समलैंगिकों के लिए है फांसी की सजा, पर यहां है समलैंगिक धर्म गुरू
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1979 में हुए इस्लामी क्रांति के पहले ईरान एक आधुनिक सोच वाला उदार देश
उन्होंने बताया, "पिछले कुछ महीने मेरे लिए मुश्किलों भरे रहे हैं। अधिकारियों ने कई बार मेरे दोस्तों के बारे में पूछा। उन लोगों का कहना था कि मैं एक धर्मगुरू हूं और मुझे समलैंगिक लोगों से नहीं मिलना चाहिए।" वो बताते हैं, "दूसरे मुल्ला मेरी यौन दिलचस्पी पर शक़ किया करते थे। वो मुझे जान से मारने की धमकी देते थे।"
ईरान हमेशा से समलैंगिकता का इस तरह से विरोधी नहीं रहा है। 1979 में हुए इस्लामी क्रांति के पहले ईरान एक आधुनिक सोच वाला उदार देश था। समलैंगिक होना अपराध नहीं था। लेकिन इस्लामी क्रांति के बाद सबकुछ बदल गया। आज ईरान दुनिया के उन सात देशों में शामिल है जहां समलैंगिकों को मौत की सज़ा दी जाती है। ताहा बताते हैं, "मैं बचपन से ही अलग था। मुझे लड़कियों में कोई दिलचस्पी नहीं थी।"
वो बताते हैं कि जब उन्होंने हाईस्कूल में दाख़िला लिया तब पहली बार इंटरनेट का इस्तेमाल किया। वो कहते हैं, "मैंने इंटरनेट पर समलैंगिक होने के बारे में पूरी जानकारी हासिल की। उस वक्त मैं मदरसे में पढ़ता था। मैं बहुत डर गया था। मैं कई दिनों तक रोता रहा।" संयुक्त राष्ट्र के आकड़ों के मुताबिक़ एक हज़ार से ज्यादा ईरानी समलैंगिक तुर्की में रह रहे हैं। तुर्की में एक ईरानी शर्णार्थी के तौर पर रहना मुश्किलों भरा काम है। ताहा मानते हैं कि वो कभी-कभार तुर्की में गे क्लब भी जाते हैं।