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दुनिया की सबसे चालाक खुफिया एजेंसी ने चलाया ऑपरेशन, इजरायल ने 53 साल बाद खोज निकाली खास घड़ी

Sun, 08 Jul 2018 01:44 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला Updated Sun, 08 Jul 2018 01:44 PM IST
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After 53 years israel found their national hero watch in Syria

इजरायल 53 सालों से जिस घड़ी की खोज में लगा हुआ था वह उसे मिल गई है। ये घड़ी देश के लिए बहुत खास थी क्योंकि यह उनके नेशनल हीरो एली कोहेन की घड़ी थी। एली वही हैं जिन्हें 1965 में सीरिया ने बीच चौराहे पर फांसी दे दी थी। दरअसल मिस्त्र में जन्मे एली इजरायल के लिए जासूसी करते थे। वह सीरिया में भी जासूसी करने गए थे। जब उनका ये राज वहां खुल गया तो उन्हें मौत की सजा दी गई। इसके बाद से ही वह इजरायल के लिए उनके हीरो बन गए।

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दुनिया की सबसे चालाक खुफिया एजेंसी ने की तलाश

इस तलाश की सारी जिम्मेदारी खुफिया एजेंसी मोसाद को सौंपी गई थी। यह दुनिया की सबसे चालाक खुफिया एजेंसी है। मोसाद ने ये सर्च ऑपरेशन वहीं पर चलाया जहां एली की मौत हुई थी, यानि सीरिया में। एजेंसी ने काफी मशक्कत के बाद अपने देश के हीरो की आखिरी निशाली, उनकी घड़ी ढूंढ निकाली। महान जासूस एली की घड़ी ढूंढने के लिए मोसाद ने एक विशेष अभियान चलाया था।
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इजरायल में जाकर करते थे जासूसी

एली कोहेन ने साल 1960-1965 में सीरिया में रहकर इजरायल के लिए जासूसी की थी। लेकिन 1965 में वह पकड़े गए और उन्हें फांसी की सजा दी गई। तभी से इस घड़ी की तलाश की जा रही थी। इस विशेष अभियान पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी नजर लगातार बनाए हुए थे।

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प्रधानमंत्री ने की प्रशंसा

After 53 years israel found their national hero watch in Syria

घड़ी मिलने के बाद प्रधानमंत्री ने मोसाद के साहसिक अभियान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस टीम का मकसद अपने महान जासूस की घड़ी वापस लाना था। घड़ी इस वक्त मोसाद के मुख्यालय में रखी गई है। साथ ही ये अनुमान भी लगाया जा रहा है कि इसे जासूस एली के परिवार को सौंपा जाएगा।

एजेंसी की तरफ से अभी तक केवल इतना ही बताया गया है कि घड़ी खोज ली गई है। इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई कि इसे कहां से किस हालत में ढूंढा गया।  

इजरायल को दिलाई थी जीत

एली को इसलिए नेशनल हीरो कहा जाता है क्योंकि उन्होंने ही अरब और इजरायल के संघर्ष में इजरायल को जीत दिलाई थी। मोसाद से जुड़ने के बाद एली अरब चले गए थे। जहां से वह खुफिया जानकारी जुटाते थे। इसी का फायदा लड़ाई में इजरायल को हुआ। उनकी जासूसी की बात साल 1964 में सीरिया को पता चल गई। जिसके बाद 1965 में उन्हें ढूंढकर फांसी दे दी गई।

हालांकि इजरायल ने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की थी। इसके लिए उसने अंतरराष्ट्रीय अपील भी की फिर भी वह उन्हें नहीं बचा सका। उनकी मौत के बाद ना तो उनके कपड़ों का कुछ पता चला और ना ही उनके सामान का। केवल उनकी एक फोटो सामने आई जिसमें उन्होंने एक घड़ी पहनी हुई थी तभी से उनकी आखिरी निशानी कही जाने वाली इस घड़ी को तलाशा जा रहा था। 

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