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साइबर हमले का शिकार हो सकता है ईरान
Updated Sat, 11 Aug 2012 04:30 PM IST
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ईरान फिर से साइबर हमले का शिकार हो सकता है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संस्थान के लिए काम करने का दावा करने वाले एक वैज्ञानिक ने फिनलैंड के साइबर-सुरक्षा समूह से कहा है कि तेहरान का परमाणु कार्यक्रम साइबर हमले का शिकार हो चुका है।
फिनलैंड की फर्म एफ सिक्योर के शोध प्रमुख मिक्को हाइपोनेन ने कहा कि उन्हें सप्ताहांत में ईरान से कई ई-मेल मिले थे। हाइपोनेन ने कहा कि केवल एक चीज, जिसकी हम पुष्टि कर सकते हैं, वह यह है कि ये सारे ई-मेल ईरान के परमाणु ऊर्जा संस्थान के भीतर से आए हैं। यह सच है या नहीं, यह हम नहीं जानते, लेकिन यह काल्पनिक भी हो सकते हैं।
माना जाता है कि वर्ष 2010 में अमेरिका और इस्राइल ने ही साइबर हमले करने में सक्षम स्टक्सनेट नाम के साइबर वायरस को बनाया था, जिसने ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को नुकसान पहुंचा था। पश्चिमी शक्तियों और इस्राइल को आशंका है कि ईरान परमाणु बम विकसित करना चाहता है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांति के उद्देश्यों के लिए ही है।
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फिनलैंड की फर्म एफ सिक्योर के शोध प्रमुख मिक्को हाइपोनेन ने कहा कि उन्हें सप्ताहांत में ईरान से कई ई-मेल मिले थे। हाइपोनेन ने कहा कि केवल एक चीज, जिसकी हम पुष्टि कर सकते हैं, वह यह है कि ये सारे ई-मेल ईरान के परमाणु ऊर्जा संस्थान के भीतर से आए हैं। यह सच है या नहीं, यह हम नहीं जानते, लेकिन यह काल्पनिक भी हो सकते हैं।
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माना जाता है कि वर्ष 2010 में अमेरिका और इस्राइल ने ही साइबर हमले करने में सक्षम स्टक्सनेट नाम के साइबर वायरस को बनाया था, जिसने ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को नुकसान पहुंचा था। पश्चिमी शक्तियों और इस्राइल को आशंका है कि ईरान परमाणु बम विकसित करना चाहता है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांति के उद्देश्यों के लिए ही है।
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