जर्मनी: बच्चों के उत्पीड़न मामलों में चर्च की 'विफलता' पर शीर्ष पादरी ने दिया इस्तीफा
बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई को लेकर चर्च की विफलता से नाराज जर्मनी के एक शीर्ष कैथोलिक पादरी ने पोप फ्रांसिस को इस्तीफा सौंपा है।
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जर्मनी के शीर्ष कैथोलिक पादरियों में से एक कार्डिलन रेनहार्ड ने बच्चों के यौन उत्पीड़न मामलों को लेकर शुक्रवार को पद से इस्तीफा दे दिया। इसे लेकर पादरी रेनहार्ड मार्क्स ने बताया कि बच्चों के यौन उत्पीड़न मामलों में चर्च की 'संस्थागत और प्रणालीगत विफलता' की वजह से मैंने अपना इस्तीफा पोप फ्रांसिस को सौंप दिया है।
हालांकि, पोप फ्रांसिस ने अभी रेनहार्ट का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है और इस पर फैसला लेने तक उन्हें कार्यालय में रहने को कहा है। बता दें कि पिछले सप्ताह पोप ने आर्कडियोसी ऑफ कोलोन (Archdiocese of Cologne) द्वारा उत्पीड़न के मामलों के निपटने की जांच के लिए दो वरिष्ठ विदेशी पादरियों को भेजा था।
वयस्कों के यौन उत्पीड़न अपराध की श्रेणी में, पोप ने किया कानून में बदलाव
हाल ही में पोप फ्रांसिस ने चर्च के कानून में बदलाव किया था जिसके तहत अब अब पादरियों द्वारा वयस्कों के यौन उत्पीड़न को भी अपराध की श्रेणी में शामिल किया जा सकेगा। नए प्रावधान 14 साल के अध्ययन के बाद बीते मंगलवार को जारी किए गए थे। इसमें यह माना गया है कि पादरी अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर वयस्कों का यौन शोषण भी कर सकते हैं। बदलावों के अनुसार चर्च में स्कूल प्रधानाचार्यों व इस तरह के पदों से जुड़े अन्य लोगों को बच्चों और वयस्कों के यौन उत्पीड़न के लिए भी दंडित किया जा सकेगा।
कानून में बिशप और अन्य ईसाई धर्मगुरुओं को प्राप्त उस विशेषाधिकार को भी समाप्त कर दिया गया है, जिसका दुरुपयोग कर वे यौन उत्पीड़न के मामलों की अनदेखी या उनपर पर्दा डालने की कोशिश करते थे। अब उन्हें आरोपी पादरियों के खिलाफ उचित जांच न करने या उनके खिलाफ अभियोग की मंजूरी न देने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कानून में किए गए इन संशोधनों के बाद यदि कोई बिशप लापरवाही बरतता है या यौन अपराधों के बारे में चर्च अधिकारियों को सूचना नहीं देता है तो उसे उसके पद से हटाया जा सकेगा।