एक खुदा) का एक रूपक है। इसी लिए मुसलमान काबा की ओर मुंह करके दिन में पांचों वक्त की नमाज अदा करते हैं। सऊदी अरब में हज के दौरान दुनिया भर से मुसलमान आते हैं। जिदंगी में एक बार हज करना माली और जिस्मानी तौर पर सक्षम मुसलमान के लिए जरूरी है।
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हज मुसलमानों को अल्लाह से नजदीकतर होने का अहसास कराता है। इस बार का हज ऐसे वक्त में शुरू हो रहा है जब मुस्लिम जगत पश्चिम एशिया में हिंसा के खतरे, चरमपंथ और म्यांमा में रोहिंग्या मुसलमानों के संकट समेत कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। मिस्र से आए हज यात्री एस्साम-एद्दीन अफीफी ने कहा, ‘‘ अल्लाह का बहुत बहुत करम है कि हम इस जगह पर हैं। हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि पश्चिम से पूर्व तक के इस्लामी राष्ट्रों के हालात बेहतर बनाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हम दुआ करते हैं कि इस्लामी मुल्क अपने दुश्मनों पर फतह हासिल करें।’’
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मुसलमानों का मानना है कि हज करना, पैगंबर मोहम्मद और साथ ही पैगंबर इब्राहीम और पैगंबर इस्माईल (बाइबल में अब्राहम और इश्माइल) का अनुसरण है। मुसलमानों का विश्वास है कि अल्लाह ने पैगंबर इब्राहीम को अपने बेटे इस्माईल की कुर्बानी का हुक्म दिया था लेकिन जब वह उनकी कुर्बानी देने जा रहे थे तब उनका हाथ रोक दिया था। इस बारे में ईसाइयों और यहूदियों का मानना है कि पैगंबर इब्राहीम को अपने दूसरे बेटे पैगंबर इसहाक की कुर्बानी देने का हुक्म दिया था।
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मक्का जाने से पहले बहुत से हज यात्री मदीना जाते हैं कि जहां पर इस्लाम के आखिरी पैगंबर मोहम्मद का रौजा-ए-मुबारक (कब्र) है। उन्होंने मदीना में ही पहली मस्जिद बनाई थी। मक्का में इबादत करने के बाद हज यात्री कल अराफात की पहाड़ी पर जाएंगे जहां पैगंबर मोहम्मद ने अपना आखिरी खुतबा (प्रवचन) दिया था। इसके बाद हाजी मुजदलिफा नाम के इलाके में जाएंगे और शैतान को प्रतीकात्मक तौर पर पत्थर मारने के लिए रास्ते में से कंकड़ियां इकट्ठा करेंगे।
हज के समापन पर पुरुष हाजी अपना सर मुंडवाएंगे जबकि महिला हाजी अपने थोड़े से बाल कटवाई। दुनियाभर में मुसलमान हज के समापन पर ईद-उल-अजहा या जुहा या बकरीद का त्योहार मानते हैं। ईद-उल-अजहा को अल्लाह के लिए पैगंबर इब्राहीम की बेटे की कुर्बानी देने की इच्छा के याद में मनाया जाता है। इस दिन मुसलमान भेड़, बकरे और अन्य मवेशियों की कुर्बानी देते हैं और गोश्त को गरीबों में बांटते हैं। सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मंसूर अल तुर्की ने कल पत्रकारों को बताया कि सऊदी अरब समेत दुनिया भर के 20 लाख से ज्यादा मुस्लिम इस साल हज में हिस्सा ले रहे हैं।