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मिलिए सीरिया की मलाला यूसुफज़ई से

Wed, 23 Nov 2016 07:43 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Wed, 23 Nov 2016 07:43 PM IST
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7 years old Bana from Syria, shares her fear thoughts on twitter

पाकिस्तान में तालिबान के नियंत्रण वाली स्वात घाटी से एक 11-12 साल की बच्ची गुल मकई अपने अनुभव को हर हफ्ते अपनी डायरी में लिखती थी जिसे बीबीसी के जरिए दुनिया के सामने लाया जाता था।

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बाद में वही बच्ची मलाला यूसुफजई (गुल मकई का असली नाम) शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली सबसे कम उम्र की विजेती बनी। आज उसी तरह की दूसरी मिसाल पेश कर रही है सात साल की एक बच्ची बाना अलआबेद। ये बच्ची सीरिया के एलेप्पो में रहती है।
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सीरिया पिछले पांच वर्षों से गृहयुद्ध का शिकार है और एलेप्पो पर फिलहाल विद्रोहियों का कब्जा है। एलेप्पो में रह रहे लोग एक तरफ विद्रोहियों का जुल्म सहने को मजबूर हैं दूसरी तरफ सीरियाई सरकार और गठबंधन सेना की हवाई बमबारी की मार झेलते हैं।
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युद्ध क्षेत्र में रह रहे लोगों की मुश्किलों को अब दुनिया के सामने ला रही हैं बाना अलआबेद। वो इसके लिए ट्विटर का सहारा ले रही हैं। और इस काम में उनकी मां फातिमा उनकी मदद करती हैं।

बाना को इस वक्त 90 हजार लोग ट्वीटर पर फॉलो करते हैं

7 years old Bana from Syria, shares her fear thoughts on twitter

बाना कहती हैं कि वो रात में भी नहीं सो सकतीं क्योंकि कई बार तो रात भर बमबारी होती है। बाना को इस वक्त 90 हजार लोग ट्वीटर पर फॉलो करते हैं। उनकी मां फातिमा पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने प्रोपगैंडा के लिए अपनी सात साल की बेटी का इस्तेमाल कर रही हैं।

लेकिन इन आरोपों को खारिज करते हुए फातिमा कहती हैं कि एलेप्पो में हर कोई डर के साये में जीने को मजबूर है। वो कहती हैं कि उनका मकसद सिर्फ ये है कि दुनिया का ध्यान इस ओर खिंचा जाए कि एलेप्पो में बच्चों और आम नागरिकों की जिंदगी कितनी मुश्किल है।

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