जर्मनी: ग्रीन पार्टी को ले डूबेगा उसका बेहद ग्रीन एजेंडा?
विश्लेषकों के मुताबिक हाल में अंगेला मैर्केल की पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) और वाम मध्यमार्गी पार्टी सोशल डेमोक्रेट्स ने ग्रीन पार्टी पर हमले तेज कर दिए हैँ। इसका असर पिछले हफ्ते हुए एक जर्मन प्रांत के चुनाव में देखने को मिला...
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जर्मनी की ग्रीन पार्टी ने एलान किया है कि अगले सितंबर में होने वाले आम चुनाव में उसकी नेता एनालेना बेयरबॉक चांसलर पद की उम्मीदवार होंगी। वे जर्मनी को ‘सोशियो-इकोलॉजिकल इकॉनमी’ (सामाजिक-पर्यावरणीय अर्थव्यवस्था) बनाने के एजेंडे के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगी। ग्रीन पार्टी ने कहा है कि उसका लक्ष्य 2035 तक जर्मनी में कार्बन न्यूट्रैलिटी (कार्बन उत्सर्जन शून्य करना) हासिल करना होगा। चुनाव घोषणापत्र जारी करते हुए बेयरबॉक ने कहा- ‘जो लोग कहते हैं कि जलवायु संरक्षण से समृद्धि खतरे में पड़ती है, उनसे मैं कहना चाहूंगी कि हां ऐसा होता है। अतीत में हमने समृद्धि कोयला, तेल और गैस जला कर हासिल की है। लेकिन अब 20वीं सदी खत्म हो चुकी है।’
बेयरबॉक ने कहा कि भविष्य के बाजार जलवायु न्यूट्रल (जलवायु को नुकसान ना पहुंचाने वाले) होंगे। उन्होंने कहा- सवाल यह नहीं है कि ऐसा होगा या नहीं, बल्कि हमें ऐसा करने की कोशिश करनी ही होगी। गौरतलब है कि सितंबर में होने वाले चुनाव के साथ चांसलर पद पर अंगेला मैर्केल की 16 साल लंबी पारी खत्म हो जाएगी। विश्लेषकों का कहना है कि बेयरबॉक ने उनकी जगह लेने के लिए अपना दावा पेश किया है। गुजरे महीनों में उनकी और ग्रीन पार्टी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। लेकिन अब जो एजेंडा पार्टी ने सामने रखा है, उससे उद्योग जगत और आम उपभोक्ताओं में पार्टी को लेकर राय बदल सकती है। ग्रीन पार्टी ने अपने घोषणापत्र में साफ कहा है कि ईंधन और परिवहन के मामले में लोगों को ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
विश्लेषकों के मुताबिक हाल में अंगेला मैर्केल की पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) और वाम मध्यमार्गी पार्टी सोशल डेमोक्रेट्स ने ग्रीन पार्टी पर हमले तेज कर दिए हैँ। इसका असर पिछले हफ्ते हुए एक जर्मन प्रांत के चुनाव में देखने को मिला। वहां जनमत सर्वेक्षणों में ग्रीन पार्टी को जितना समर्थन मिलने की उम्मीद जताई गई थी, असल समर्थन उससे बहुत कम रहा। इधर बेयरबॉक पर अपनी अतिरिक्त आय छिपाने और अपनी शैक्षिक योग्यता को बढ़ा-चढ़ा कर बताने के आरोप भी लगे हैं। अब ग्रीन पार्टी ने जर्मनी के उद्योगों पर हर टन कार्बन उत्सर्जन पर 60 यूरो का टैक्स लगाने का इरादा जताया है। सीडीयू और सोशल डेमोक्रेट्स ने कहा है कि कंपनियां ये बोझ उपभोक्ताओं पर ट्रांसफर करेंगी। यानी आम आदमी का जीना इससे दूभर होगा।
लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि ग्रीन पार्टी के भीतर जिस तरह की सोच है, उसे देखते हुए घोषणापत्र काफी उदार है। पिछले हफ्ते हुए पार्टी के सम्मेलन में कई युवा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी ने बहुत हलका एजेंडा बनाया है। उन्होंने अगले दस साल में जर्मनी की अर्थव्यवस्था को नया रूप देने पर 500 अरब यूरो खर्च करने की मांग की। उन्होंने कर्ज लेकर ये रकम जुटाने का सुझाव दिया।
विश्लेषकों का कहना है कि बेयरबॉक रुख चीन और रूस के प्रति बहुत सख्त है। वे रूस से जर्मनी तक बन रही नॉर्ड स्ट्रीम-2 परियोजना की विरोधी हैं। साथ ही उन्होंने जो ग्रीन पैकेज पेश किया है, वह अमेरिकी राष्ट्रपति इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज से काफी मेल खाता है। इसलिए मुमकिन है कि तीन महीने बाद होने वाले चुनाव में अमेरिका के जो बाइडन की सहानुभूति उनके साथ रहे। लेकिन सीडीयू और सोशल डेमोक्रेट्स पार्टियों को ग्रीन पार्टी के घोषणापत्र से उसकी आलोचना करने के नए मुद्दे मिले हैं। उन्होंने इसे हकीकत से दूर और खोखले आशावाद पर आधारित बताया है।