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केन्या में शेर के पुरखों को खोजने का दावा, एक दशक पहले मिले जीवाश्मों की अब जाकर सुलझी गुत्थी
Sat, 20 Apr 2019 08:10 PM IST
तिवारी अभिषेक
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: तिवारी अभिषेक
Updated Sat, 20 Apr 2019 08:10 PM IST
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फाइल फोटो
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केन्या में 10 साल पहले वैज्ञानिकों को जानवर की हड्डी के जो जीवाश्म मिले उनकी गुत्थी अब जाकर सुलझ गई है। इन जीवाश्म वैज्ञानिकों ने शेर के पुरखों को खोजने का दावा किया है।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, अफ्रीका में सवाना के घास के मैदानों पर 2.3 करोड़ साल पहले शेर की बहुत ही विशाल प्रजाति रहती थी। इस प्रजाति के शेर का वजन करीब 1,500 किलोग्राम तक था और वे आधुनिक दौर के हाथी जितने बड़े जानवरों का शिकार करते थे। वैज्ञानिकों ने ऐसे नतीजों की कल्पना तक नहीं की थी।
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ड्यूक और ओहायो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मैथ्यू बोर्थ्स और नैंसी स्टीवंस ने पुरातन शेरों के जीवाश्मों की जांच के बाद यह जानकारी दी है। वैज्ञानिकों ने निचले जबड़े, दांत और अन्य हड्डियों की जांच करके इस जीव को स्वाहिली भाषा में सिम्बाकुबवा-कुतोक-अफ्रीका (बड़ा अफ्रीकी शेर) नाम दिया गया है।
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बोर्थ्स कहते हैं कि बहुत ही बड़े दांतों के आधार पर हम कह सकते हैं कि सिम्बाकुबवा बहुत ही खास और विशाल मांसाहारी जीव थे। वे आधुनिक शेर के मुकाबले बहुत बड़े थे, शायद ध्रुवीय भालू से भी बड़े।
मायोसिन काल में रही मौजूदगी
शोधकर्ताओं के मुताबिक ये विशाल शेर पृथ्वी पर मायोसिन काल में मौजूद थे। मायोसिन काल वह समय है जब आदम वानर पृथ्वी पर चलना सीख रहे थे। उसी कालखंड के दौरान स्तनधारी जीव खुद को सुरक्षित रखने में सफल हो सके। क्रमिक विकास के चक्र में सिम्बाकुबवा करीब एक करोड़ साल पहले लुप्त हो गए।