अमेरिका की अर्थव्यवस्था में राजस्व का एक बड़ा स्रोत हैं अंतरराष्ट्रीय छात्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेरिका के विदेशी छात्रों देश में रहने की अनुमित दे दी है लेकिन इससे पहले अमेरिका ने एलान किया था कि अगर छात्रों के संस्थान ऑनलाइन कक्षाएं दे रहे हैं तो उन्हें अमेरिका छोड़ अपने देश वापस लौट जाना चाहिए। हालांकि अमेरिका ने इस फैसले को बदलते हुए छात्रों को अमेरिका में रहने की मंजूरी दे दी है।
लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो इससे कई सारे भारतीय छात्रों पर प्रभाव पड़ता। अंतरराष्ट्रीय शिक्षा विनियम की 2019 ओपन डोर्स रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 के शैक्षणिक साल में अमेरिका में एक करोड़ से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय छात्र पढ़ रहा था। अमेरिका मेें अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में चीन के बाद भारत का दूसरा नंबर है। अमेरिका में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या में आधे छात्र चीन और भारत के हैं।
2018-19 के शैक्षणिक साल में पहली बार अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्र की संख्या दो लाख के पार चली गई थी। ये संख्या 2012-13 में एक लाख से भी कम थी। अमेरिकी सरकार की ओर से जारी डाटा के मुताबिक जनवरी 2020 में अमेरिका में भारत के सक्रिय छात्रों की संख्या 1,94,556 थी।
हालांकि भारत अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का महत्वपूर्ण स्रोत है, इसलिए भारतीय छात्रों का प्रोफाइल अमेरिका के बाकी अंतरराष्ट्रीय छात्रों से अलग है। 80 फीसदी से ज्यादा भारतीय छात्र स्नातक कार्यक्रमों और वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण को लेकर नामांकित हैं, जिससे वीजाधारक छात्रों को एक साल के लिए काम करने की अनुमित मिल जाती है।
अमेरिका में सिर्फ 12 फीसदी छात्र ही ऐसे हैं जो पूर्वस्नातक कार्यक्रमों के लिए नामांकित हैं। यह हिस्सा भारत को छोड़कर अन्य देशों के लिए कम से कम 45 फीसदी है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय छात्र राजस्व एक बड़ा स्रोत माने जाते हैं। वॉशिंगटन आधारित अंतरराष्ट्रीय छात्रों और एक्सचेंज पर नॉन प्रॉफिट एजेंसी एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल एजुकेटर्स के मुताबिक अमेरिका के राजस्व में अंतरराष्ट्रीय छात्र 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का योगदान करते हैं।
यही नहीं अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका में अलग-अलग क्षेत्रों में 4,60,000 नौकरियों का समर्थन करते हैं। नवंबर 2019 में किए गए एक सर्वे के मुताबिक वीजा आवेदन प्रक्रिया में देरी और टालमटोली की वजह से साल 2019 में अमेरिका में नए नामांकन में बड़ी गिरावट देखी गई।