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खाड़ी देशों का संकट 2022 फुटबॉल विश्वकप के लिए बन रहा परेशानी

Wed, 01 Nov 2017 02:39 PM IST
उमर दराज नांगियाना
उमर दराज नांगियाना Updated Wed, 01 Nov 2017 02:39 PM IST
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gulf crisis may bother qatar for 2022 football world cup
- फोटो : BBC

कतर को वर्ष 2022 के विश्व कप की मेजबानी मिली हुई है। लेकिन आयोजन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य में देरी, मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप और कई देशों के साथ उसके रिश्तों में आई खटास ने कतर की परेशानी बढ़ाई है। चार महीने पहले सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र जैसे कतर के पड़ोसियों ने उसके साथ रिश्ते खत्म करने की घोषणा कर दी। सऊदी अरब के साथ उसका एकमात्र जमीनी रास्ता था जो संयुक्त अरब अमीरात तक जाता था।

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दो महीने का सामान बचा था
वर्ल्ड कप के लिए बनाए जा रहे आठ में से सात स्टेडियम के लिए निर्माण सामग्री कतर इसी रास्ते से मंगवाता था। संकट के समय निर्माण कार्य कर रहीं ज्यादातर कंपनियों के पास महज दो महीने का ही सामान बचा था जबकि संकट समाप्त होने की संभावनाएं नहीं दिख रही हैं।
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यह भी चिंताएं थी कि संकट के लंबा खिंचने के कारण कतर पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों की वफादार कंपनियां सामान की कमी के कारण कतर में अपना काम बंद कर देंगी। कतर सरकार को शायद इसका अंदाजा था। 
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2022 का विश्व कप आयोजित करवाने वाली कतर की सुप्रीम कमेटी डिलीवरी एंड लीगेसी के प्रमुख हसन अल थवाडी कहते हैं- उन्होंने जल्द और प्रभावी कदम उठाए। बीबीसी से एक हालिया इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि संकट के कारण बिजनेस करने के लिए वैकल्पिक रास्ते ढूँढ़ लिए गए थे, जहां से कतर में निर्माण समाग्री आती रहे।

कराची के रास्ते आ रहा माल

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हसन अल थवाडी कहते हैं, "हमने तुरंत चीन, मलेशिया, तुर्की और ओमान से ये निर्माण सामग्री मंगवानी शुरू कर दी है। सजावटी सामान जो हम पहले संयुक्त अरब अमीरात से लाते थे अब ओमान से आता है। इसी तरह स्टील या सरिया चीन और मलेशिया से मंगवाया जाता है।"

कतर के हम्दनामी बंदरगाह और पाकिस्तान में कराची के एक बंदरगाह के बीच रास्ता खोल दिया गया है जिससे जरूरत की निर्माण सामग्री कतर मंगाई जाती है। हसन कहते हैं, "ये कदम बताते हैं कि कतर इसको लेकर कितना गंभीर है और इस तरह कतर में 2022 विश्व कप की तैयारियों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है।"

हाल ही में आठ में से पहला स्टेडियम 'खलीफा स्टेडियम' दोहा में तैयार होने के बाद खोल दिया गया था। हसन के मुताबिक, बाकी दो स्टेडियम अगले महीने खोल दिए जाएंगे जबकि कतर का साल 2020 तक तमाम स्टेडियम बनाने का इरादा है।

बीबीसी की टीम को अल खोर के इलाके के पास मौजूद एक निर्माणाधीन 'बैस स्टेडियम' का सीमित दौरा करवाया गया। 40 हजार दर्शकों की क्षमता वाले इस स्टेडियम में 2022 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच खेला जाएगा।

पूरा होने के करीब इस स्टेडियम पर काम जारी था जहां मजदूर भारी उपकरणों की मदद से आखिरी चरण के काम में व्यस्त दिखाई दिए। हसन के मुताबिक, न तो किसी कंपनी ने किसी प्रोजेक्ट को छोड़ने का इरादा दिखाया और न ही उन्हें निर्माण सामग्री की कमी का सामना करना पड़ा।

कतर को 30 हजार लोगों की जरूरत

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कतर को 2022 के विश्व कप के मैदानों और उनसे संबंधित सुविधाओं और अन्य परियोजनाओं के लिए साल में 30 हजार लोगों की जरूरत है, जो वह ज्यादातर दक्षिण एशियाई देशों से पूरा करता है। इन देशों से लाखों की तादाद में आप्रवासी कतर में मौजदू हैं।

मजदूरों के साथ बुरे व्यवहार का आरोप
कतर पर मजदूरों के अधिकारों के उल्लंघन और उन्हें सुविधाएं न देने का आरोप लगता रहा है। लेकिन हसन का दावा है कि कतर में चंद सालों में कानून के साथ जमीनी हालात बदल चुके हैं, नियमों को कड़ाई से लागू करवाने के लिए इंस्पेक्टरों की तादाद बढ़ा दी गई है और बैंक के जरिए हर मजदूर को तनख्वाह की अदायगी के नियम लागू किए गए हैं।

प्रतिबंधित इलाकों में मीडिया या बाहरी पर्यवेक्षकों के लिए मजदूरों के कैंपों तक जाना मुमकिन नहीं है। हालांकि, हसन का कहना है कि कतर उन चंद देशों में से एक है, जहां ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को आने का अधिकार है और ये संगठन कतर में रहकर यहां की सरकार की आलोचना कर चुके हैं। वे कहते हैं कि यह एक ग़लतफहमी है कि कतर में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को आने से रोका जाता है, पारदर्शिता के मामले में कतर पर उंगली नहीं उठाई जा सकती है।
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