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समलैंगिकों के लिए है फांसी की सजा, पर यहां है समलैंगिक धर्म गुरू

Wed, 15 Jun 2016 01:09 PM IST
अली हमदानी/बीबीसी फारसी सेवा
अली हमदानी/बीबीसी फारसी सेवा Updated Wed, 15 Jun 2016 01:09 PM IST
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iran gay cleric
पर यहां है समलैंगिक धर्म गुरू - फोटो : BBC
ईरान में समलैंगिकता पर प्रतिबंध लगा हुआ है और वहां के कानून में समलैंगिकों के लिए फांसी की सजा तय है। ईरान के एक धर्मगुरु मुल्ला ताहा न केवल ख़ुद एक समलैंगिक हैं बल्कि वो समलैंगिकों की शादी भी करवाते हैं। इस बात का शक़ होने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगी। इससे डर कर उन्हें तुर्की जाना पड़ा। इस्तांबुल में मेरी मुलाक़ात मुल्ला ताहा से हुई। तुर्की में ईरान से गए बहुत सारे समलैंगिक लोग रहते हैं। लेकिन ताहा उन्में ख़ास हैं क्योंकि वे एक धर्मगुरु हैं। ईरान में शिया धर्मगुरुओं की काफ़ी इज़्ज़त है। देश में उनकी हुकूमत चलती है। वे अध्यात्मिक मसलों पर लोगों को राय देते हैं। ताहा एक धार्मिक परिवार से आते हैं। उनके पिता भी ईरान में एक बड़े धर्मगुरु थे। ताहा ने 15 साल की उम्र में इस्लाम की शिक्षा लेने के लिए मदरसे में जाना शुरू किया। उन्होंने बताया कि वो अपने यौन रूझान की बात को छुपा कर रखे हुए थे। यह बात लोगों के सामने तब आई जब ताहा ने गुपचुप तरीके से समलैंगिकों की शादी करवानी शुरू की। उन्होंने बताया, "पिछले कुछ महीने मेरे लिए मुश्किलों भरे रहे हैं। अधिकारियों ने कई बार मेरे दोस्तों के बारे में पूछा। उन लोगों का कहना था कि मैं एक धर्मगुरू हूं और मुझे समलैंगिक लोगों से नहीं मिलना चाहिए।" वो बताते हैं, "दूसरे मुल्ला मेरी यौन दिलचस्पी पर शक़ किया करते थे। वो मुझे जान से मारने की धमकी देते थे।"
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1979 में हुए इस्लामी क्रांति के पहले ईरान एक आधुनिक सोच वाला उदार देश

iran gay cleric
ईरान हमेशा से समलैंगिकता का इस तरह से विरोधी नहीं रहा - फोटो : BBC


उन्होंने बताया, "पिछले कुछ महीने मेरे लिए मुश्किलों भरे रहे हैं। अधिकारियों ने कई बार मेरे दोस्तों के बारे में पूछा। उन लोगों का कहना था कि मैं एक धर्मगुरू हूं और मुझे समलैंगिक लोगों से नहीं मिलना चाहिए।" वो बताते हैं, "दूसरे मुल्ला मेरी यौन दिलचस्पी पर शक़ किया करते थे। वो मुझे जान से मारने की धमकी देते थे।"

ईरान हमेशा से समलैंगिकता का इस तरह से विरोधी नहीं रहा है। 1979 में हुए इस्लामी क्रांति के पहले ईरान एक आधुनिक सोच वाला उदार देश था। समलैंगिक होना अपराध नहीं था। लेकिन इस्लामी क्रांति के बाद सबकुछ बदल गया। आज ईरान दुनिया के उन सात देशों में शामिल है जहां समलैंगिकों को मौत की सज़ा दी जाती है। ताहा बताते हैं, "मैं बचपन से ही अलग था। मुझे लड़कियों में कोई दिलचस्पी नहीं थी।"

वो बताते हैं कि जब उन्होंने हाईस्कूल में दाख़िला लिया तब पहली बार इंटरनेट का इस्तेमाल किया। वो कहते हैं, "मैंने इंटरनेट पर समलैंगिक होने के बारे में पूरी जानकारी हासिल की। उस वक्त मैं मदरसे में पढ़ता था। मैं बहुत डर गया था। मैं कई दिनों तक रोता रहा।" संयुक्त राष्ट्र के आकड़ों के मुताबिक़ एक हज़ार से ज्यादा ईरानी समलैंगिक तुर्की में रह रहे हैं। तुर्की में एक ईरानी शर्णार्थी के तौर पर रहना मुश्किलों भरा काम है। ताहा मानते हैं कि वो कभी-कभार तुर्की में गे क्लब भी जाते हैं।

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